Parliament Session: SIR पर कम नहीं हो रहे हैं विपक्ष के तेवर, आज भी संसद में हंगामे के आसार
Parliament Session: संसद के मानसून सत्र का आज 15वां दिन है, विपक्ष का बिहार SIR पर चर्चा कराने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन जारी है,जिसकी वजह से संसद सुचारू रूप से चल नहीं पा रही है। बार-बार सदन को स्थगित करना पड़ रहा है, आज भी विपक्ष के तेवरों में कोई कमी देखने को मिल नहीं रही हैं, ऐसे में आज भी संसद चल पाएगी या नहीं,इसे कहना थोड़ा मुश्किल है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह को पत्र लिखकर SIR पर चर्चा कराने की मांग की है।

जिस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ किया है कि 'जो मामला कोर्ट में होता है उस पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती है ये लोकसभा का नियम है। सरकार पहले ही ये बात स्पष्ट कर चुकी है।'
ट्रंप के टैरिफ अटैक पर भी विपक्ष गरम (Parliament Session)
जहां एक ओर एसआईआर पर हंगमा बरपा हुआ है तो वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ अटैक पर भी विपक्ष केंद्र सरकार पर भड़का हुआ है। उसने पीएम मोदी की गलत नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। मालूम हो कि 14 दिन के संसद सत्र में मात्र दो दिन ऐसे रहें जब सदन पूरे दिन सुचारू रूप से चला। वरना हर दिन इसका कार्य बाधित ही रहा है।
Manipur Appropriation (No.2) Bill, 2025 पास
हालांकि लोकसभा में कल Manipur Appropriation (No.2) Bill, 2025 पास हो गया था। इस बारे में बात करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 'विपक्ष मणिपुर का मुद्दा उठाता रहता है, यह उनका अधिकार है लेकिन जब सरकार राज्य के लिए बजट लाती है, उसके विकास के लिए धन आवंटित करती है तो विपक्ष न तो उसकी बात सुनता है और न ही उससे बात करने की हिम्मत रखता है।'
'इस बजट में भारत सरकार द्वारा मणिपुर के लिए 2,898 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन शामिल किया गया है। इस राशि में से 1,667 करोड़ रुपये पूंजीगत मद में और 1,231 करोड़ रुपये राजस्व मद में खर्च किए जाएंगे।'
मणिपुर विनियोग (संख्या 2) विधेयक, 2025 निन्नलिखित बिंदुओं पर काम करेगा
- आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) के पुनर्वास के लिए सहायता - 523 करोड़ रुपये
- सुरक्षा संबंधी व्यय - 542 करोड़ रुपये।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए तैनाती शुल्क - 500 करोड़ रुपये।
- यह सार्वजनिक वित्त की दीर्घकालिक स्थिरता में भी सहायता करेगा।
- उच्च ब्याज वाले ऋणों का पूर्व भुगतान - 633 करोड़ रुपये।
- एसएएससीआई के अंतर्गत अतिरिक्त सहायता - 700 करोड़ रुपये।












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