Pandit Chhannulal Mishra: क्लासिकल सिंगर पंडित छन्नूलाल ने दुनिया को कहा अलविदा, कैसे था पीएम मोदी से कनेक्शन?
Pandit Chhannulal Mishra: बनारस घराने की शास्त्रीय संगीत परंपरा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले पद्मभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया। 91 वर्ष की उम्र में गुरुवार तड़के मिर्जापुर स्थित अपने घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली। दशकों तक ठुमरी, दादरा, भजन और अन्य शास्त्रीय गायन से लोगों के दिलों को छूने वाले पंडित मिश्र केवल एक संगीतकार नहीं थे, बल्कि बनारस की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आध्यात्मिक संस्कृति के जीवंत प्रतीक थे। उनकी आवाज़ में काशी की गलियों की मिठास, घाटों की शांति और बनारस के हर रंग की झलक थी।
उनकी गायकी न केवल संगीत प्रेमियों के लिए आनंद का स्रोत थी, बल्कि नए कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी। पंडित छन्नूलाल मिश्र ने हमेशा संगीत को एक साधना के रूप में देखा और इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया।

91 साल की उम्र में लिया अंतिम सांस
गुरुवार सुबह 4 बजकर 15 मिनट पर मिर्जापुर स्थित अपने घर में पंडित मिश्र ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वाराणसी और मिर्जापुर की धरती पर उनकी शास्त्रीय आवाज की गूंज अब हमेशा के लिए थम गई। उनके निधन से संगीत जगत, उनके अनुयायी और पूरे बनारस घराने में गहरा शोक है।
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लंबे समय से थे अस्वस्थ
पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत चिंताजनक थी। बीते महीने उन्हें सांस और सीने में तकलीफ के चलते बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की देखरेख और उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और उन्हें छुट्टी मिल गई। इसके बाद पंडित मिश्र मिर्जापुर लौट आए, जहां उनका घर पर ही इलाज जारी रहा। परिवार ने बताया कि हाल ही में उन्हें खून की कमी और त्वचा संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा था।
वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार
परिवार के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर गुरुवार सुबह मिर्जापुर से वाराणसी लाया जाएगा। सुबह 11 बजे से लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। शाम 7 बजे बनारस में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। संगीत जगत के कई दिग्गज और उनके अनुयायी अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित होंगे।
बेटी ने दी जानकारी
पंडित मिश्र की बेटी नम्रता ने बताया कि उनके पिता मिर्जापुर में परिवार के बीच ही थे। उन्होंने कहा कि पिता हमेशा अपनी कला और संगीत के प्रति समर्पित रहे। परिवार ने बताया कि पंडित मिश्र ने जीवनभर संगीत के लिए अपने व्यक्तिगत सुख-दुख को भी पीछे रखा और यही कारण है कि वे हमेशा एक आदर्श कलाकार के रूप में याद किए जाएंगे।
पीएम मोदी से रहा खास संबंध
पंडित छन्नूलाल मिश्र का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी गहरा संबंध रहा। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पीएम मोदी वाराणसी से चुनाव लड़े, तब पंडित मिश्र उनके प्रस्तावक बने थे। उनकी संगीत और सामाजिक छवि ने हमेशा उन्हें समाज और राजनीति से जोड़कर रखा। संगीत जगत में उनके योगदान को देखते हुए साल 2010 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने भी उन्हें यश भारती सम्मान प्रदान किया।
बनारस घराने की विरासत
पंडित छन्नूलाल मिश्र ने अपने जीवन में न केवल शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाया, बल्कि नए कलाकारों को मार्गदर्शन और प्रेरणा भी दी। ठुमरी, दादरा, भजन और अन्य शास्त्रीय रचनाओं में उनकी प्रस्तुति हमेशा यादगार रही। बनारस घराने के इस दिग्गज ने संगीत की दुनिया में जो योगदान दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
उनकी आवाज अब इस दुनिया में नहीं गूंजेगी, लेकिन उनके सुर और संगीत का प्रभाव हमेशा जीवित रहेगा। बनारस घराने और भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में उनका नाम हमेशा अमर रहेगा।
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