आखिर किस बात से विपक्ष को लगी मिर्ची और किया वॉकआउट, फिर पीएम ने खोल दिया कांग्रेस का काला चिट्ठा
PM Modi speech in Rajya Sabha: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के बाद इसपर जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। जिस तरह से कांग्रेस लगातार सरकार को संविधान को लेकर घेर रही है, उसपर पीएम मोदी ने जमकर कांग्रेस को घेरा। पीएम मोदी ने आपातकाल के अध्याय को सदन में खोलकर रख दिया।
पीएम ने कहा कि मैंने कई वरिष्ठ नेताओं की पिछले दो दिनों में बातें सुनी तो मुझे ही नहीं पूरे देश को निराशा हुई। यहां कहा गया कि यह देश के इतिहास का पहला चुनाव था जिसका मुद्दा संविधान की रक्षा था। क्या आप भूल गए 1977 का चुनाव, अखबार बंद था, रेडियो बंद था, बोलना बंद था।

एक ही मुद्दे पर लोगों ने वोट किया था, लोकतंत्र की स्थापना के लिए। भारत के लोगों की रगों में लोकतंत्र किस प्रकार जीवित है, वह 1977 के चुनाव में दिखा था। मैं मानता हूं कि संविधान की रक्षा का वह सबसे बड़ा चुनाव था।
लोगों ने हमपर भरोसा जताया
इस बार अगर संविधान की रक्षा का चुनाव था तो देशवासियों ने संविधान की रक्षा के लिए हमें पाया है। देशवासियों ने कहा कि संविधान की कोई रक्षा कर सकता है तो यही लोग कर सकते हैं।
आपातकाल में संविधान पर चला बुल्डोजर
जब खड़गे जी ऐसी बातें बोलते हैं तो पीड़ादायक लगता है। इमरजेंसी के दौरान संविधान पर जो बुल्डोजर चलाया गया, लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा दी गई तो उसी दल के नेता के रूप में वह उसके साक्षी हैं, फिर भी सदन को गुमराह कर रहे हैं।
आखिर किसने 7 साल तक सत्ता सुख भोगा?
आपातकाल को मैंने बहुत निकट से देखा है, करोड़ों लोगों का जीना मुश्किल कर दिया गया था। संसद में जो होता था वो तो रिकॉर्ड पर है। भारत के संविधान की बात करने वालों से पूछता हूं कि जब आपने लोकसभा को 7 साल तक चलाया, वो कौन सा संविधान था जिसका इस्तेमाल करके आपने सात साल तक सत्ता की मौज ली, आप हमें संविधान सिखाते हो।
दर्जनों संविधान संशोधन किसने किए
दर्जनों आर्टिकल जिसमे 38, 39, 42वां संशोधन क्या था, जिसे मिनी संविधान संशोधन कहा जाता है। आपातकाल में पिछली सरकार में 10 साल खड़गे जी कैबिनेट में थे। प्रधानमंत्री का पद संवैधानिक पद था, पीएम पर एनएसी बैठ जाना कौन से संविधान का हिस्सा था। आखिर कौन सा संविधान आपको इसकी अनुमति देता है।
किस हैसियत से कैबिनेट का फैसला फाड़ा गया
जरा ये लोग बताएं वो कौन सा संविधान है जो एक सांसद को कैबिनेट के निर्णय को सार्वजनिक रूप से फाड़ देने का हक देता है। किस हैसियत से फाड़ा गया। हमारे देश में लिखित रूप से प्रोटोकॉल की व्यवस्था है। कोई बताए संविधान की मर्यादाओं को तार-तार करके एक परिवार को कैसे प्राथमिकता दी जाती थी।
संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को बाद में जबकि एक परिवार को पहले, आखिर कौन सी संविधान की मर्यादा थी। ये लोग इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा के नारे लगाने वाले लोग हैं, आज संविधान की जय के नारे लगाते हैं। इस देश में कांग्रेस संविधान की सबसे बड़ी विरोधी है।
आखिर आपातकाल पुरानी बात कैसे
इस पूरी चर्चा के दौरान उनको 200-500 सालों का बात करने का हक है, लेकिन आपात की बात आपके लिए पुरानी है। इस हाउस में कोशिश की गई कि संविधान की बात करेंगे, लेकिन आपात की कभी बात नहीं करेंगे।
इनके साथ जो लोग बैठे हैं, उसमे भी बहुत लोग हैं जो आपातकाल के भुक्तभोगी हैं, लेकिन उनकी कोई मजबूरी होगी कि उनके साथ बैठने का फैसला लिया है। संविधान के प्रति अगर समर्पण भाव होता तो ऐसा नहीं करते।
आपातकाल सिर्फ राजनीतिक संकट नहीं था बल्कि बहुत बड़ा मानवीय संकट था। अनेक लोगों को जेल में डाला गया। जय प्रकाश नारायण की स्थिति इतनी खराब हुई कि वह जेल से बाहर आकर कभी ठीक नहीं हो सके।
लोग कभी घर नहीं लौटे
वो दिन ऐसे भी थे कि जो लोग घर से निकले और कभी लौटकर नहीं आए। तुर्कमान गेट पर आपातकाल में क्या हुआ था किसी की चर्चा करने की हिम्मत है क्या। जो कांग्रेस को क्लीनचिट दे रहे हैं, यह शर्मनाक है। ऐसी तानाशाही को सही कहने वाले लोग हाथ में संविधान की प्रति लेकर अपने काले कारनामों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
आपातकाल से निकले दल कांग्रेस के साथ
इस समय कई छोटे-छोटे दल थे, जो आपात के खिलाफ मैदान में उतरे थे। आज वो कांग्रेस का सहयोग कर रहे हैं। मैंने कहा था कि कांग्रेस का अब परजीवी युग शुरू हुआ है।
यह परजीवी कांग्रेस है, जहां वो खुद अकेले लड़े वहां उनका स्ट्राइक रेट शर्मनाक है, जहां दूसरे के साथ लड़े, वहीं बेहतर किया। किसी और के कारण सहयोगी दलों का वोट खाकर ये आए हैं।












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