National Commission for Men: 'आदमियों को शादी के बाद घरेलू हिंसा से बचाने के लिए बने बने राष्ट्रीय पुरुष आयोग'
National Commission for Men: शादीशुदा पुरुषों की घरेलू हिंसा और आत्महत्या से रक्षा के लिए राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाने की मांग उठी ही। इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

National Commission for Men: शादीशुदा मर्दों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमे मांग की गई है कि इस मसले पर शोध होना चाहिए। शादी के बाद पुरुष घरेलू हिंसा सहित तमाम मुद्दों की वजह से आत्महत्या कर लेते हैं, लिहाजा इस दिक्कत को गंभीरता से लेते हुए पुरुषों के लिए राष्ट्रीय कमीशन का गठन किया जाना चाहिए, जहां पुरुषों से जुड़े मसलों को हल किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट महेश कुमार तिवारी ने यह याचिका दायर की है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में वकील ने अपील की है कि वह केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह इस मसले को लेकर एक गाइडलाइन जारी करे और घरेलू हिंसा का शिकार हो रहे लोगों की समस्या का समाधान किया जाए। जो पुरुष शादी के बाद घरेलू दिक्कतों से जूझ रहे हैं, उनके दिक्कतों को इस कमीशन के पास भेजना चाहिए और जल्द से जल्द उसका हल होना चाहिए। जबतक इस कमीशन का गठन नहीं हो जाता है तबतक राज्य मानवाधिकार आयोग के पास इस तरह के मसलों को भेजा जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि लॉ कमिशन इंडिया को निर्देश दिया जाए कि वह शादीशुदा मर्दों के खिलाफ बढ़ते पारिवारिक अफराध, आत्महत्या के मामलों पर शोध करें, इसको लेकर एक रिपोर्ट तैयार करें और नेशनल कमीशन फॉर मेन का गठन किया जाए। ताकि इस तरह के मसलों से जूझ रहे पुरुष इस कमीशन के पास आ सके। याचिकाकर्ता ने कहा कि देश में शादी के बाद पुरुषों की आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल 8 लाख शादीशुदा पुरुष आत्महत्या करते हैं, यह आंकड़ा एनसीआरबी का है।
याचिकाकर्ता के अनुसार 1967 के बाद हर एक लाख में 12 लोग आत्महत्या कर लेते हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़े के अनुसार 7 सितंबर 2021 के तक भारत में स्वास्थ्य की समस्या काफी बढ़ी है। पिछले पांच दशक में भारत में आत्महत्या के मामले काफी बढ़े हैं। 20220 की तुलना में 2021 में आत्महत्या के मामले भारत में 7.2 फीसदी बढ़े हैं जोकि दुनिया में सर्वाधिक हैं।












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