फाइज़र, एस्ट्राजेनेका वैक्सीन कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रदान करती हैं बेहतर सुरक्षा- लैंसेट स्टडी
द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक फाइजर और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं।
नई दिल्ली, 15 जून। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक फाइजर और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं। बता दें कि डेल्टा वेरिएंट सर्वप्रथम भारत में पाया गया था और इसे यूके में मिले कोरोना के अल्फा वेरिएंट की तुलना में अधिक घातक माना गया है।

पब्लिक हेल्थ स्कॉटलैंड और यूके के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि कोविशील्ड के मुकाबले फाइजर बायोएनटेक वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करती है। विश्लेषण में मामलों के जनसांख्यिकीय वितरण के लिए 1 अप्रैल से 6 जून, 2021 तक की अवधि को कवर किया गया।
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अध्ययनकर्ताओं ने इस अवधि में कोरोना से संक्रमित हुए 19,543 लोगों पर यह अध्ययन किया, जिनमें से 377 लोग स्कॉटलैंड के कोरोना अस्पताल में भर्ती भी हुए थे। अध्ययन में सामने आया कि वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के दो हफ्तों बाद फाइजर वैक्सीन अल्फा वेरिएंट के खिलाफ 92 प्रतिशत जबकि डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 79 प्रतिशत सुरक्षा देने में मददगार है।
वहीं एस्टाजेनेका की वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 60 प्रतिशत जबकि अल्फा वेरिएंट के खिलाफ 73 प्रतिशत सुरक्षा देने में मददगार है। उन्होंने अध्ययन में यह भी पाया की इन वैक्सीन की दोनों डोज एक डोज के मुकाबले ज्यादा बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं।
अध्ययन में शामिल एक विशेषज्ञ ने कहा कि अल्फा वेरिएंट के मुकाबले डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित हुए व्यक्ति में अस्पताल में भर्ती होने की ज्यादा आशंका रहती है। वहीं ऐसे लोगों में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है जो 5 या इससे अधिक बीमारियों से पीड़ित हैं।
उन्होंने कहा कि एस्ट्राजेनेका और फाइजर दोनों वैक्सीन कोरोना से सुरक्षा देने और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने से बचाने में काफी मददगार हैं। हालांकि अध्ययनकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि अल्फा वेरिएंट वाले लोगों की तुलना में डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित लोगों में कोरोना के प्रभावों में ज्यादा कमी आई।
अध्ययनकर्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रत्येक प्रकार के टीके प्राप्त करने वाले समूहों में अंतर के कारण वैक्सीन की तुलना सावधानी से की जानी चाहिए। तुलना करते समय इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्रत्येक खुराक के साथ इम्युनिटी कितनी जल्दी विकसित होती है।












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