रेल का खाना इंसानों के लायक नहीं, यह बासी और एक्सपायरी डेट का- CAG
भारतीय रेल को विश्वस्तरीय बनाने के पीएम मोदी के दावे की हवा निकली, सीएजी की रिपोर्ट में घटिया खाने का मामला आया सामने
नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा भारतीय रेल को विश्वस्तरीय बनाने के वादे की हवा निकल गई है। कैग रिपोर्ट की मानें तो रेलवे में मिलने वाला खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। भारतीय रेलवे की कैटरिंग सर्विस पर सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट आज संसद में रखी जानी है। इसमें बताया गया है कि रेलवे में मिलने वाला खाना लोगों के खाने लायक नहीं है। ऑडिट रिपोर्ट में रेलवे की बार-बार बदलती कैटरिंग पॉलिसी को दोष दिया गया है।

बासी खाना परोसा जाता है
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेनों और स्टेशनों पर परोसी जा रही चीजें प्रदूषित हैं। पैक्ड वस्तुओं को उनके एक्सपाइरी डेट के गुजर जाने के बावजूद भी बेचा जा रहा है। इसके अलावा, अनाधिकृत ब्रैंड की पानी की बोतलें बेची जा रही हैं। जांच में यह भी पाया गया कि रेलवे परिसरों और ट्रेनों में साफ-सफाई का बिलकुल ध्यान नहीं रखा जा रहा। इसके अलावा, ट्रेन में बिक रहीं चीजों का बिल न दिए जाने और फूड क्वॉलिटी में कई तरह की खामियों की भी शिकायतें हैं।

मनमर्जी कीमत पर बिक रहा सामान
सीएजी के निरीक्षण के दौरान किसी भी ट्रेन में वेटरों और कैटरिंग मैनेजरों के पास बेचे जाने वाले प्रोडक्ट्स का मेन्यू और रेट कार्ड नहीं मिला। रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि रेलवे स्टेशनों और रेलगाड़ी के अंदर बाहरी मार्केट की तुलना में मनमर्ज़ी कीमतों पर चीजें बेची जा रही हैं।

10 गुना अधिक दाम पर बिक रहा सामान
कुछ दिनों पहले रेलवे कैटरिंग में आरटीआई के हवाले से भारी भ्रष्टाचार का मामला भी सामने आया था। आरटीआई एक्टिविस्ट अजय बोस को रेल विभाग द्वारा दिए गए आरटीआई जवाब से पता चला था कि रेलवे के कैटरिंग विभाग ने वस्तुओं को उनके बाज़ार भाव के 10 गुने तक के दामों में खरीदा था।
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मनमानी चल रही है रेलवे में
बोस ने बताया कि 25 रूपये में बाज़ार में मिलने वाली 100 ग्राम दही को 972 रूपये में और एक लीटर रिफाइंड तेल को 1241 रूपये में खरीदा गया। 15 रूपये में बिकने वाली पानी की बोतल को खरीदने के लिए 59 रूपये दिए गए। उन्होंने कहा कि रेलवे हर साल घाटा झेलता है जिसका एक कारण यह भी है।












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