शिक्षा के बजट पर पीएम मोदी ने की चर्चा, कहा- डिजिटल यूनिवर्सिटी से दूर होगी सीटों की कमी की समस्या

नई दिल्ली, 21 फरवरी: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में बजट पेश किया था। इस बार सरकार का फोकस शिक्षा पर ज्यादा था, क्योंकि पिछले साल ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हुई थी। इसको लेकर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा की। जिसमें शिक्षा मंत्री समेत शिक्षा जगत से जुड़े कई एक्सपर्ट्स शामिल थे।

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पीएम मोदी ने कहा कि इस साल का बजट राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में मदद करेगा। राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय एक अभूतपूर्व कदम है। इससे सीटों की कमी की समस्या का समाधान किया जा सकता है। इसमें असीमित सीटें होंगी। मैं सभी हितधारकों से ये सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं कि डिजिटल यूनिवर्सिटी को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि हमारी युवा पीढ़ी देश के भावी नेता हैं। तो आज की युवा पीढ़ी को सशक्त बनाने का अर्थ है, भारत के भविष्य को सशक्त बनाना।

पीएम ने कहा कि केंद्रीय बजट 2022 में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी 5 चीजों पर काफी जोर दिया गया है। पहली है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सार्वभौमिकरण, दूसरा है-कौशल विकास, तीसरा है-शहरी नियोजन और डिजाइन। इसके बाद चौथा-अंतर्राष्ट्रीयकरण और पांचवां है एवीजीसी- एनिमेशन विजुअल इफेक्ट्स गेमिंग कॉमिक।

प्रधानमंत्री के मुताबिक डिजिटल कनेक्टिविटी ही वो चीज है, जिसने महामारी के मुश्किल हालात में हमारी शिक्षा व्यवस्था को बचाए रखा। हम देख रहे हैं कि कैसे भारत में तेजी से डिजिटल डिवाइड कम हो रहा है। नवीनीकरण हमारे यहां समावेश सुनिश्चित कर रहा है। ई-विद्या हो, वन क्लास वन चैनल हो, डिजिटल लैब्स हों, डिजिटल यूनिवर्सिटी हो, ऐसा एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर युवाओं को बहुत मदद करने वाला है। ये भारत के सामाजिक-आर्थिक सेटअप में गांव हों, गरीब हों, दलित, पिछड़े, आदिवासी, सभी को शिक्षा के बेहतर समाधान देने का प्रयास है।

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