राष्ट्रीयता के मुद्दे पर गुवाहाटी HC की अहम टिप्पणी, जो एकबार भारतीय हो गया, वो बाद में विदेशी नहीं होगा
गुवाहाटी, मई 06। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ही पश्चिम बंगाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह कहा था कि एकबार कोरोना खत्म हो जाए तो हम देशभर में CAA को लागू कर देंगे। शाह की इस टिप्पणी के बीच गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राष्ट्रीयता से जुड़े एक मामले पर अहम टिप्पणी की है। हाईकोर्ट की विदेशी ट्रिब्यूनल बेंच ने कहा है कि अगर ट्रिब्यूनल ने एकबार किसी को भारतीय घोषित कर दिया तो उस व्यक्ति को दोबारा गैर-भारतीय घोषित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट के फैसले की महत्वता
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आपको बता दें कि गुवाहाटी हाईकोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए अहम हो जाती है, क्योंकि असम राज्य में नागरिकता एक बड़ा मुद्दा है। असम में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां किसी भारतीय नागरिक को अपनी राष्ट्रीयता साबित करने के लिए 2 बार से अधिक नोटिस भेजे जा चुके हैं। राष्ट्रीयता से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता के संबंध में ट्रिब्यूनल की राय 'रेस ज्यूडिकाटा' के रूप में काम करेगी - जिसका अर्थ है कि मामला पहले ही तय हो चुका है और उसे फिर से अदालत में नहीं लाया जा सकता है।
'अमीना खातून केस को ध्यान में रख लिया फैसला'
राष्ट्रीयता से जुड़ी कई याचिका पर इस सप्ताह के शुरुआत में सुनवाई करते हुए जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह और जस्टिस नानी तागिया की बेंच ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को पहले की कार्यवाही में भारतीय नागरिक घोषित किया गया है तो बाद की किसी भी कार्यवाही में उसे विदेशी घोषित नहीं किया जा सकता, जैसा कि ऐसे मामलों में न्यायिक निर्णय का सिद्धांत लागू होता है। कोर्ट ने इस दौरान बताया कि यह निर्णय 2018 के अमीना खातून मामले को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बेंच ने कहा कि यह अब्दुल कुड्डुस के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर 'अच्छा कानून नहीं' है।












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