PM Modi Speech: संसद में पीएम मोदी ने 121 बार कहा ‘वंदे मातरम्’, कांग्रेस-नेहरू पर प्रहार! क्या है इसका संदेश?
PM Modi Vande Mataram Speech: वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में सोमवार, 8 दिसंबर को 10 घंटे लंबी विशेष बहस आयोजित हुई। यह सत्र न सिर्फ ऐतिहासिक रहा बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद गर्म।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब 1 घंटे तक बोले और अपने पूरे भाषण में 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय चेतना की धड़कन बताते हुए 121 बार इसका उच्चारण किया। इसके साथ ही PM मोदी ने कई बार कांग्रेस और नेहरू पर परोक्ष-प्रत्यक्ष निशाना साधा, जिससे पूरे सदन में राजनीतिक तापमान बढ़ गया।

PM मोदी का जोर-'वंदे मातरम्' राष्ट्र की आत्मा का स्वर
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा और ऊर्जा का स्रोत रहा है। उन्होंने इसे 'ऊर्जा का मंत्र' बताते हुए अपने भाषण में 121 बार दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तर्कों को और मजबूत करने के लिए भाषण में कई शब्दों का बार-बार उल्लेख किया-देश का 50 बार, भारत का 35 बार, अंग्रेज का 34 बार, बंगाल का 17 बार और कांग्रेस का 13 बार।
उनके भाषण के ये दोहराव इस बात का संकेत थे कि वे वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व को जोरदार रूप से सामने रखना चाहते थे राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आंकड़े भाषण की रणनीति का हिस्सा थे-जहां एक ओर राष्ट्रीय भावनाओं को जगाया गया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष पर वैचारिक हमला भी साधा गया।
नेहरू, कांग्रेस और इतिहास पर मोदी का संदर्भ
वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा पर बोलते-बोलते PM मोदी कई बार विपक्ष की नीतियों की तरफ इशारा करते दिखे। उन्होंने नेहरू का नाम 7 बार, कांग्रेस का 13 बार और तुष्टिकरण शब्द का 3 बार उपयोग किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ पार्टियों ने आज़ादी के बाद भी वंदे मातरम् और उससे जुड़ी विरासत को वह सम्मान नहीं दिया जिसकी वह हकदार थी। इसे विपक्ष ने 'इतिहास का चयनात्मक उपयोग' बताया।
ऐतिहासिक चरित्रों पर भी जोर
PM मोदी ने भाषण में वंदे मातरम् की रचना करने वाले बंकिम चंद्र चटर्जी का 10 बार उल्लेख कर बंगाल की सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने इसके अलावा महात्मा गांधी - 6 बार, मुस्लिम लीग - 5 बार, जिन्ना - 3 बार, संविधान - 3 बार और मुसलमान - 2 बार का भी उल्लेख किया, जो भाषण के राजनीतिक संदेश को और स्पष्ट करता है-आज की राजनीति में राष्ट्रवाद का महत्व और विभाजनकालीन राजनीति को याद दिलाना।
कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ दल वोट बैंक की राजनीति में फंसकर वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने में पिछड़ जाते हैं। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि राष्ट्रीय भावनाओं पर राजनीति करने वालों को इतिहास की सच्चाई जाननी चाहिए। वहीं कांग्रेस ने पीएम मोदी के बयान को 'राजनीतिक रंग' देने का आरोप लगाया और कहा कि वंदे मातरम् सबका है, किसी दल की संपत्ति नहीं। इस दौरान सदन में प्रियंका गांधी का भाषण भी दमदार रहा। 10 घंटे चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं, लेकिन बहस का केंद्र बार-बार वंदे मातरम् ही रहा।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो भाजपा 2026-27 के चुनावी माहौल में राष्ट्रवाद के मुद्दे को और मजबूत करना चाहती है खासतौर पर बंगाल चुनाव में जो ममता का अभेद किला माना जाता है। इस मुद्दे के सहारे भाजपा पूर्वोत्तर और युवा वोटरों के बीच इसका प्रभाव टार्गेट किया गया। कांग्रेस को 'राष्ट्रवादी विमर्श' में रक्षात्मक स्थिति में लाने की रणनीति दिखी। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का यह सत्र भारतीय संसदीय इतिहास में याद रखा जाएगा एक तरफ राष्ट्रगीत की भावनात्मक और ऐतिहासिक व्याख्या, और दूसरी तरफ उसकी आड़ में हुई गहरी राजनीतिक लड़ाई।












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