बिहार को विशेष राज्य का दर्जा अब तक नहीं मिला, क्या PM के पटना दौरे पर जदयू 'उदासीन' ?
क्या भाजपा और जदयू के रिश्तों में दरार आ रही है ? ये सवाल इसलिए, क्योंकि पीएम मोदी के बिहार दौरे (PM Modi visit Bihar) को लेकर जदयू का उत्साह कठघरे में है।
नई दिल्ली / पटना, 12 जुलाई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर कार्यक्रम हाईप्रोफाइल होता है। विशेष इंतजामों में कोई कसर बाकी नहीं रखी जाती। मई 2014 के बाद करीब 98 महीनों के कार्यकाल में पीएम मोदी के कई कार्यक्रम आयोजन की भव्यता के पैमाने पर सुर्खियों में रहे हैं। हालांकि, इस बात की चर्चा पर स्वाभाविक सवाल उभरता है कि पीएम के कार्यक्रम और आयोजन की भव्यता का संदर्भ क्या है ? इस बात का जिक्र इसलिए क्योंकि पीएम मोदी करीब 20 महीनों के बाद बिहार का दौरा (PM Modi visit Bihar) कर रहे हैं, लेकिन खबरों के मुताबिक पीएम मोदी के दौरे को लेकर बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल यूनाइटेड का 'उत्साह' कठघरे में है। क्या भाजपा और जदयू के रिश्तों में दरार आ रही है ? सवाल पर भाजपा और जदयू की दलीलें इस रिपोर्ट में पढ़िए

BJP-JDU के रिश्तों में खटास या कुछ और
भाजपा जदयू रिश्तों पर अटकलों का दौर इसलिए शुरू हुआ है क्योंकि नीतीश कुमार की सरकार की ओर से पीएम मोदी के 'स्वागत' में विज्ञापन नहीं लगवाए गए हैं। इस पर जदयू नेताओं का कहना है कि विज्ञापन न लगना "मानवीय भूल हो सकती है।" हालांकि, एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रसंग को एक और संकेत के रूप में देखा जा सकता है कि बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) और भाजपा गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि पीएम 20 महीने बाद बिहार आ रहे हैं। पड़ोसी राज्य झारखंड के अखबारों में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने पीएम मोदी के देवघर दौरे को लेकर भरपूर विज्ञापन छपवाए।

पीएम मोदी के दौरे का मकसद
बिहार की राजधानी पटना में बिहार विधानसभा भवन के 100 साल पूरे होने के मौके पर विधानसभा परिसर में शताब्दी स्तंभ स्थापित कराया गया है। पीएम मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी एक संग्रहालय की भी नींव रखेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक यह पहला मौका है जब कोई प्रधानमंत्री बिहार विधानसभा परिसर में आ रहे हैं। खबरों में इसका क्रेडिट भाजपा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा को दिया जा रहा है। भले ही पीएम मोदी कुछ घंटों के लिए पटना में आ रहे हैं, लेकिन उनके स्वागत में विधानसभा की ओर से कोई "स्वागत" विज्ञापन नहीं होना कठघरे में है।

No PM Modi poster : भाजपा और जदयू की दलीलें
पीएम मोदी के दौरे को लेकर JDU के कथित 'ठंडे उत्साह' पर विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा का कहना है कि कल एक विज्ञापन आया था। उन्होंने कहा, पूरी सरकार पीएम मोदी का विधानसभा दौरा ऐतिहासिक हो, यह सुनिश्चित करने के लिए ओवरटाइम काम कर रही है। सोमवार को जारी विज्ञापन सार्वजनिक निमंत्रण था। दूसरी ओर जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सरकार की ओर से 'पीएम के स्वागत में विज्ञापन' न लगवाना "मानवीय त्रुटि हो सकती है।" यह कहना कि जानबूझकर पीएम मोदी के स्वागत में विज्ञापन नहीं लगवाए गए हैं, ठीक नहीं।

बिजनेसमैन का विज्ञापन, जदयू नेता गायब ?
गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के राजनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। पीएम के बिहार विधानसभा दौरे पर जदयू नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री का दौरा बिहार विधानसभा अध्यक्ष के निमंत्रण पर हो रहा है। उन्होंने कहा, "विधानसभा सचिवालय इसके लिए सक्रिय है।" एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक जदयू नेता ने कहा, राज्य सरकार के विभागों से जो भी सहयोग की उम्मीद थी, वह दिया गया है। हालांकि, सरकारी विज्ञापनों की कथित 'गैरमौजूदगी' के बीच पटना में एक और विज्ञापन ने सबका ध्यान खींचा है। हिंदू जागरण मंच नाम के संगठन से जुड़े बिजनेसमैन जीवन कुमार ने पीएम मोदी के लिए फुल-फ्रंट-पेज स्वागत विज्ञापन (दैनिक भास्कर में) छपवाया है। इस ऐड में पीएम मोदी और खुद बिजनेसमैन के अलावा सिर्फ बीजेपी नेता हैं। जदयू नेताओं और खुद सीएम नीतीश नदारद हैं।

