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'PM संग अप्रत्याशित घटना हो सकती थी', स्पीकर OM बिरला का खुलासा, PM की कुर्सी घेरने वालीं 6 महिला MP कौन हैं?

Women MPs Surround PM Modi Chair List: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी (गुरुवार) को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। साथ ही पिछले कुछ दिनों से संसद में हंगामेदार बजट सेशन पर विपक्ष पर निशाना भी साधा। इससे पहले, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में खुलासा किया।

स्पीकर ने कहा कि 4 फरवरी 2026 को लोकसभा में पीएम मोदी मेरे आग्रह पर नहीं आए। वजह बताई कि 'कांग्रेस के कुछ महिला सांसदों ने पीएम की कुर्सी घेरी थी, कोई अप्रत्याशित घटना सदन में हो सकती थी। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं ये 6 महिला सांसद?

Parliament Protest News

Six Women MPs Who Vying PM Modi Chair: पीएम की कुर्सी घेरने वालीं 6 महिला सांसद: कौन हैं ये?

घटना में शामिल 6 महिला सांसद मुख्य रूप से कांग्रेस की हैं, जो विपक्षी एकता का प्रतीक बन गईं। उनकी प्रोफाइल्स से पता चलता है कि वे मजबूत बैकग्राउंड वाली हैं, लेकिन आपराधिक मामले भी हैं। आइए, एक-एक करके जानें:-

Who Is R. KM. Sudha: कौन हैं आर. केएम. सुधा (मयिलादुथुराई, तमिलनाडु, कांग्रेस)?

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आर. केएम. सुधा का जन्म 27 जुलाई 1977 को गुम्मिडीपूंडी में हुआ। पिता टीके रामकृष्णन और मां टीकेआर भुवनेश्वरी हैं। अविवाहित सुधा वकील हैं और मद्रास विश्वविद्यालय से बीए, बीएल और किशोर न्याय एवं मनोविज्ञान में पोस्टग्रेजुएट हैं। 2019 में डिप्लोमा भी लिया। उनकी संपत्ति 38 लाख रुपये से ज्यादा है, कोई कर्ज नहीं। लेकिन 10 आपराधिक मामले हैं, जो राजनीतिक सक्रियता से जुड़े हो सकते हैं। स्थायी पता: जीएनटी रोड, गुम्मिडिपुंडी। वे तमिलनाडु की मजबूत महिला नेत्री हैं, जो सामाजिक न्याय पर फोकस करती हैं। घटना में सुधा ने बैनर लहराकर नेहरू-गांधी परिवार पर आरोपों का विरोध किया। उनकी भूमिका से कांग्रेस की महिला विंग मजबूत हुई।

Who Is Jothimani S: कौन हैं जोथीमणि एस. (करूर, तमिलनाडु, कांग्रेस)

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जोथीमणि का जन्म 1976 में हुआ, उम्र 48 साल। पिता सेन्निमलाई हैं। कृषि और लेखिका हैं। अन्नामलाई विश्वविद्यालय से एम.फिल. (2005)। संपत्ति 1.53 करोड़, कर्ज 14 लाख। एक आपराधिक मामला। मतदाता अरावकुरिची निर्वाचन क्षेत्र में। जोथीमणि तमिलनाडु की ग्रामीण मुद्दों पर आवाज उठाती हैं। घटना में वे पीएम की कुर्सी के पास पहुंचीं, नारे लगाए। उनकी सक्रियता से विपक्षी महिलाओं को हौसला मिला। जोथीमणि लेखन से भी जुड़ी हैं, जो सामाजिक मुद्दों पर किताबें लिखती हैं।

Gaikwad Varsha Eknath : कौन हैं गायकवाड वर्षा एकनाथ (मुंबई उत्तर-मध्य, महाराष्ट्र, कांग्रेस)?

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वर्षा का जन्म 1975 में, उम्र 49। पति राजू बाबू गोडसे। सामाजिक सेवा और वेतनभोगी। मुंबई विश्वविद्यालय से एमएससी (2000)। संपत्ति 7.68 करोड़, कर्ज 1 करोड़। 7 आपराधिक मामले। मतदाता धारावी में। वर्षा मुंबई की स्लम और महिला मुद्दों पर काम करती हैं। घटना में वे मुख्य भूमिका में थीं, बैनर लेकर पीएम सीट घेरी। बीजेपी ने इसे 'आक्रामक' बताया, लेकिन वर्षा ने कहा, 'यह विरोध का अधिकार है।' उनके पति का व्यवसाय वीआर एसोसिएट्स है।

Who Is Jiniben Nagaji Thakor : जिनिबेन नागाजी ठाकोर (बनासकांठा, गुजरात, कांग्रेस)

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जिनिबेन का जन्म 1976 में, उम्र 48। पति नागाजी ठाकोर। कृषि, गृहिणी और सामाजिक कार्यकर्ता। जैन विश्वभारती से बीए (2020, दूरस्थ)। संपत्ति 85 लाख, कर्ज 6 लाख। एक आपराधिक मामला। मतदाता वाव निर्वाचन क्षेत्र में। गुजरात की आदिवासी इलाकों से जुड़ी जिनिबेन किसान मुद्दों पर बोलती हैं। घटना में ठाकोर ने स्लोगन दिए। उनकी प्रोफाइल से पता चलता है कि वे ग्रामीण विकास पर फोकस करती हैं।

