PM Kisan और पेंशन स्कीम में बड़ा साइबर जाल, करोड़ों का फ्रॉड करने वाला गिरोह का पर्दाफाश

PM Kisan and Pension Scheme Fraud: दौसा के छोटे से गांव से निकलकर रामावतार सैनी ने साइबर धोखाधड़ी की दुनिया में अपने लिए एक अलग पहचान बनाई। वह सिर्फ एक एजेंट नहीं, बल्कि सरकारी पोर्टलों के सिस्टम्स की बारीकियों को समझकर नकली पहचान और खरीदे गए बैंक खातों के ज़रिए लाखों रुपये हड़पने वाला मास्टर माइंड था। DMIS और PM किसान जैसे पोर्टलों की तकनीक का इस्तेमाल कर, वह सरकारी मदद की रकम को ट्रांसफर करवाता और 50-75 फीसदी कमीशन अपने पास रखता।

इस रैकेट की खासियत यह थी कि यह कोई आम गैंग नहीं, बल्कि नंबरों और मशीनों का जाल था। सिम कार्ड, फिंगर-स्कैनर, नकली पासबुक और सीलबद्ध मोहरों के सहारे उसने 11,000 से अधिक खातों को सक्रिय कर रखा था। जब पुलिस ने इस नक्शे को देखा, तो उन्होंने 'शटरडाउन' ऑपरेशन चलाकर 70 घंटे में 70 टीमों के साथ तीन दर्जन ठिकानों पर रेड की।

PM Kisan Pension Scheme Fraud

टेक्नोलॉजी का खतरनाक खेल

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार यह रैकेट कोई आम गैंग नहीं था। यह नंबरों, कोड और मशीनों का नेटवर्क था। सिम कार्ड, फिंगर-स्कैनर, नकली पासबुक और सीलबंद मोहरें इसका हिस्सा थीं। इनके ज़रिए बड़े दफ्तरों की सुरक्षा भी कमजोर पड़ गई। रैकेट के 11,000 से अधिक संदिग्ध खातों को चालाकी से सक्रिय किया गया।

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70 घंटे में 70 टीमों का ऑपरेशन

पुलिस ने पूरी योजना बनाकर 70 घंटे में 70 टीमों के साथ, तीन दर्जन ठिकानों पर एक साथ रेड की। ऑपरेशन का नाम था 'शटरडाउन', जिसका मतलब था सब कुछ बंद करना। रात के सन्नाटे में धीरे-धीरे रेड के दौरान कई ठिकानों पर दबिश दी गई और गिरोह की चालाकी उजागर हुई।

पकड़े गए सबूत

छापे में बड़ी संख्या में नकदी, लग्जरी वाहन, सिम कार्ड, फिंगर-स्कैनर और पासपोर्ट की सूचियां बरामद हुईं। लेकिन असली कहानी उन 430 एटीएम कार्ड्स और 560 पहचान पत्रों की थी, जिनके पीछे आम लोगों की मेहनत और खातों की चोरी छिपी थी। 30 मुख्य संदिग्धों के नामों ने गांव-गली में खलबली मचा दी।

रामावतार सैनी और उसके साथियों की गिरफ्तारी केवल अपराधियों के लिए नहीं, बल्कि तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वालों के लिए एक चेतावनी थी। एसपी अमित कुमार ने साइबर टीम और मुखबिरों की मेहनत की सराहना की। 'शटरडाउन' ऑपरेशन ने यह दिखा दिया कि जब लोगों की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ करने वाले जाल टूटते हैं, तो समाज का भरोसा वापस आता है।

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