वर्ल्ड डेयरी समिट में PM मोदी ने किया 'बन्नी भैंस' का जिक्र, जानिए क्या है इसकी खासियत

नई दिल्ली, 12 सितंबर। भारत में वर्ल्ड डेयरी समिट का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ग्रेटर नोएडा में इंडिया एक्सपो सेंटर और मार्ट में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन वर्ल्ड डेयरी समिट (IDF WDS) 2022 का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया। वहीं, कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने एक ऐसी भैंस का जिक्र विदेशी मेहमानों के साथ किया, जिसकी चर्चा अब चारो तरफ हो रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस भैंस की खासियत क्या है?

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गुजरात में पाई जाती है यह भैंस

गुजरात में पाई जाती है यह भैंस

वर्ल्ड डेयरी समिट (IDF WDS) उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस भैंस का जिक्र किया, वह भैंस गुजरात के कच्छ में पाई जाती है। इस खास प्रजाती की नस्ल को बन्नी भैंस के नाम से जानते हैं। यह भैंस अब कच्छ के वातावरण में घुल-मिल चुकी है। इस भैंस को बिपरीत वातावरण में गुजारा करने के लिए जाना जाता है।

रात में चरने के लिए जाती हैं ये भैंस

रात में चरने के लिए जाती हैं ये भैंस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक कच्‍छ के इलाकों में दिन के समय भीषण धूप होती है। ऐसे में ये भैंसे दिन में किसी ऐसे जगह बैठी रहती हैं, जहां पर थोड़ा छाव होता है। वहीं, जब रात होती है तो ये चरने के लिए निकल जाती हैं। सबसे बड़ी बात जिस वक्त ये भैस चरने जाती है, उस वक्त पशुपालन भी साथ नहीं होते हैं। रात में चरने के बाद ये फिर से गांवों के पास बने तबेलों में खुद ही आ जाती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ये भैंस कम पानी पीकर भी रह लेती हैं।

एक से 3 लाख रुपए तक होती है कीमत

एक से 3 लाख रुपए तक होती है कीमत

बन्नी ग्रास लैंड जानवरों के चारे के लिए दुनियाभर में मशहूर है। अच्छी नस्ल के चलते इस बन्नी भैंस को दुनियाभर के दुग्ध उत्पादक खरीदना चाहते हैं। हालांकि, बन्नी भैंस बहुत महंगी मिलती है। एक बन्नी भैंस की कीमत 1 लाख रुपए से 3 लाख रुपए हो सकती है। बन्नी भैंस गर्मी और सर्दी दोनों बर्दाश्त कर लेती है। इसके अलावा सामान्य नस्ल की भैंस की अपेक्षाकृत ये ज्यादा दूध भी देती है।

15 किलोमीटर दूर तक चली जाती हैं चरने

15 किलोमीटर दूर तक चली जाती हैं चरने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक बन्‍नी भैंस रात में 10 से 15 किलोमीटर दूर चारे की तलाश में जाती है। वहीं, घास चरने के बाद यह भैंस अपने घर तक वापस लौट आती है। बन्नी भैंस अपने घर का रास्ता भी नहीं भूलता हैं। इनके खोने या फिर रास्ता भटकने की खबरें कभी-काल ही आती है। बन्नी भैंस भारत की स्वदेशी पशुधन है। यही वजह है कि इन्हें देश के अन्य हिस्सों के लोभ खरीदते हैं।

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