जानिए क्या था Y2K संकट और क्यों पीएम मोदी ने किया इसका जिक्र अपनी स्पीच में
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को करोनो वायरस के मुद्दे पर एक बार फिर से देश को संबोधित किया था। देश में लॉकडाउन के बीच ही यह पीएम मोदी का छठा संबोधन था जिसमें उन्होंने 20 लाख करोड़ के विशालतम आर्थिक पैकेज का भी ऐलान किया। वहीं पीएम मोदी जब राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने Y2K का भी जिक्र किया। जनता को आत्मनिर्भर बनने की बात के बीच ही जब Y2K का जिक्र आया तो हर कोई पहले तो चौंक गया क्योंकि यह एक ऐसी समस्या थी जिसने मिलेनियम के पहले दिन को हर किसी के लिए घबराहट के साथ ही परेशानी और चिंता से भर दिया था। जानिए क्या था Y2K।

कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग से जुड़ा मसला
Y2K दरअसल कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग में आया एक बग था और इसके बारे में 1990 के दशक के अंत में यानी साल 1999 में पता लगा था। कहा गया था कि 31 दिसंबर 1999 के बाद की तारीख के बाद कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग को कई समस्याओं से जूझना पड़गा और यहां तक कि कई जगहों पर कंप्यूटर्स भी काम करना बंद कर देंगे। कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग को 1960 से लेकर 1980 तक के लिए ही तैयार किया गया था। ऐसे में कंप्यूटर इंजीनियर्स ने साल के आखिरी की दो ही संख्याओं का प्रयोग उसमें किया था।

साल 2000 में बंद हो जाते कंप्यूटर!
यानी की अगर 19 के बाद सिर्फ 99 तक का ही प्रयोग हुआ। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि कंप्यूटर में डाटा को स्टोर करना उस समय काफी महंगी प्रक्रिया होता था। इसके अलावा काफी बड़ी जगह का प्रयोग करना पड़ता था। जैसे ही नई सदी आने को हुई प्रोग्रामर्स परेशान हो गए थे। उन्हें डर था कि कंप्यूटर्स 00 या साल 2000 को इंटरप्रेट नहीं कर पाएंगे और वह साल 2000 को भी 1900 ही समझ जाएगा। इसके बाद बड़े स्तर पर प्रोग्रामिंग को दोबारा से किया गया ताकि कंप्यूटर्स एक जनवरी 1900 की जगह एक जनवरी 2000 को इंटरप्रेट कर सकें।

बाद में साबित हुई बस एक अफवाह
Y2K समस्या को 'मिलेनियम बग' भी कहा गया था। सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर बनाने वाली दोनों ही कंपनियों ने फैसला किया था कि वह इस समस्या का समाधान निकालेंगे। इसके बाद उनकी तरफ से Y2K अनुकूलन प्रोग्रामिंग की पेशकश की गई थी। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के अलावा कई और देशों की तरफ से बग को दूर करने के लिए भारी मात्रा में निवेश भी किया गया था। हालांकि नतीजों की कमी के चलते बाद में Y2K बग को बस एक अफवाह मात्र ही घोषित किया गया।

भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की कुशलता आई सामने
भले ही Y2K आखिर में एक अफवाह साबित हुआ मगर 20वीं सदी से 21वीं सदी में जब देश प्रवेश कर रहा था तो उस समय इस समस्या ने भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की दक्षता को भी सामने रखा था। कहा जाता है कि यह समस्या केवल तब तक एक समस्या थी जब तक कि भारतीय कंप्यूटर इंजीनियर्स ने ऐसे कंप्यूटर्स को 21वीं सदी की प्रोग्रामिंग के लायक बनाकर नहीं छोड़ दिया।












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