Pahalgam Attack: पाकिस्तान के साथ शांति समझौता आखिर क्यों संभव नहीं? बार-बार सबूतों को कर चुका है नजरअंदाज

Pahalgam Attack: भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापना एक दशक से अधिक समय से मानो एक सपना ही रहा है। भारत की ओर से कई बार बातचीत, विश्वास बहाली उपायों और राजनयिक पहलों के जरिए इस सपने को साकार करने की कोशिश की गई लेकिन हर कोशिश के जवाब में कोई न कोई बड़ा आतंकी हमला हुआ है। ऐसे में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी हुकूमत ने फिर से अंतरराष्ट्रीय जांच और शांति समझौता की बात कही है। पाकिस्तानी सरकार ने मांग है कि पहलगाम हमले की जांच में चीन और रूस को भी शामिल किया जाए।

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल उठता है कि पहलगाम हमले के बाद भी क्या पाकिस्तान से शांति समझौता संभव है? पाकिस्तान ने इतिहास में बार-बार भारत के आतंकी हमलों के सबूतों की अनदेखी की है, आतंक का समर्थन जारी रखता है तो क्या बातचीत की कोई गुंजाइश बचती है? एक्सपर्ट की मानें तो भारत इस बार पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की बातचीत और शांति समझौता के मूड में नहीं है। आइए समझने की कोशिश करते हैं आखिर पाकिस्तान के साथ शांति समझौत क्यों संभव नहीं है...? कब-कब पाकिस्तान ने आतंकी हमले के सबूतों को नजरअंदाज किया है?

Pahalgam Attack

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ बोले- हम हर तरह के जांच में हिस्सा लेने को तैयार हैं

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, "पहलगाम में हुई हालिया त्रासदी, भारत की ओर से निरंतर दोषारोपण के खेल का एक और उदाहरण है, जिसे पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए। एक जिम्मेदार देश के रूप में अपनी भूमिका को जारी रखते हुए, पाकिस्तान किसी भी तटस्थ, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच में भाग लेने के लिए तैयार है।"

पाक पीएम शहबाज शरीफ की यह पेशकश भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा करने के तीन दिन बाद आई है, जिसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना, अटारी बॉर्डर को बंद करना और राजनयिक संबंधों को कम करना शामिल है।

हालांकि पीएम शहबाज शरीफ के प्रस्ताव पर भारत सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। लेकिन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "पहले तो उन्होंने (पाकिस्तान) यह स्वीकार नहीं किया कि पहलगाम में कुछ हुआ था। फिर उन्होंने यह भी कहा कि यह भारत ने किया है। वे ही थे जिन्होंने सबसे पहले हम पर आरोप लगाया, इसलिए उनके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है।"

पहले भी कई मौकों पाकिस्तान कर चुका है जांच की पेशकेश

भारत ने समय-समय पर पाकिस्तान के साथ पहल की चर्चा की है, जैसे अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा (1999), मनमोहन सिंह का शांतिपूर्ण संवाद का प्रस्ताव, नरेंद्र मोदी की अचानक लाहौर यात्रा...भारत ने उरी, पुलवामा, पठानकोट जैसे कई बड़े आतंकी हमलों के बाद भी संयम दिखाया, हर बार उम्मीद की कि शायद बातचीत से रास्ता निकलेगा। भारत ने हमेशा दुनिया के सामने अपनी शांति और स्थिरता चाहने वाली छवि प्रस्तुत की है। लेकिन पाकिस्तान की ओर से हर शांति पहल के बाद एक आंतकी हमला हुआ। पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन को खुलेआम सपोर्ट करता रहा है।

चाहे 26/11 मुंबई हमले के सबूत हों या पठानकोट हमले के, पाकिस्तान हर बार सबूतों को खारिज करता रहा है या प्रक्रिया को लटकाता रहा है। पाकिस्तान ने हमेशा ड्यूल पॉलिसी अपनाई है, एक ओर शांति वार्ता की बातें, दूसरी ओर सीमा पार से आतंकियों को भेजने का सिलसिला जारी रखना।

