PM मोदी को झालमुड़ी खिलाने वाले दुकानदार के पहचान पर सस्पेंस, एक इंटरव्यू में दीपक,दूसरे में विक्रम! सच क्या?
PM Modi Jhalmuri Vendor Fakes Identity: पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक छोटी सी मुलाकात अब बड़ा सवाल बन गई है। सड़क किनारे झालमुड़ी बेचने वाले एक साधारण वेंडर से बातचीत का वीडियो वायरल हुआ, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने लोगों को उलझन में डाल दिया। एक ही शख्स ने अलग-अलग इंटरव्यू में अपने दो नाम बताए, जिससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि आखिर सच क्या है।
जिस दुकानदार ने पीएम मोदी को चटपटी झालमुड़ी खिलाई, उसने अलग-अलग मीडिया इंटरव्यू में दो अलग नाम 'दीपक' और 'विक्रम' बताए हैं। आखिर ऐसा क्यों हुआ और सच क्या है।

जब पीएम ने कहा- "भाई, हमें अपनी झालमुड़ी खिलाओ"
लोकसभा चुनाव के व्यस्त कार्यक्रम के बीच 19 अप्रैल 2026 की शाम पीएम मोदी ने झारग्राम में रैलियों के बीच एक छोटा सा ब्रेक लिया। उन्होंने सड़क किनारे एक साधारण सी दुकान पर अपनी गाड़ी रुकवाई और दुकानदार से बड़े ही दोस्ताना अंदाज में कहा, "भाई हमें अपनी झालमुड़ी खिलाओ।" पीएम मोदी ने उससे पूछा कि सबसे अच्छी वाली झालमुड़ी कितने की आती है, तो दुकानदार ने सादगी से जवाब दिया कि 10 या 20 रुपये की।
इस दौरान एक मजेदार वाकया भी हुआ। जब दुकानदार ने पूछा कि क्या आप प्याज खाते हैं? तो पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा, "हां, प्याज खाते हैं, बस दिमाग नहीं खाते।" करीब 10 मिनट की इस बातचीत में पीएम ने वेंडर से उसका नाम, पढ़ाई और परिवार के बारे में भी पूछा। जाते-जाते उन्होंने पैसे देने की जिद भी की, जिसे वेंडर ने पहले मना किया, लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया।
इस मुलाकात के बाद वह साधारण सा दुकानदार अचानक चर्चा में आ गया। लोगों की भीड़ उमड़ने लगी, देर रात तक लाइनें लगने लगीं औक दूर-दूर से लोग सिर्फ झालमुड़ी चखने पहुंच रहे हैं।
अलग-अलग इंटरव्यू, दो नाम... यहीं से शुरू हुआ विवाद
हैरानी की बात तब शुरू हुई जब यह दुकानदार मीडिया के कैमरों के सामने आया। रातों-रात मशहूर हुए इस शख्स ने अलग-अलग न्यूज चैनलों को इंटरव्यू दिए, लेकिन यहां एक बड़ा 'ट्विस्ट' आ गया। एक इंटरव्यू में उसने खुद को दीपक कुमार बताया और दूसरे इंटरव्यू में वही शख्स विक्रम शॉ के नाम से सामने आया।
पहला इंटरव्यू (ANI): न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इस शख्स ने अपना नाम 'दीपक कुमार' बताया। उसने बताया कि वह बिहार के गया का रहने वाला है और झारग्राम में अपनी दुकान चलाता है। उसने कहा, ''पीएम मोदी ने खाने के बाद कहा कि उन्हें यह बहुत पसंद आई। उन्होंने मेरा नाम पूछा और यह भी पूछा कि मैंने कितनी पढ़ाई की है... वे 10 मिनट तक रुके और उनके साथ बच्चे भी थे... मुझे नहीं पता था कि वे आएंगे।"
दूसरा इंटरव्यू (ABP News): वहीं दूसरी ओर एबीपी न्यूज के साथ बातचीत में इसी दुकानदार का नाम 'विक्रम शॉ' बताया गया।
दोनों इंटरव्यू में घटना की सारी जानकारी एक जैसी थी-जैसे कि उसने कक्षा 9 तक पढ़ाई की है। उसको आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़नी पड़ी, वह बिहार के गया का रहने वाला है और परिवार का खर्च चलाने के लिए यह काम करता है। वह रोजाना 1000 से 1200 रुपये कमा लेता है और पीएम मोदी ने उसे पैसे लेने के लिए मजबूर किया। लेकिन इन अलग-अलग नामों ने लोगों के शक पैदा कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दो नाम क्यों सामने आए।
सच क्या है?
भाजपा ने अपने अधिकारिक एक्स हैंडल पर 20 अप्रैल को दुकानदार का वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने उनका नाम 'विक्रम' बताया है। ऐसे में ऐसा हो सकता है कि उसका असली नाम 'विक्रम' ही हो। देखिए, दुकानदार मूल रूप से बिहार का है और बंगाल में काम कर रहा है। कई बार ऐसा होता है कि अचानक मिली पब्लिसिटी से घबराकर भी शख्स ने अलग नाम बता दिया हो।
भाजपा ने एक्स पर लिखा,
''सादगी और अपनेपन का संगम! जब देश के प्रधान सेवक एक आम नागरिक की दुकान पर पहुंचकर उसके हाथ की 'झाल मुड़ी' का स्वाद लेते हैं, तो वह पल केवल एक मुलाकात नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के विश्वास और अपनत्व की कहानी बन जाता है। पश्चिम बंगाल के झारग्राम के विक्रम ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके छोटे से काम को इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी जी का उनकी दुकान पर आना और उनके परिवार व पढ़ाई के बारे में पूछना, हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो ईमानदारी से अपना गुज़ारा कर रहा है।
क्या है झालमुड़ी और बंगाल से इसका नाता?
झालमुड़ी सिर्फ एक स्नैक नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति का हिस्सा है। झाल' का अर्थ है तीखा और 'मुड़ी' का अर्थ है मुरमुरा (Puffed Rice)। माना जाता है कि इसकी शुरुआत ब्रिटिश काल के दौरान कोलकाता में हुई थी। 19वीं सदी के आखिर से लेकर 20वीं सदी की शुरुआत के बीच कोलकाता में सामने आया था।
इसमें मुरमुरे के साथ भुनी हुई मूंगफली, कटा हुआ प्याज, टमाटर, खीरा, उबले आलू और खास मसाला मिलाया जाता है। इसका असली जादू 'कच्चे सरसों के तेल' में होता है, जो इसे एक तीखा और अलग स्वाद देता है।














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