क्या महंगा होने वाला है पान मसाला? सरकार लगा रही नया टैक्स, राष्ट्रीय सुरक्षा से सेहत तक क्यों है ये जरूरी?
Pan Masala Cess: देश में पान मसाला बनाने वाली कंपनियों पर अब एक नया टैक्स लगने जा रहा है। संसद ने 08 दिसंबर को 'हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025' को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद पान मसाला के यूनिट्स पर GST से अलग एक अतिरिक्त सेस वसूला जाएगा। यह सेस सीधे फैक्ट्री में लगी मशीनों की क्षमता यानी प्रोडक्शन कैपेसिटी के आधार पर तय होगा।
'हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025' को राज्यसभा ने संशोधनों के बिना ही लोकसभा को वापस भेज दिया, जहां यह 5 दिसंबर को पहले ही पारित हो चुका है। यह नया सेस GST के ऊपर अलग से लगाया जाएगा और इसकी गणना फैक्ट्रियों में लगी मशीनों की उत्पादन क्षमता के आधार पर की जाएगी। केंद्र सरकार का दावा है कि ये कदम राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने और पब्लिक हेल्थ के लिए जरूरी फंड जुटाने के लिए उठाया गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस बिल से जुड़ी हर जानकारी।

क्या है नया पान मसाला सेस और क्यों लगाया जा रहा है?
फिलहाल पान मसाला, तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों पर 28% GST लगता है, साथ ही अलग-अलग दरों पर कंपनसेशन सेस भी लिया जाता है। लेकिन कंपनसेशन सेस खत्म होने के बाद केवल GST से कुल टैक्स अधिकतम 40% तक ही जा सकता है। ऐसे में सरकार ने तय किया है कि पान मसाला पर एक नया सेस लगाया जाए, जो पूरी तरह से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए फंड जुटाएगा। यह नया सेस केवल पान मसाला पर लगाया जाएगा, जबकि तंबाकू पर पहले की तरह एक्साइज ड्यूटी जारी रहेगी।
GST में बदलाव क्या लाएगा?
पुरानी GST व्यवस्था में 'सिन गुड्स' पर GST + Compensation Cess दोनों मिलाकर कई बार टैक्स 88% तक पहुंच जाता था और 40% से कभी कम नहीं होता था। अब नई GST प्रणाली में कंपनसेशन सेस खत्म कर दिया गया है, जिससे टैक्स 40% पर कैप्ड हो गया है। इसलिए सरकार ने पान मसाला यूनिट्स पर नया सेस लाकर उस कमी को पूरा करने की कोशिश की है।
संसद में क्या बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण?
विमर्श का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि यह सेस किसी भी जरूरी उत्पाद पर नहीं बल्कि सिर्फ डिमेरिट गुड्स पर लगाया जा रहा है। उनके अनुसार यह राजस्व सीधे डिफेंस प्रिपेयर्डनेस और हेल्थ प्रोटेक्शन में इस्तेमाल होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जोर देकर कहा कि आज का युद्धक्षेत्र हाई-टेक हो चुका है। आधुनिक हथियार, ऑटोनॉमस मशीनें, स्पेस बेस्ड सिस्टम, साइबर ऑपरेशन और रियल-टाइम इंटेलिजेंस जैसे टूल्स में भारी पूंजी लगती है। इसलिए एक स्थायी, भरोसेमंद और मजबूत फंडिंग सिस्टम जरूरी है।
उन्होंने कहा, "टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है और सेना को हमेशा अपग्रेडेड रखना ही होगा। ऐसे में स्थिर राजस्व का स्रोत बहुत जरूरी है।"
डिफेंस को स्थिर फंडिंग क्यों जरूरी है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक सेना को हमेशा अपने हथियारों और तकनीक को अप-टू-डेट रखना पड़ता है। अगर फंडिंग रुकी तो तुरंत असर युद्ध क्षमता पर पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पहले कई मौकों पर देश के पास जरूरी उपकरण खरीदने तक के लिए पैसे नहीं थे।
उन्होंने पूर्व रक्षामंत्री ए के एंटनी के एक बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने संसद में कहा था- "मेरे पैसे नहीं हैं इसलिए मैं ये उपकरण नहीं खरीद सकता।"
सीतारमण ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान भी सैनिकों को बूट और गोला-बारूद जैसी बुनियादी चीजों की कमी का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा, "आज स्थिति अलग है। प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद रक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है। सेना को मजबूत रखने के लिए लगातार निवेश बढ़ाया गया है।"
पुरानी और नई GST व्यवस्था में क्या अंतर?
सीतारमण ने याद दिलाया कि पहले GST के साथ compensation cess मिलाकर 'डिमेरिट गुड्स' पर कुल टैक्स कई बार 88 प्रतिशत तक पहुंच जाता था और 40 प्रतिशत से कभी कम नहीं होता था।
नए GST ढांचे में compensation cess खत्म कर दिया गया है, इसलिए GST अब अधिकतम 40 प्रतिशत तक ही सीमित है। इसी अंतर को भरने के लिए सरकार ने पान मसाला यूनिट्स पर नया सेस प्रस्तावित किया है।
क्या राज्यों के रेवेन्यू पर असर पड़ेगा?
कई सांसदों ने चिंता जताई कि सेस से राज्यों की हिस्सेदारी कम होगी। इस पर वित्त मंत्री सीतारमण ने साफ कहा कि राज्यों को भी इस सेस में उनका हिस्सा मिलेगा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए बताया कि UPA सरकार के दस वर्षों में राज्यों को 18.54 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन NDA सरकार ने पिछले दस साल में 71 लाख करोड़ रुपये का टैक्स डिवोल्यूशन दिया है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2014 से पहले भी कई तरह के सेस लगाए जाते थे - जैसे रोड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्रूड ऑयल और आपदा राहत सेस।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2024-25 में 'रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस' से 12,000 करोड़ रुपये आए, जबकि राज्यों को 13,327 करोड़ जारी किए गए। उन्होंने कहा कि इसलिए यह कहना गलत है कि राज्यों का हिस्सा कम होगा।
क्या टैक्स बढ़ाने की शक्ति सरकार के पास अकेले है?
वित्त मंत्री सीतारमण ने स्पष्ट किया कि टैक्स दुगना करने या नए टैक्स लगाने की शक्ति सिर्फ आपात स्थितियों में और संसद की मंजूरी के बाद ही लागू होती है। नया सेस बिल भी पूरी तरह से पार्लियामेंटरी स्क्रूटनी के तहत बनाया गया है। उन्होंने कहा, "यहां कुछ भी मनमानी या मनमर्जी नहीं है। पूरा ढांचा संसद की अनुमति के साथ ही काम करेगा।"
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