Who Is Bachhav Shobha Dinesh: बच्छाव शोभा दिनेश (धुले, महाराष्ट्र, कांग्रेस)

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शोभा का जन्म 1959 में, उम्र 65। पति दिनेश मोतीराम बच्छाव। डॉक्टर। होम्योपैथी में डिप्लोमा (1983)। संपत्ति 30 करोड़, कर्ज 2 करोड़। 2 आपराधिक मामले। मतदाता नासिक पूर्व में। शोभा चिकित्सा और किसानी से जुड़ी हैं। घटना में वे विरोध में शामिल रहीं। उनकी संपत्ति से पता चलता है कि वे अमीर परिवार से हैं, लेकिन सामाजिक सेवा करती हैं।

Who Is Kadiyam Kavya: कौन हैं कडियाम काव्या (वारंगल एससी, तेलंगाना, कांग्रेस)

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काव्या का जन्म 10 अप्रैल 1983 को हनमकोंडा में। पिता कडियाम श्रीहरि, मां विनयरानी। पति डॉ. मोहम्मद नज़ीरुल्ला शेख। 2 बेटियां। एमबीबीएस, एमडी (पैथोलॉजी, 2013)। संपत्ति 1.55 करोड़, कर्ज 1 करोड़। कोई आपराधिक मामला नहीं। चिकित्सक। स्थायी पता: कनकदुर्गा कॉलोनी, वारंगल। काव्या तेलंगाना की स्वास्थ्य मुद्दों पर सक्रिय। घटना में वे बैनर लेकर शामिल। उनकी मेडिकल बैकग्राउंड से विपक्ष को मजबूती मिली।

सदन में हंगामा कैसे शुरू हुआ?

बजट सेशन 2026 की शुरुआत से ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस चल रही थी। 4 फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। पीएम मोदी शाम 5 बजे जवाब देने वाले थे। लेकिन दोपहर 2 बजे से ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाते हुए किताबें दिखाईं, जिससे कांग्रेस सदस्य भड़क गए।

विपक्षी सदस्यों ने सेक्रेटरी जनरल के टेबल पर चढ़कर कागज फाड़े और नारे लगाए। स्पीकर ओम बिरला ने सदन को शाम 5 बजे तक स्थगित कर दिया। जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तो विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम की कुर्सी के पास पहुंचकर बैनर लहराए, जिन पर 'सही काम करो' जैसी बातें लिखी थीं। वे ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़ीं और पीएम की सीट को घेर लिया। बीजेपी सांसदों ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन तनाव बढ़ गया। आखिरकार, सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, यह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा था, जहां महिला सांसदों को आगे करके पीएम को बोलने से रोका गया। विपक्ष ने इसे बीजेपी की 'चुनिंदा नियम लागू करने' की शिकायत बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे सुरक्षा उल्लंघन करार दिया।

स्पीकर ओम बिरला ने बताया 'काला धब्बा'

5 फरवरी को सदन शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा, 'कल लोकसभा चैंबर में कुछ सदस्यों ने जो व्यवहार किया, वह सदन के इतिहास में अभूतपूर्व था। राजनीतिक मतभेदों को स्पीकर के कार्यालय तक नहीं लाया जाता, लेकिन विपक्ष ने ऐसा किया, जो उचित नहीं। यह एक काला धब्बा है।' स्पीकर ने खुलासा किया कि उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के सदस्य पीएम की कुर्सी पर पहुंचकर 'अप्रत्याशित घटना' कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, 'मैंने खुद देखा कि महिला सदस्य वहां तक पहुंच गईं। अगर घटना हो जाती, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार कर देता। इसलिए मैंने पीएम से आग्रह किया कि सदन में न आएं। सदन के नेता का न बोलना उचित नहीं, लेकिन गरिमा बनाए रखना जरूरी था।' स्पीकर ने पीएम का आभार जताया कि उन्होंने सुझाव माना और विपक्ष को चेतावनी दी कि 'पोस्टर-पैंफलेट लेकर आएंगे, तो सदन नहीं चलेगा। कल की घटना देश ने देखी है।'

घटना का राजनीतिक असर: विवाद और आरोप-प्रत्यारोप

यह घटना संसद की गरिमा पर सवाल उठाती है। बीजेपी ने इसे 'सुरक्षा उल्लंघन' बताया, रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'यह अभूतपूर्व दबाव है।' कांग्रेस ने दावा किया कि पीएम डिबेट से भाग रहे। राहुल गांधी ने कहा, 'स्पीकर बताएं क्या बोलूं?' सोशल मीडिया पर ParliamentChaos ट्रेंड कर रहा, जहां लोग महिला सांसदों की बहादुरी की तारीफ कर रहे या आलोचना। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संसदीय प्रक्रिया कमजोर हुई। विपक्ष ने बीजेपी पर 'चुनिंदा सेंसरशिप' का आरोप लगाया।

संसद की गरिमा कैसे बचाएं?

यह घटना दिखाती है कि राजनीतिक मतभेद संसद की मर्यादा से ऊपर नहीं होने चाहिए। स्पीकर का कदम सही था, लेकिन विपक्ष को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। महिलाओं को आगे करके विरोध नई रणनीति है, लेकिन क्या यह लोकतंत्र को मजबूत करेगी? देश को ऐसी घटनाओं से बचना चाहिए।

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