Sushila Karki: नेपाल को मिली पहली 'लेडी बॉस', PM मोदी ने बधाई संदेश में क्या-क्या कहा? अब खत्म होगा बवाल?
नेपाल में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, देश को नई अंतरिम सरकार मिल गई है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। उनके शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है
भारत भी नेपाल के भविष्य को लेकर चिंतित है, और यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत उन्हें बधाई दी है। यह खबर सिर्फ दो देशों के बीच की बातचीत नहीं है, बल्कि एक ऐसे संकट से जुड़ी है जिसने 50 से अधिक युवाओं की जान ले ली और पूरे देश को हिलाकर रख दिया। आइए, समझते हैं कि नेपाल में आखिर चल क्या रहा है और भारत की इसमें क्या भूमिका है।

भारत का रुख: शांति और स्थिरता पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल की अंतरिम सरकार की नई प्रमुख सुशीला कार्की को शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत नेपाल के लोगों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, 'भारत नेपाल के लोगों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।'
- कूटनीतिक प्रतिक्रिया: इससे पहले, भारत सरकार ने नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन का स्वागत किया था। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत एक करीबी पड़ोसी, साथी लोकतंत्र और दीर्घकालिक विकास भागीदार के रूप में नेपाल के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।
- पीएम मोदी की चिंता: पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के शासनकाल में हुई हिंसा पर प्रधानमंत्री मोदी ने दुख व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि नेपाल में हुई हिंसा दिल दहला देने वाली है और कई युवाओं की मौत से वह व्यथित हैं। उन्होंने नेपाल की स्थिरता, शांति और समृद्धि को भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया था।
कौन हैं सुशीला कार्की और क्यों बदला नेपाल का नेतृत्व?
सुशीला कार्की अब नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। उन्हें एक भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। उन्हें छात्र समूहों के विरोध प्रदर्शनों के बाद चुना गया, जिसके कारण पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था।
'जेन Z' का विरोध
यह संकट सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के विरोध में शुरू हुआ था, जो बाद में ओली सरकार के भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ एक बड़े विरोध में बदल गया। पुलिस की कार्रवाई में 20 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर छात्र थे।
ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसा जारी रही। काठमांडू और कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने संसद और राजनीतिक नेताओं के घरों जैसी सरकारी इमारतों में आग लगा दी थी। सेना द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने से पहले 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी थी। आज यानि 13 सितंबर को नेपाल में एक नई सुबह का उदय हुआ है, अब देखना दिलचस्प होगा कि नई प्रधानमंत्री देश की जनता को किस तरह साथ लेकर आगे बढ़ती हैं।












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