2016 में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा पठानकोट वायुसेना अड्डे पर किए गए हमले के बाद, जिसमें आठ लोग मारे गए थे, पाकिस्तान ने 27 से 31 मार्च, 2016 तक भारत में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के सदस्यों सहित एक संयुक्त जांच दल भेजा था। उनका मिशन सबूत इकट्ठा करना, उनकी समीक्षा करना और उनका दस्तावेजीकरण करना और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ मिलकर प्रमुख गवाहों और पीड़ितों से पूछताछ करना था। हालांकि इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

Take a Poll

आतंकी हमलों को लेकर दिए गए सबूतों को पाकिस्तान ने कब-कब नजरअंदाज किया?

🔴 1. Mumbai attack: मुंबई आतंकी हमला, नवंबर 2008

मुंबई 26/11 आतंकी हमले के बाद भारत ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद और उसके अन्य आकाओं के खिलाफ सबूतों से युक्त डोजियर पाकिस्तान को सौंपे थे। पाकिस्तान के एक न्यायिक पैनल को भी भारत आने की अनुमति दी गई। हालांकि, इसने अपराधियों के खिलाफ कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। सईद को पिछले एक दशक में कई बार हिरासत में लिया गया और रिहा किया गया है।

🔴 2. Pathankot attack: पठानकोट हमला, जनवरी 2016

पाकिस्तान की संयुक्त जांच टीम को एयरबेस का दौरा करने और भारतीय जांचकर्ताओं से सबूत इकट्ठा करने की अनुमति दी गई थी। यह तय हुआ था कि एनआईए की एक टीम पाकिस्तान का दौरा करेगी, लेकिन इस्लामाबाद ने पारस्परिकता की शर्तों का उल्लंघन किया और भारत के साथ कोई सबूत साझा नहीं किया।

🔴 3. Uri attack: उरी हमला, सितंबर 2016

आतंकवादियों के डीएनए सैंपल के डिटेल के साथ पाकिस्तान को एक अनुरोध पत्र (एलआर) या न्यायिक अनुरोध भेजा गया था। लेकिन फिर भी पाकिस्तान सबूतों पर कार्रवाई करने में विफल रहा।

🔴 4. Pulwama attack: पुलवामा हमला, फरवरी 2019

एनआईए ने चार पाक-आधारित अपराधियों और हमले को अंजाम देने के लिए भारत आए तीन पाकिस्तानियों के बारे में जानकारी मांगने के लिए एक एलआर भेजा। पाकिस्तान ने कोई भी विवरण साझा नहीं किया और इसके बजाय खुद को आतंकवाद से पीड़ित के रूप में पेश किया।

क्यों पाकिस्तान के साथ शांति समझौता संभव नहीं?

▶️ विश्वास का भारी संकट: बिना भरोसे के कोई भी दीर्घकालिक शांति संभव नहीं है। जिस तरह पाकिस्तान ने पहले सबूतों की अनदेखी की है,..ऐसे में इस बार भारत उनपर विश्वास नहीं करेगा।

▶️ पाकिस्तानी सेना की भूमिका: पाकिस्तान में असली सत्ता सेना और ISI के हाथ में है, जो भारत विरोधी नीति पर अडिग हैं।

▶️ आंतरिक अस्थिरता: पाकिस्तान खुद आर्थिक और राजनीतिक संकटों में घिरा है, शांति से ज्यादा उसे आंतरिक संतुलन की चिंता है। ऐसे में वह सिर्फ भारत की कार्रवाई से बचने के लिए शांति और जांच की मांग कर रहा है।

▶️ आतंकी ढांचा खत्म नहीं: जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से आतंकी नेटवर्क पूरी तरह नहीं हटाता, भारत के लिए शांति समझौता करना खतरे से खाली नहीं है।

पहलगाम हमले जैसे कृत्य सिर्फ इंसानों की जान नहीं लेते बल्कि भरोसे को भी तार-तार कर देते हैं। ऐसे हमले समाज में भय पैदा करने और एकता को बिगाड़ने के लिए किए जाते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+