पिता ने मजदूरी करके बेटे को बनाया IAS, बुलंदशहर के पवन कुमार ने पेश की मिसाल
यूपीपीएससी की परीक्षा में 239 रैंक हासिल करने वाले बुलंदशहर के पवन कुमार के घर पर खुशी की लहर है। पवन बेहद गरीब परिवार से आते हैं। उनके पिता मजदूरी करते हैं और उन्होंने मजदूरी के पैसों से ही अपने बेटे को पढ़ाई में मदद की।
परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद पवन कुमार ने कहा कि यह मेरा तीसरा प्रयास था। मेरी सफलता में मेरे परिवार का विशेष योगदान है। मेरे पापा, मां, बहन, मौसी, मामा का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

अपनी सफलता को लेकर पवन कुमार ने कहा कि मेरा उन सभी लोगों से कहना है जो आर्थिक स्थिति के चलते तैयारी नहीं कर पा रहे हैं और तैयारी छोड़ देना चाहते हैं कि यह परीक्षा एक लंबी प्रक्रिया है। इसमे कई बार कोचिंग की जरूरत पड़ती है। लेकिन आपको वित्तीय वजहों से तैयारी नहीं छोड़नी चाहिए।
यह भ्रम है कि कोचिंग से ही पास कर पाएंगे। जो कोचिंग करते हैं उन्हें भी पता है कि 30 फीसदी ही कोचिंग का योगदना है, बाकि 70 फीसदी उनकी खुद की पढ़ाई है। आप एक पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। मेरे मामले में ऐसी नौबत नहीं आई, मेरे माता-पिता, बहनों ने काफी संघर्ष किया मेरे लिए।
मेरा दो प्रयास में नहीं हो पाया था, इसके बाद भी दिल्ली में मुझे ठहराना, पढ़ाई कराना, अपने आप में बड़ी बात थी। मेरे दोस्त हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। वित्तीय वजहें आपकी राह में बाधा नहीं बन सकती हैं। इसके लिए आप अपने दोस्तों की मदद ले सकते हैं। आप कोचिंग की जगह उन दोस्तों से मदद ले सकते हैं जो उस विषय में जानते हैं।
मेरे पहले प्रयास में मैं पूरी तरह से तैयार नहीं था। उसमे मेरा प्री नहीं हो पाया था। दूसरे प्रयास में मैं मेन्स में पास हो गया था, लेकिन इंटरव्यू में नहीं हो पाया था। उस वक्त मैं रो रहा था, उस वक्त मेरी मां ने मेरा हौसला बढ़ाया।
उसके बाद मैंने सोचा कि क्यों ना मैं कोई पार्ट टाइम नौकरी कर लूं। जब मैं एक संस्थान में कंटेंट राइटिंग के लिए गया तो मुझे लगा कि रोज मुझे यहां 7-8 घंटे देना होगा, ऐसे में अगर मैं यह समय अपनी पढ़ाई में दूं तो कहीं बेहतर कर सकता हूं। जिसके बाद मैंने नौकरी की बजाए तैयारी पर ध्यान देने का सोचा।
वहीं पवन की बहन ने कहा कि हम सब शांति माहौल में रहते थे, उसे शांति पसंद थी। उसने छप्पर में रहकर पढ़ाई की है, जब लाइट चली जाती थी तो उसने डिबिया जलाकर पढ़ाई की है।
मेरे पिता मजदूरी करते हैं। हमारे यहां छप्पर पड़ा हुआ है, हमारे यहां रहने के लिए ढंग का घर भी नहीं है। बारिश होती है तो पूरा छप्पर टपकने लगता था। उसे मोबाइल की जरूरत थी, उसने पापा से कहा, जिसके बाद पापा ने काफी मेहनत की और उसे फोन दिलवाया था।
पवन कुमार के पिता महेश कुमार ने कहा कि मेरे बेटे की मेहनत रंग लाई है। जैसा भी रिजल्ट आया है, आपके सामने है। बड़ी मेहनत करके हम जीवन यापन करते हैं, हमारे पास खेत भी नहीं है। उसकी पढ़ाई के लिए हम खर्चा-पानी देते रहे। काफी प्रयास के साथ हमने बच्चों को पढ़ाया।
बच्चों को पढ़ाने के लिए हमने घर बनाने के बारे में भी नहीं सोचा। जब बारिश होती है तो हम एक ही जगह बैठते थे। मेरा बेटा कहता था कि मुझे पढ़ना है, फिर देखा जाएगा। भूखे रहकर मैंने बच्चे को पढ़ाया है। परमात्मा की कृपा है कि बच्चे की मेहनत और सभी लोगों की दुआ काम आई।












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