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पाकिस्तान खोल सकता है पेशावर का हिंदू धर्मस्थल 'पंज तीरथ', जानिए ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व

नई दिल्ली- पाकिस्तान अपने देश में एक और ऐतिहासिक हिंदू मंदिर खोलने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि नए साल में कभी भी पेशावर के प्रसिद्ध 'पंज तीरथ' को खोले जाने की घोषणा हो सकती है, जिसे इसी साल की शुरुआत में उसने राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था। इससे पहले पाकिस्तान कई भारतीय धर्म स्थलों को पहले ही खोल चुका है। माना जा रहा है कि इन तीर्थ स्थलों को खोलकर एक ओर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि पर लगे दागों को तो मिटाने की कोशिश में लगा ही हुआ है, वह धार्मिक पर्यटन से अपने खाली खजाने को भरना भी चाहता है। लेकिन, इन सबके बीच 'पंज तीरथ' के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व पर गौर फरमाना तो बनता है।(पहली चार तस्वीरें सौजन्य: पाकिस्तान ट्रिब्यून)

पाकिस्तान जनवरी में खोलेगा प्रसिद्ध 'पंज तीरथ'

पाकिस्तान जनवरी में खोलेगा प्रसिद्ध 'पंज तीरथ'

पाकिस्तान के पेशावर में स्थित प्रसिद्ध 'पंज तीरथ' का पट देश के बंटवार के बाद से ही बंद पड़ा हुआ है। हिंदुओं की धार्मिक मान्यता के मुताबिक यह वो जगह है जहां पांडवों ने निर्वासन के दौरान निवास किया था। टीओआई के मुताबिक पाकिस्तान के विस्थापित संपत्ति ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन आमिर अहमद ने बताया है कि मंदिर की सफाई, विकास और उसके जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा था। उन्होंने कहा है कि, 'हम जनवरी में मंदिर का उद्घाटन कर देंगे। ' प्राचीन तीर्थस्थल 'पंज तीरथ' को पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत ने इसी साल जनवरी में राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था। वहां की सरकार ने इस ऐतिहासिक स्थल को किसी तरह का नुकसान पहुंचाने वालों पर 20 लाख रुपये जुर्माना और 5 साल की कैद की भी घोषणा कर रखी है।

क्या है 'पंज तीरथ' का धार्मिक महत्त्व?

क्या है 'पंज तीरथ' का धार्मिक महत्त्व?

यह स्थान 1747 में अफगान दुर्रानी वंश के शासनकाल के दौरान पूरी तरह तबाह कर दिया गया था। बाद में 1834 में सिख शासन काल में स्थानीय हिंदुओं ने इसकी फिर से मरम्मत करवाई और वहां फिर से यहां पूजा-अर्चना की शुरुआत हो गई थी। लेकिन, 1947 में भारत विभाजन के बाद से यह पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। 'पंज तीरथ' को वहां मौजूद पांच तालाबों की वजह से भी जाना जाता है। यहां पांच तालाबों के अलावा, एक मंदिर और खजूर के पेड़ों वाला एक बगीचा भी है। आज के समय ये ऐतिहासिक स्थल और पांचों तालाब चचा यूनुस पार्क और खैबर पख्तूनख्वा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की सीमा में आ गए हैं। हिंदू कार्तिक महीने में इन तालाबों में स्नान करने आते थे और दो दिनों तक खजूर के पेड़ों के नीचे पूजा-पाठ करते थे। हिंदुओं की मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां महाभारत काल में पांचों पांडवों ने माता कुंती और पत्नी द्रौपदी के साथ निर्वासन के दौरान निवास किया था। इस स्थान को पांडवों के पिता पांडु का स्थान भी माना जाता है।

'पंज तीरथ' को लेकर कुछ अलग मान्यताएं

'पंज तीरथ' को लेकर कुछ अलग मान्यताएं

ये भी कहा जाता है कि विभाजन से पहले इस स्थान पर एक नहीं पांच मंदिर थे और जिनमें पूजा से पहले हिंदू पांचों तालाब में स्नान करते थे। जानकारी के मुताबिक बाकी मंदिर देखरेख न होने से पूरी तरह बर्बाद हो गए। आर्कियोलॉजिस्ट एसएम जफर ने अपनी किताब एन इंट्रोडक्शन टू पेशावर में 1952 में लिखा है कि, 'पेशावर के आसपास के इलाकों में पंज तीरथ प्राचीन और दिलचस्प स्थानों में से है, जो बौद्ध काल से जुड़ा है। आर्कियोलॉजिस्ट मानते हैं कि पंज तीरथ बुद्ध की भिक्षा के कटोरे की निशानी है।' अंग्रेजी आर्कियोलॉजिस्ट सर अलेक्जेंडर कुनिंघम और फ्रेंच आर्कियोलॉजिस्ट अलफर्ड फाउचर ने भी ऐसे ही विचार व्यक्त किए हैं। लेकिन, तरीख-ए-पेशावर के लेखक मुंशी गोपाल दास ने 1874 में इसकी पहचान पांडु के पांच पुत्रों से की थी।

हाल में भारतीयों के लिए पांच तीर्थ स्थल खोल चुका है

हाल में भारतीयों के लिए पांच तीर्थ स्थल खोल चुका है

'पंज तीरथ' पाकिस्तान में हाल में खोला जाने वाला दूसरा हिंदू मंदिर होगा। पिछले अक्टूबर महीने में ही सियालकोट में हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए शिवाला तेजा सिंह मंदिर खोला गया था, जो करीब 1,000 वर्ष पुराना माना जाता है। ये मंदिर भी देश के बंटवारे के वक्त से ही बंद पड़ा हुआ था। हिंदू मंदिरों के अलावा पाकिस्तान ने हाल ही में सिखों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण करतारपुर कॉरिडोर भी खोला है। उससे पहले यूनेस्को के वर्ल्ड धरोहर रोहतास के किले के पास झेलम में गुरुद्वारा चोआ साहिब भी खोला गया था। जुलाई महीने में पाकिस्तान ने गुजरांवाला स्थित दूसरा ऐतिहासिक गुरुद्वारा खारा साहिब भी खोला था जो विभाजन के बाद से बंद था।

पाकिस्तान क्यों दिखा रहा है इतनी दरियादिली?

पाकिस्तान क्यों दिखा रहा है इतनी दरियादिली?

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बदहाल है और वह धार्मिक पर्यटन के जरिए अपने खजाने की भरपाई करने की कोशिश में जुटा हुआ है। करतारपुर कॉरिडोर के जरिए पाकिस्तान में दाखिल होने वाले तीर्थयात्रियों पर वह पहले से ही 20 डॉलर का सर्विस चार्ज वसूल रहा है और कॉम्पलेक्स में दाखिल होने के लिए पाकिस्तानी गैर-सिखों से 200 रुपये की फीस भी ले रहा है।

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