लोकसभा चुनाव 2019: छठे चरण में पीएम मोदी और बीजेपी के सामने 2014 का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के अंतिम दो चरणों में 118 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। अब तक लोकसभा के पांच चरणों का मतदान हो चुका है। लोकसभा चुनाव के लिए छठे चरण में 12 मई को 59 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी। बीजेपी ने साल 2014 में इनमें से 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि दो सीटें उसके सहयोगियों को मिली थी। अगले चरण में उत्तर प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होनी है। बीजेपी ने 2014 में इनमें से 12 सीटें जीती थीं जबकि उसके सहयोगी दल अपना दल और समाजवादी पार्टी एक-एक सीट मिली थी।

यूपी में इस बार अलग हैं समीकरण

यूपी में इस बार अलग हैं समीकरण

पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में 325 सीटें जीती थी। बीजेपी की बहुमत वाली सरकार तब से यहां सत्ता में है। सूबे में लोकसभा चुनाव 2014 और फिर विधानसभा चुनाव में बीजेपी के उभार के बाद विपक्षी ताकतों में एकता बनी है। यूपी की राजनीति के कट्टर प्रतिद्वंद्वी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने पहले हाथ मिलाया और इसके बाद अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल के साथ राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सूबे में महागठबधंन किया। 2 साल पहले विधानसभा चुनाव के बाद हुए लोकसभा उपचुनाव में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने बीजेपी को शिकस्त दी थी। पीएम मोदी ने देश के अन्य राज्यों के साथ यूपी में बीजेपी के चुनाव प्रचार का नेतृत्व किया। लेकिन पार्टी को अभी भी 2014 के प्रदर्शन को दोहराने के कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पिछले सप्ताह कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य बीजेपी के वोट शेयर में कटौती करना है।

हरियाणा में कठिन है बीजेपी की राह

हरियाणा में कठिन है बीजेपी की राह

हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर 12 मई को वोटिंग होगी। बीजेपी ने 2014 में यहां सात सीटें जीती थीं। इंडियन नेशनल लोकदल को दो सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिली थी। बीजेपी को जींद में विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद हरियाणा में अच्छे प्रदर्शन का भरोसा है, जहां कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला मैदान में थे। लेकिन पार्टी ने तब इनेलो विधायक हरि चंद मेधा के पुत्र कृष्ण मिड्ढा को उतारा था, जिनकी मृत्यु के बाद जींद में उपचुनाव हुआ था। हरियाणा में बीजेपी को दोहरी एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ रहा है, जहां मनोहर लाल खट्टर सरकार इस साल के अंत में अपना कार्यकाल पूरा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ हरियाणा में चुनाव में जाट आरक्षण मुख्य मुद्दा बना हुआ है। यहां चुनावों में जातिगत समीकरण निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। जाट नेताओं ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि नौकरियों में जाटों को 10 प्रतिशत कोटा का बचाव सुप्रीम कोर्ट में पर्याप्त रूप से नहीं किया। जाट बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस और इनेलो के पक्ष में हैं। गैर जाट ओबीसी विशेषकर सैनी इनके पक्ष में है।

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बिहार में महागठबंधन से बीजेपी की टक्कर

बिहार में महागठबंधन से बीजेपी की टक्कर

बिहार में 12 मई को आठ लोकसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। भाजपा ने साल 2014 में इनमें से सात सीटें जीती थीं, जबकि उसके सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी ने एक सीट जीती थी। तब जब विपक्ष अधिक बंटा हुआ था। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस ने 2014 का लोकसभा चुनाव एक साथ लड़ा था, जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) अलग से लड़ रही थी। एक साल बाद जब तीनों दलों ने एक साथ विधानसभा चुनाव लड़ा, तो महागठबंधन से बीजेपी को बड़ी हार मिली थी। लालू की आरजेडी ने साल 2015 में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सबको चौंका दिया था। हालांकि नीतीश कुमार ने 2017 में एनडीए की वापसी की और 2018 में तीन लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इस चुनाव में आरजेडी ने दो और बीजेपी को एक सीट मिली। आरजेडी और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और मुकेश साहनी की नवगठित पार्टी विकासशील इंसाफ पार्टी के साथ गठबंधन किया है। साहनी, जो खुद को मल्लाह (मछुआरे) का बेटा कहने में गर्व महसूस करते हैं, उनका कहना है कि इस लोकसभा चुनाव में उनका प्रभाव है। यादव, मुस्लिम और मल्लाह मतदाताओं का एक साथ आना बीजेपी के लिए 2014 में जीती सीटों को बरकरार रखने में बड़ी चुनौती बन सकता है।

