Subhash Chandra Bose Birth Anniversary: नेताजी को राष्ट्रपति-पीएम ने किया याद, बताया- देश का महानायक

नई दिल्ली। आज नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती है, उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दोनों ने नमन किया है। पीएम मोदी ने Twitter पर लिखा है कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर मैं उन्हें सलाम करता हूं, उनके साहस ने भारत को उपनिवेशवाद से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नेताजी महान बुद्धिजीवी थे जिन्होंने हमेशा समाज के वंचित तबके के हितों और कल्याण के बारे में सोचा है। पीएम मोदी ने अपने ट्वीट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें नेताजी को याद किया गया है।

मैं देश की इस महान विभूति को दिल से नमन करता हूं-पीएम

मैं देश की इस महान विभूति को दिल से नमन करता हूं-पीएम

अपने Tweet में पीएम ने कहा कि गौरव की बात है कि हमारी सरकार को नेताजी बोस से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने का और दशकों से लंबित लोकप्रिय मांग पूरा करने का अवसर मिला। मैं देश की इस महान विभूति को दिल से नमन करता हूं।

राष्ट्रपति कोविंद ने किया याद

राष्ट्रपति कोविंद ने किया याद

तो वहीं राष्ट्रपति कोविंद ने भी नेताजी को याद करते हुए नमन किया है। उन्होंने भी Twitter पर लिखा है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयन्ती पर उन्हें मेरा नमन। वे हमारे सबसे लोकप्रिय राष्ट्रनायकों और स्वतंत्रता संग्राम के महानतम सेनानियों में से हैं।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म

आपको बता दें कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे।इन्होंने कलकत्ता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से उन्होंने दर्शनशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की थी।

प्रशासनिक सेवा की तैयारी

प्रशासनिक सेवा की तैयारी

साल 1919 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिए इंग्लैंड पढ़ने गए। इन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए 1920 में आवेदन किया और इस परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया। लेकिन भारत मां के इस दुलारे बेटे ने जब जलियावाला बाग वाला नरसंहार देखा तो इनका मन व्यथित हो गया और इन्होंने 1921 में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया।

'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा'

'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा'

उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के सहयोग से आजाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया 'जय हिन्द' और 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का नारे ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए लड़ने वालों में जोश भर दिया था।

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