पीएम से नीतीश नाराज, क्या है हकीकत ?
रिपोर्ट के मुताबिक जीवन कुमार बालू के कारोबार से जुड़े हैं। पिछले साल जीवन के बेटे की जन्मदिन पार्टी में सत्ताधारी गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कथित नाराजगी सुर्खियों में रही थी। खबरों में कहा गया कि नीतीश जदयू नेताओं से इतने नाराज थे कि उन्होंने कई महीनों तक बात नहीं की। इसी बीच पीएम मोदी के पटना दौरे से पहले उन्हीं जीवन कुमार की ऐड और जदयू नेताओं की गैरमौजूदगी से सवाल खड़ा होना लाजमी है।

BJP जेडीयू में मतभेद, लेकिन बिहार को स्पेशल स्टेटस
यह भी दिलचस्प है कि बिहार में गठबंधन पार्टनर बीजेपी जदयू की मतभिन्नता मुखर हुई है। असहमति हाल ही में अग्निपथ योजना को लेकर भी सामने आई, जब जदयू नेताओं ने विरोध किया लेकिन भाजपा ने अग्निपथ योजना का बचाव जारी रखा। इसके अलावा पीएम मोदी के बिहार दौरे से पहले जद (यू) बिहार को विशेष दर्जे की मांग फिर से उठा रहा है। जद (यू) संसदीय बोर्ड के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को एक लंबी फेसबुक पोस्ट में मोदी को वैचारिक मतभेदों के बावजूद भाजपा के साथ उनकी पार्टी के पुराने संबंधों की याद दिलाते हुए बिहार को स्पेशल स्टेटस की मांग उठाई।

उम्मीदें चंद घंटों में धराशायी ?
बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा 2014 से 2018 तक नरेंद्र मोदी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में काम कर चुके हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक भले ही कुशवाहा ने फेसबुक पोस्ट में बिहार को स्पेशल स्टेटस की जिक्र किया, लेकिन कुछ ही घंटों के बाद सोमवार शाम ही उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि प्रधानमंत्री मंगलवार को अपनी यात्रा के दौरान बिहार को स्पेशल स्टेटस का ऐलान करेंगे, उन्हें इसकी उम्मीद नहीं है।

पटना में मोदी : 20 महीने बाद
प्रधानमंत्री मोदी जब मंगलवार शाम पटना पहुंचेंगे तो अक्टूबर-नवंबर, 2020 के बाद उनकी पहली यात्रा होगी। 20 महीने पहले पीएम मोदी बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एनडीए के इलेक्शन कैंपेन में बिहार आए थे। पीएम के मंत्रिमंडल में पुराने सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जदयू विशेष दर्जे की मांग लंबे समय से करती आर ही है। क्या पीएम के दौरे से ठीक पहले स्पेशल स्टेटस की मांग भाजपा को शर्मसार या असहज करने के लिए है ? कुशवाहा ने इस सवाल को टाल दिया।

जदयू भाजपा से मुकाबले की तैयारी में ?
सियासी घटनाओं में ये भी अहम है कि कुशवाहा ने 2013 में नीतीश कुमार से नाता तोड़ लिया था। उन्होंने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) बनाई थी। हालांकि , पिछले साल उपेंद्र कुशवाहा ने RLSP का जद (यू) के साथ विलय कर दिया था। सियासी पंडितों ने कुशवाहा के फैसले को भाजपा के मुख्यमंत्री कैंडिडेट का मुकाबला और ओबीसी जनाधार को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा था।

बिहार को स्पेशल स्टेटस पर 'दो फाड़'
बता दें कि जद (यू) में शामिल होने के बाद से पूर्व केंद्रीय मंत्री कुशवाहा राष्ट्रीय तिरंगे और सम्राट अशोक के कथित अपमान जैसे मुद्दों पर भाजपा पर तंज कसते दिखे हैं। बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग के संदर्भ में देखें तो भाजपा और जदयू के बीच कई बार जुबानी जंग देखी गई है। बीजेपी का दावा है कि केंद्र पहले से ही बिहार को देय राशि से अधिक दे रहा है। दूसरी ओर जेडी (यू) इस बात पर जोर देती है कि बिहार को केंद्र सरकार से और अधिक सहायता की जरूरत है।












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