पश्चिम बंगाल में ममता को हराना मुश्किल

पश्चिम बंगाल में ममता को हराना मुश्किल

साल 2014 में तृणमूल कांग्रेस ने उन सभी आठ सीटों पर जीत हासिल की थी जिसमें रविवार को लोकसभा चुनाव के छठे चरण में वोटिंग होनी है। पीएम मोदी और अमित शाह के साथ बंगाल में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता तकरार बढ़ी है, जिसने यहां राजनीतिक तापमान पहले के मुकाबले काफी बढ़ा दिया है। टीएमसी लोकसभा चुनाव में मजबूत संगठनात्मक पकड़ और बंगाल में ममता बनर्जी की लोकप्रियता के कारण अच्छे प्रदर्शन के प्रति आश्वस्त है। जबकि बीजेपी बड़े पैमाने पर पीएम मोदी की मतदाताओं से अपील पर निर्भर है।

एमपी में बीजेपी को कांग्रेस से मिल रही है टक्कर

एमपी में बीजेपी को कांग्रेस से मिल रही है टक्कर

लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सामने मध्यप्रदेश एक और चुनौती है। पार्टी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद राज्य में सत्ता खो दी थी। राज्य के चुनावों में किसानों और ग्रामीण संकट के मुद्दे हावी थे। इस बार भी एमपी में वो ही मुद्दे हैं। पीएम मोदी कांग्रेस पर किसानों को कर्ज माफी के झूठे वादे के नाम पर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं। पिछली बार बीजेपी ने 8 में 7 सीटें जीती थी, जहां रविवार को वोटिंग होनी है। कांग्रेस को मात्र एक सीट मिली थी। सत्ता में कांग्रेस सरकार के साथ कांग्रेस पार्टी को बीजेपी से कुछ सीटें छीनने की उम्मीद है। भोपाल और गुना लोकसभा सीट पर चुनाव के छठे चरण में सबकी नजरें हैं। भोपाल में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के सामने बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मैदान में हैं। ठाकुर 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले की आरोपी हैं। मालेगांव बम विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी। गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया, जिन्हें निर्वाचन क्षेत्र में महाराज के रूप में जाना जाता है वो कांग्रेस से मैदान में है। वो साल 2002 से गुना लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बीजेपी ने इस सीट से केपी यादव को टिकट दिया है, जो जनवरी 2018 तक सिंधिया के सहयोगी थे।

दिल्ली में आप और कांग्रेस से मुकबला

दिल्ली में आप और कांग्रेस से मुकबला

साल 2014 के चुनाव में बीजेपी ने मोदी लहर में दिल्ली की सभी सात सीटों पर कब्जा किया था। लेकिन इसके बाद अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने केंद्रशासित प्रदेश में राजनीतिक को नई गतिशीलता दी है। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीती थी। बीजेपी तब केवल तीन सीट जीत सकी थी। हालांकि पार्टी ने नगरपालिका चुनावों में अपना वर्चस्व बनाए रखा, लेकिन आप ने स्थानीय निकाय चुनावों में महत्वपूर्ण बढ़त बनाई। वहीं कांग्रेस, दिल्ली में अपने संगठन को पुनर्जीवित करने का दावा भी करती है, जिसने पार्टी नेतृत्व के सामने आप के साथ गठबंधन के लिए उनकी शर्ते मानने से इनकार कर दिया था। बीजेपी को उम्मीद है कि आप और कांग्रेस के बीच विपक्षी वोटों का बंटवारा उसकी मदद करेगा लेकिन सभी सातों सीटों पर फिर से जीत हासिल करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है।

झारखंड में महागठबंधन से मिल रही है चुनौती

झारखंड में महागठबंधन से मिल रही है चुनौती

12 मई को झारखंड में चार सीटों में वोटिंग है और बीजेपी ने साल 2014 में इन सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। बीजेपी की झारखंड में सरकार है, जहां इस साल के अंत में हरियाणा और महाराष्ट्र के साथ चुनाव होने हैं। विपक्षी दलों, कांग्रेस, झामुमो, सूबे क पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के झारखंड विकास मोर्चा प्रगतिशील (जेवीएमपी) और राष्ट्रीय जनता दल ने झारखंड में भाजपा के खिलाफ एकजुट लड़ाई लड़ने के लिए महागठबंधन बनाया है। इसके अलावा बीजेपी को कई स्थानीय नेताओं से खतरा है, जो राज्य में पार्टी के उम्मीदवारों की पसंद के विरोध में आवाज उठा रहे हैं।

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