#PadmaavatRow: हाथ से निकलेगा राजस्‍थान? मोदी-शाह को होंगे ये 2 नुकसान

नई दिल्‍ली। पद्मावत में राजपूतों की आन बान शान के साथ खिलवाड़ हुआ है या नहीं? यह सवाल, अब सवाल नहीं बवाल का रूप ले चुका है। लोकतंत्र में हर किसी को सवाल पूछने का हक है। विरोध करने का भी है, लेकिन क्‍या एक फिल्म के विरोध के लिए बच्‍चों की स्‍कूल बस पर पत्‍थरबाजी की जा सकती है? फिल्म दिखाने वाले मल्‍टीप्‍लेक्‍सों में तोड़फोड़ हो रही है और जिन मल्‍टीप्‍लेक्‍स मालिकों ने यह लिख रखा है कि 'यहां पद्मावत नहीं दिखाई जा रही है', उनके यहां भी तोड़फोड़ हो रही है। कुछ महीने पहले संजय लीला भंसाली को यह कहकर पीटा गया था कि पद्मावत की शूटिंग में खिलजी और पद्मावती के बीच ड्रीम सीक्‍वेंस पिक्‍चराइज किया जा रहा था, लेकिन फिल्म में ऐसा कोई सीन है ही नहीं। भारतीय परंपरा वाले परिधान में किसी को दीपिका का पेट दिखाई दिया, उसे भी ढंक दिया गया, इसके बाद भी बवाल जारी है। आखिर क्‍यों? करणी सेना पर केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी के नेतृत्‍व वाली राज्‍य सरकारें चुप क्‍यों हैं? क्‍या इस चुप्‍पी से उन्‍हें फायदा होगा? या उल्‍टा पड़ जाएगा भीड़तंत्र के सामने हथियार डालने का बीजेपी सरकारों का दांव? आइए समझते हैं पद्मावत से जुड़ा ये पूरा गणित।

पीएम मोदी के न्‍यू इंडिया की छवि पर पलीता लगा रही करणी सेना

पीएम मोदी के न्‍यू इंडिया की छवि पर पलीता लगा रही करणी सेना

पीएम नरेंद्र मोदी हाल में दावोस से लौटे हैं। वहां उन्‍होंने बताया कि कैसे भारत रेड टेप से रेड कारपेट कल्‍चर की ओर बढ़ रहा है। उन्‍होंने दुनिया को न्‍योता दिया कि वे भारत आएं, शांति, समृद्धि और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भारत आएं। प्रधानमंत्री की बात में दम था, उनकी बात को दुनिया ने गंभीरता से लिया भी, लेकिन क्‍या किसी भी देश का नागरिक ऐसे देश में आना चाहेगा, जहां पर बिना बात के लोग नंगी तलवारें लेकर सड़कों पर घूम रहे हों। वे मासूम बच्‍चों पर हमले कर रहे हैं, मल्‍टरप्‍लेक्‍स, हाईवे तोड़ रहे हैं। क्‍या इस अराजकता भरे माहौल से तालिबानियत की बू नहीं आ रही है? अगर ऐसे ही माहौल में निवेश करना किसी को पसंद होगा तो वह भारत को क्‍यों आएगा? उसे तो पाकिस्‍तान के कबाइली इलाकों, अफगानिस्‍तान, ईराक, यमन या सीरिया चला जाना चाहिए, क्‍योंकि इन देशों में हमारे यहां से ज्‍यादा बुरा माहौल है। क्‍या करण सेना जैसे संगठनों की अनदेखी कर मोदी सरकार विदेशी निवेशकों को अच्‍छा संकेत दे रही है? क्‍या इससे उन्‍हें डर नहीं लगेगा? निश्चित तौर पर वे डरेंगे। कोई भी डरेगा।

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    वोटबैंक का डर छीन ले जाएगा राजस्‍थान की सत्‍ता

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    वोटबैंक खो जाने के डर से बीजेपी के नेतृत्‍व वाली हरियाणा, राजस्‍थान और गुजरात सरकारों ने खुलकर करणी सेना का समर्थन कर डाला। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जाकर कहानी उल्‍टी पड़ गई और पद्मावत आखिरकार रिलीज हो गई। अब कोई बीजेपी का रणनीतिकार बताए कि पद्मावत तो रिलीज हो गई है। जिस राजपूत वोटबैंक को बचाने के लिए बीजेपी करणी सेना के समर्थन में आई थी, वो अब और भड़क गई। ऐसे में बीजेपी से उसकी नाराजगी तो पहले से 200 गुना और बढ़ गई है। इससे तो बेहतर होता कि करणी सेना को पहले से कानून का डर दिखाया गया होता तो नौबत आज यहां तक नहीं पहुंच पाती। अब राजस्‍थान के राजपूत बेहद नाराज हैं। वसुंधरा राजे सिंधिया जब इससे पहले राजस्‍थान की सीएम बनी थीं, उस वक्‍त भी गुर्जर आंदोलन के चलते हिंसा भड़क गई थी और आखिर में वसुंधरा को चुनाव में कीमत चुकानी पड़ी थी। राजपूत जिस तरह से इस बार भड़के हैं, उससे तो लगता है कि इस बार भी वसुंधरा सरकार ने खुद को खतरे में डाल लिया है। इस साल के अंत में राजस्‍थान में चुनाव होने हैं, देखना होगा कि चुनाव में पद्मावत का कितना साइड इफेक्‍ट देखने को मिलने वाला है।

    लगातार खराब होता जा रहा है बीजेपी का ट्रैक रिकॉर्ड

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    यह पहली बार नहीं है, जब बीजेपी सरकार के कार्यकाल में इस प्रकार का उपद्रव भड़का हो। हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के आने के बाद जाट आरक्षण को लेकर ऐसा आंदोलन भड़का कि पूरा देश कांप गया। आंदोलन में करीब 20,000 करोड़ की संपत्ति स्‍वाहा हो गई। इसके बाद हरियाणा में ही राम रहीम की गिरफ्तारी के लेकर ऐसा हंगामा मचा कि पाकिस्‍तान से लेकर चीन तक के मीडिया ने बवाल की तस्‍वीरें छापीं और अब पद्मावत को लेकर कई महीनों से बवाल मचा हुआ है। ये तीनों घटनाएं विदेशी मीडिया ने बराबर कवर की हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को यह सोचना होगा कि अगर इसी तरह से जरा सी चिंगारी से आग लगती रही तो भारत 'बेस्‍ट डेस्टिनेशन' वाली छवि का क्‍या होगा?

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