TMC के ‘मांस-मछली प्रतिबंध’ वाले दावों के बीच PM Modi ने कालीबाड़ी के किए दर्शन, जहां चढ़ता है नॉनवेज प्रसाद
PM Modi Visits Kolkata Kalibari: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ऐतिहासिक थंथानिया कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। अपनी अनोखी मांसाहारी भोग परंपरा के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर का दौरा राज्य में भोजन संस्कृति पर चल रही राजनीतिक बहस के बीच हुआ।
पीएम मोदी ने उत्तर कोलकाता में अपने रोड शो से पूर्व रविवार को मंदिर के दर्शन किए। पश्चिम बंगाल में मांसाहारी भोजन पर जारी राजनीतिक गरमागरमी के कारण यह यात्रा महत्वपूर्ण रही। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता में आने पर राज्य की भोजन संस्कृति में हस्तक्षेप कर सकती है।

टीएमसी ने क्या किया था दावा?
टीएमसी नेताओं ने बिहार और गुजरात जैसे भाजपा-शासित राज्यों में त्योहारों के दौरान मछली व मांस की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों का हवाला दिया था। बनर्जी ने ऐसी नीतियों को बंगाल की सांस्कृतिक पहचान की समझ की कमी बताया।
भाजपा बोलीं- हमारी सरकार नॉनवेज पर नहीं लगाएगी रोक
भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने स्पष्ट किया कि मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध की कोई योजना नहीं, व लोगों की खान-पान संबंधी पसंदों का सम्मान किया जाएगा।
इस विवाद पर भाजपा नेता और नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने मांस खाते हुए एक वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा, "ममता दीदी, मैं भाजपा में हूं और शौक से मांसाहारी हूं।" यह प्रतिक्रिया भाजपा के स्टैंड के अनुरूप थी।
अनुराग ठाुकर समेत भाजपा नेताओं ने खाया था माछ-भात
पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण के प्रचार के अंतिम दिन, अनुराग ठाकुर सहित भाजपा नेताओं ने मछली और चावल (माछ भात) खाकर ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब दिया। यह कदम उनके इस दावे का खंडन करने का प्रयास था कि भाजपा सत्ता में आने पर मछली पर प्रतिबंध लगाएगी।
पीएम मोदी ने मां काली की विविवत पूजा
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे पर मंदिर के मुख्य पुजारी गुणासेंदु भट्टाचार्य ने खुशी जताई। उन्होंने बताया, "प्रधानमंत्री यहाँ आए, देवी को माला व प्रसाद चढ़ाकर पूजा की। वे कुछ देर बैठकर माँ की आरती करते रहे।" भट्टाचार्य ने आगे कहा, "मैंने उन्हें मंदिर के शानदार इतिहास से अवगत कराया और उन्होंने उसे धैर्यपूर्वक सुना। क्या प्रार्थनाएं कीं, यह मुझे नहीं पता, किंतु विश्वास है कि उन्होंने देश के कल्याण के लिए ही कामना की होगी।"
कोलकाता का कालीबाड़ी मंदिर में भक्तों की है अटूट श्रद्धा
थंथानिया कालीबाड़ी कोलकाता के सबसे प्राचीन व प्रतिष्ठित काली मंदिरों में से एक है। 1703 में स्थापित, इसका 300 से अधिक वर्षों का गौरवशाली इतिहास है, जो शहर के वर्तमान स्वरूप से भी पुराना है। यहाँ माँ सिद्धेश्वरी की पूजा की जाती है, जिन्हें 'जाग्रत' देवी माना जाता है। मंदिर समिति के सदस्य पलाश घोष ने बताया हम मंदिर से जुड़ी नौवीं पीढ़ी हैं, यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक अवसर है।"
कालीबाड़ी में चढ़ता है मांसाहारी प्रसाद?
यह मंदिर देवी को मांसाहारी प्रसाद चढ़ाने की अपनी दुर्लभ प्रथा के लिए विख्यात है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत रामकृष्ण परमहंस ने की थी, जिन्होंने ब्रह्मानंद केशव चंद्र सेन के स्वास्थ्य लाभ हेतु प्रार्थना करते हुए 'डाब-चिंगड़ी' का भोग लगाया था। यह परंपरा तब से लगातार निभाई जा रही है।
कालीबाड़ी मंदिर में क्यों चढ़ता है नॉनवेज प्रसाद?
रामकृष्णदेव जब श्यामापुकुर में बीमार थे, तब भी श्रद्धालुओं ने इसी प्रथा का पालन करते हुए मांसाहारी प्रसाद के साथ प्रार्थनाएं की थीं। यह मंदिर रामकृष्ण परमहंस से गहराई से जुड़ा है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे अक्सर यहाँ आते थे और भक्ति गीत गाया करते थे।
मंदिर की दीवारों पर उनकी एक प्रसिद्ध पंक्ति लिखा है: "शंकरेर हृदय माझें, काली बिराजे" (माँ काली शंकर के हृदय में वास करती हैं)।














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