बागेश्वर धाम में पहली बार हुआ ऐसा काम! पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पास कहां से आते हैं इतने पैसे? खुद खोला राज

Bageshwar Dham Dhirendra Shastri: मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में इस समय जो नजारा है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। 305 निर्धन बेटियों का विवाह, 9 देशों के राजदूतों की मौजूदगी और लाखों लोगों का भंडारा...यह किसी शाही शादी से कम नहीं है।

लेकिन इस भव्यता को देखकर हर किसी के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है कि आखिर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास इतना पैसा कहां से आता है? जहां बड़े-बड़े आयोजन सरकारी मदद या कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप पर टिके होते हैं, वहीं बागेश्वर धाम का यह 'कन्या विवाह महा महोत्सव' एक अलग ही कहानी बयां करता है।

Bageshwar Dham Dhirendra Shastri

दान पेटी, आस्था का सबसे बड़ा 'फंड'

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्वयं बताया है कि इस विशाल आयोजन का मुख्य स्रोत 'मंदिर की दान पेटी' है। धाम में आने वाले लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार जो चढ़ावा चढ़ाते हैं, उसी राशि को संचित कर इस महा-आयोजन में लगाया जाता है। शास्त्री जी का कहना है कि यह पैसा समाज का है और समाज की बेटियों के घर बसाने में ही खर्च हो रहा है।

ये भी पढ़ें: Indresh Upadhyay: यादव समाज के लिए क्या बोल गए इंद्रेश उपध्याय? समाज में हुई थू-थू अब मांगनी पड़ी माफी

बागेश्वर धाम पीठाधीश धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया, "आज 300 बेटियों के कन्या विवाह महा महोत्सव का पवित्र अवसर है, जहां दानपात्र मंदिर से सातवां कन्या विवाह महा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है... 10-15 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है... इस साल का कन्या विवाह सिर्फ एक राष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं बल्कि एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है, क्योंकि नौ देशों के राजदूत दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने पहुंचेंगे..."

जन-भागीदारी और 'क्राउडफंडिंग' का मॉडल

बागेश्वर धाम का मॉडल पारंपरिक दान से थोड़ा अलग है। यहां केवल नकद ही नहीं, बल्कि वस्तु दान का भी बड़ा महत्व है:

सामूहिक सहयोग: विवाह में दिए जाने वाले गृहस्थी के सामान (टीव्ही, फ्रिज, कूलर, बर्तन आदि) का बड़ा हिस्सा संपन्न भक्तों द्वारा सीधे दान किया जाता है।

सेवादार और श्रमदान: आयोजन में हज़ारों की संख्या में स्वयंसेवक मुफ्त सेवा देते हैं। टेंट, सजावट और रसद के काम में स्थानीय व्यापारियों का बड़ा सहयोग रहता है, जो अक्सर लागत मूल्य या सेवा भाव से काम करते हैं।

विदेशी मेहमान और 'ग्लोबल' होती साख

इस बार का आयोजन सिर्फ बुंदेलखंड तक सीमित नहीं रहा। 9 देशों के राजदूतों का आना यह दिखाता है कि धाम की पहुंच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। जानकारों का मानना है कि विदेशों में बसे भारतीय मूल के संपन्न लोग (NRIs) भी इस 'कन्यादान' मुहिम में बड़ी राशि का योगदान देते हैं।

व्यवस्था का ढांचा, कहां-कहां खर्च होता है पैसा?

##

राजनीति और स्थानीय प्रशासन का साथ

आयोजन में सत्ता और विपक्ष दोनों का समन्वय देखने को मिलता है। क्षेत्रीय विधायक अरविंद पटेरिया जैसे लोग अपनी पूरी टीम के साथ चौबीसों घंटे खिचड़ी वितरण और प्रबंधन में लगे हैं। जब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि सेवा के काम में जुट जाते हैं, तो लॉजिस्टिक्स का बड़ा बोझ कम हो जाता है।

ये भी पढ़ें: Dhirendra Shastri: धीरेंद्र शास्त्री की शादी पर सबसे बड़ा अपडेट, विरोधियों को दी खुली चुनौती, VIDEO VIRAL

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+