Pahalgam attack: मोदी सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के सभी मौजूदा वीजा किए रद्द, जानें किसे छूट?
Pahalgam attack: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत की मोदी सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए लगभग सभी वीज़ा श्रेणियों को रद्द करने का फैसला किया है। हालांकि केंद्र सरकार ने केवल दीर्घकालिक, राजनयिक और आधिकारिक वीज़ा के लिए वैधता बरकरार रखी है।
मोदी सरकार ने ये कठोर कदम 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मद्देनजर उठाया है। सरकार का ये फैसला 27 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगा। हालांकि गृह मंत्रालय ने घोषणा की कि पाकिस्तानी नागरिकों के लिए मेडिकल वीज़ा वैध रहेगा, लेकिन वे भी केवल 29 अप्रैल, 2025 तक ही वैध रहेंगे।

गृह मंत्रालय ने ये बड़ा फैसला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई जघन्य आतंकी घटना के बाद लिया गया, जिसमें 26 बेगुनाह पर्यटकों की जान चली गई। इस भयावह घटना के बाद देश भर में सख्त कार्रवाई की मांग की गई। जवाब में, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस बुलाई, जिसमें नए वीजा नियमों का तत्काल अनुपालन करने का आग्रह किया गया।
अमित शाह ने पाक नागरिकों को लेकर दिया ये निर्देश
इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर संपर्क करके सक्रिय कदम उठाए और उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की तुरंत पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने का निर्देश दिया।
27 अप्रैल से सभी वैध वीजा रद्द हो जाएंगे
वहीं विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, वीजा रद्द करने के अलावा, भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को भी निलंबित कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने पहले घोषणा की थी कि 27 अप्रैल से पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सभी वैध वीजा रद्द कर दिए जाएंगे, जिसमें 29 अप्रैल तक मेडिकल वीजा अपवाद होगा।
विदेश मंत्रालय ने हिंदू नागरिकों को लेकर क्या कहा?
इन प्रतिबंधों के बावजूद, विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि पाकिस्तान के हिंदू नागरिकों को पहले से दिए गए दीर्घकालिक वीजा प्रभावित नहीं होंगे। इसके अलावा, भारत में वर्तमान में मौजूद सभी पाकिस्तानी नागरिकों को नए संशोधित नियमों के अनुसार अपने वीजा की अवधि समाप्त होने से पहले देश छोड़ना अनिवार्य है।
बता दें गृह मंत्रालय द्वारा पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद एक महत्वपूर्ण बैठक की थी। इसमें गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो (आईबी) के निदेशक तपन डेका और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख रवि सिन्हा मौजूद थे। इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य पहलगाम शहर के पास हुए हमले पर विचार-विमर्श करना था, जो पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में नागरिकों पर सबसे घातक हमलों में से एक था।
भारत ने पहलगाव अटैक के बाद उठाए ये सख्त कदम
देश ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, द्विपक्षीय संबंधों को कमतर कर दिया और इस्लामाबाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के तौर पर अटारी चेकपॉइंट को बंद कर दिया।
अधिकारियों ने हमले के लिए जिम्मेदार पांच आतंकवादियों की पहचान की, जिनमें तीन पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं, और उन्हें पकड़ने में मदद के लिए उनके स्केच जारी किए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जांच की जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद है, और पूरी जांच के लिए पहले से ही योजनाएं चल रही हैं।
एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की सहायता करते हुए एक उप महानिरीक्षक के नेतृत्व में एक टीम को हमले के स्थल बैसरन भेजा। इस हमले के बाद अधिकारियों ने हेलीकॉप्टरों का उपयोग करके घायल व्यक्तियों को निकालने में मदद की, जिससे स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश पड़ा।












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