Parliament Special Session: क्यों अबकी बार महिला आरक्षण विधेयक हो सकता है पास? ये रहे 7 संकेत
सोमवार या 18 सितंबर, 2023 से आयोजित संसद के पांच दिनों के विशेष सत्र में वर्षों से लंबित महिला आरक्षण विधेयक पास होने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। हालांकि, सरकार ने विशेष सत्र का जो एजेंडा बताया है, उसमें अभ यह विधेयक नहीं शामिल है, लेकिन पिछ कुछ हफ्तों में मिले संकेतों को परखें तो लगता है कि अब देश की आधी आबादी को उनका हक मिलने का रास्ता साफ होने वाला है।
सबसे ताजा रुझान केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी के वैचारिक और अगुवा संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की ओर से शनिवार को पारित एक प्रस्ताव से मिला है। आरएसएस के इस अखिल भारतीय समन्वय समिति के जिस तीन दिवसीय बैठक में महिला सशक्तिकरण का मुद्दा छाया रहा है, उसमें इसके प्रमुख मोहन भागवत और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल हुए हैं।

आरएसएस ने महिलाओं की भागादारी बढ़ाने की कही बात
इस बैठक के आखिर में आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी मनमोहन वैद्य ने कहा, 'महिलाओं को नेतृत्व वाली भूमिका निभानी चाहिए। इसलिए संघ से जुड़े संगठन सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश करेंगे।' संघ की ओर से ऐसा कहे जाने का यह संकेत निकला जा रहा है कि केंद्र में सत्ताधारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार इस सत्र में महिलाओं के लिए विधायिकाओं में एक-तिहाई (33%) आरक्षण वाला विधेयक ला सकती है।
राष्ट्रपति ने भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का किया है आह्वान
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी पिछले हफ्ते गुजरात विधानसभा में विधायिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाए जाने का आह्वान कर चुकी हैं। अगर विशेष संसद सत्र बुलाए जाने की घोषणा के बाद से देखें तो महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर एक के बाद एक संकेतों की कड़ियां जुड़ती नजर आ रही हैं।
संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा-धनकड़
इसी महीने के पहले हफ्ते में ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने तो और भी स्पष्ट तौर पर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर एक तरह से भविष्यवाणी कर दी थी। राजस्थान में जयपुर के विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय की छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, 'मैं आपको बता सकता हूं कि अब वो दिन दूर नहीं, जब भारत में संविधान में उचित संशोधन के साथ संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। 2047 तक हम एक वैश्विक महाशक्ति बन जाएंगे, लेकिन यदि यह आरक्षण पहले हो जाता है, तो हम 2047 से पहले ही नंबर 1 हो जाएंगे......'
केसीआर ने भी पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर की है मांग
मोदी सरकार के सामने महिला आरक्षण विधेयक लाने के लिए यह बहुत माकूल मौका लग रहा है। पिछले शुक्रवार को ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री मोदी को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने संसद के इसी विशेष सत्र में ही महिला आरक्षण बिल को पास कराने की मांग की है। तेलंगाना में इस साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं और माना जा रहा है कि महिला आरक्षण बिल विशेष संसद सत्र का एक संभावित एजेंडा होने की वजह से ही उन्होंने अपना एक सियासी कार्ड चला है।
कांग्रेस-लेफ्ट पार्टियां करती रही हैं समर्थन
कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां पारंपरिक तौर पर एक-तिहाई महिला आरक्षण की नीति की समर्थक रही हैं। ऐसे में अगर मोदी सरकार यह मास्टरस्ट्रोक चलती है तो इस बात की कम संभावना है कि ये पार्टियां इस विधेयक की राह में रोड़ा बनने का जोखिम उठा पाएंगी। सबसे खास बात है कि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर लिखा भी है कि 'कांग्रेस कार्य समिति ने मांग की है कि संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक को पारित किया जाना चाहिए।'
विरोध करने वाले दलों का भी रुख लग रहा है नरम
तथ्य ये है कि अबतक संसद में जितनी बार भी महिला आरक्षण विधेयक अटका है, उसके पीछे आरजेडी, जनता दल (यूनाइटेड) और समाजवादी पार्टियों की ओर से हद दर्जे तक का विरोध प्रमुख कारण रहा है। मूल रूप से ओबीसी और मुस्लिम वोट बैंक आधारित समीकरण बिठाने वाली ये पार्टियां महिला आरक्षण में भी ओबीसी और अल्पसंख्यक कोटा की मांग करती रही हैं। लेकिन, अभी के माहौल में इन पार्टियों की आक्रमकता थोड़ी नरम पड़ने के संकेत मिल रहे हैं और भारत राष्ट्र समिति ने जो कार्ड चला है, वह भी विपक्षी दलों के लिए एक दबाव का काम कर सकता है।
दोनों सदनों में मजबूत स्थिति में सरकार
सातवां और सबसे प्रमुख कारण ये है कि मोदी सरकार के पास लोकसभा में भारी बहुमत है। जबकि, राज्यसभा में भी उसके पास मौजूद संख्या गणित अब काफी ताकतवर हो जाने के अनुमान हैं। खासकर केसीआर की लाइन से सरकार को और मजबूती मिली है। इसलिए, हो सकता है कि संसद के इस विशेष सत्र का यह सबसे प्रमुख एजेंडा साबित हो जाए।












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