पद्मश्री हलधर नाग स्‍कूल नहीं गए लेकिन उनके नाम पर हैं थिसिस

नई दिल्‍ली। पिछले दिनों राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान पदमश्री और पदमभूषण से कुछ हस्तियों को नवाजा।

इन्‍हीं हस्तियों में से एक थे ओडिशा के कवि 66 वर्षीय हलधर नाग जिनके बारे में न तो ज्‍यादा टीवी पर आया और न ही आपको सोशल मीडिया पर ज्‍यादा कुछ पढ़ने को मिला।

उड़‍िया कवि हलधर नाग के बारे में जब आप जानेंगे तो उनसे प्रेरणा लेने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। हलधर नाग एक गरीब परिवार से आते हैं और उन्‍होंने तीसरी कक्षा में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।

वह मुश्किल से स्‍कूल गए लेकिन आप यकीन नहीं करेंगे कि वह आज पीएचडी करने वाले छात्रों के सबजेक्‍ट की लिस्‍ट में हमेशा शामिल रहते हैं।

उनके नाम पर पांच थिसिस दर्ज हैं और जल्‍द ही वह ओड़‍िशा स्थित संबलपुर यूनिवर्सिटी के सेलेबस का हिस्‍सा होंगे। एक नजर डालिए कौन हैं कवि हलधर है और कैसी रही है उनकी अब तक जिंदगी।

याद है अपनी हर कविता

याद है अपनी हर कविता

हलधर नाग कोस्‍ली भाषा के कवि हैं और उन्‍हें अपनी हर कविता याद है। उन्‍होंने 20 रचनाएं लिखीं हैं और यह 20 भी उन्‍हें जुबानी याद हैं। नाग अपनी कविताओं को याद रखने के लिए रोजाना तीन से चार प्रोग्राम में शिरकत करते हैं।

 10 वर्ष की उम्र में खो दिया पिता को

10 वर्ष की उम्र में खो दिया पिता को

नाग का जन्‍म ओड़‍िशा बाड़गढ़ जिले के घेंस गांव में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। वह तीसरी कक्षा के बाद आगे पढ़ार्इी नहीं कर पाए थे। जब वह 10 वर्ष के थे उनके पिता का देहांत हो गया और उन्‍होंने स्‍कूल छोड़ दिया था।

स्‍कूल में 16 वर्ष तक कुक

स्‍कूल में 16 वर्ष तक कुक

दो वर्ष बाद एक गांव के प्रमुख उन्‍हें हाईस्‍कूल ले गए लेकिन यहां पर उन्‍होंने पढ़ाई नहीं की बल्कि एक कुक के तौर पर काम किया। 16 वर्षों तक वह यहां पर कुक के तौर पर रहे। धीरे-धीरे उस इलाके में कई स्‍कूल आने लगे। फिर हलधर नाग ने बैंक से 1,000 रुपए लोन लेकर स्‍कूली बच्‍चों के लिए स्‍टेशनरी और खाने-पीने के दूसरे सामानों वाली एक छोटी दुकान खोल ली।

वर्ष 1990 में आई पहली कविता

वर्ष 1990 में आई पहली कविता

नाग ने अपनी पहली कविता 'धोडो बारगाछ' वर्ष 1990 में लिखी थी। इसका मतलब होता है बरगद का बूढ़ा पेड़ और इसे एक लोकल मैगजीन में जगह मिली थी। इसके बाद उन्‍होंने अपनी चार कविताओं को पब्लिश होने के लिए भेजा।उन्‍होंने गांव वालों को अपनी कविताएं सुनाना शुरू किया जिससे वह उन्‍हें याद रख सकें और गांववाले भी बड़े प्‍यार से उनकी कविताएं सुनते थे।

नंगे पैर रहते हैं नाग

नंगे पैर रहते हैं नाग

नाग ने आज तक कोई फुटवियर नहीं पहना और आप उन्‍हें हमेशा एक सफेद धोती और एक बनियान में देंखेगे।

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