Pawan Khera को SC से राहत! रिंकी भूइयां पासपोर्ट केस में मिली अग्रिम जमानत, इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

Pawan Khera Anticipatory Bail: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भूइयां सरमा द्वारा दर्ज कराए गए 'पासपोर्ट और जालसाजी' विवाद मामले में शीर्ष अदालत ने खेड़ा को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है।

इस फैसले के बाद अब असम पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाएगी। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह फैसला सुनाया।

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इससे पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट ने खेड़ा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

Pawan Khera Passport case क्या है पूरा विवाद?

यह मामला अप्रैल 2026 की शुरुआत में तब गरमाया जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि असम के सीएम की पत्नी रिंकी भूइयां सरमा के पास अलग-अलग देशों के तीन पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्ति है।

इन आरोपों को झूठा और मानहानिकारक बताते हुए रिंकी भूइयां ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और मानहानि की धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था। FIR दर्ज होने के बाद असम पुलिस की एक टीम जांच के लिए दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर भी पहुंची थी।

सिंघवी बनाम तुषार मेहता के बीच अदालत में तीखी बहस

सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की ओर से दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी और असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अपनी दलीलें पेश कीं:

सिंघवी की दलील: सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मूल रूप से मानहानि का मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि 'गिरफ्तारी की आवश्यकता क्या है? केवल अपमानित करने के लिए हिरासत में लेना कहाँ तक जायज है?' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर में बाद में जालसाजी (BNS की धारा 339) की धारा जानबूझकर जोड़ी गई, जबकि खेड़ा के देश छोड़कर भागने का कोई खतरा नहीं है।

तुषार मेहता की दलील: सॉलिसिटर जनरल ने गिरफ्तारी का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल मानहानि नहीं बल्कि आधिकारिक दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ (Fabrication) का मामला है। उन्होंने दावा किया कि पासपोर्ट की सील, क्यूआर कोड और अन्य सरकारी पहचान चिह्नों के साथ फर्जीवाड़ा किया गया है, जिसकी गहराई से जांच जरूरी है। उन्होंने खेड़ा को 'फरार' बताते हुए कहा कि वे जांच से बच रहे थे।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक, क्या-क्या हुआ?

पवन खेड़ा के लिए पिछले कुछ हफ्ते कानूनी उठापटक भरे रहे:

तेलंगाना हाईकोर्ट: शुरुआत में खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर रोक लगवाई थी।

गुवाहाटी हाईकोर्ट का झटका: इसके बाद मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने 'हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता' बताते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए खेड़ा को राहत दी। अदालत ने माना कि जांच में सहयोग करने की शर्त पर गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।

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