पी चिदंबरम की बेल आउट क्लब में एंट्री, जानिए क्लब के अन्य सदस्य कौन हैं?
बेंगलुरू। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम कांग्रेस के सातवें ऐसे शीर्ष नेता हो गए हैं, जो ऑउट ऑन बेल क्लब में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरने वाले पी चिदंबरम अकेले नेता नहीं हैं। कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी नेशनल हेराल्ड केस में ऑउट ऑन बेल चल रहे हैं।

भ्रष्टाचार के मामलों को देखें तो दिल्ली से लेकर हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक के बड़े कांग्रेस नेता सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियों के निशाने पर हैं। हालांकि कांग्रेस आलाकमान अपने नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को मोदी सरकार राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई ठहराकर पल्ला झाड़ ले रही है।

बुधवार, 4 दिसंबर कुल 106 दिनों बाद जमानत पर जेल से बाहर पी चिदंबरम को बेल देते समय सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि कोर्ट का आदेश जमानत को लेकर है और इसका उनके ऊपर चल रहे केस पर न समझा जाए। कोर्ट के मुताबिक चिदंबरम के केस के तथ्यों का विश्लेषण सुनवाई के दौरान होगा, जहां अगर वो दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सजा दी जाएगी।
इससे यह तय है कि जल्द पी. चिदबंरम की तिहाड़ जेल में दोबारा जल्द तय है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हालांकि आर्थिक अपराध गंभीर किस्म के होते हैं, लेकिन जमानत संबंधी बुनियादी न्याय शास्त्र वही है कि आरोपी को जमानत देना नियम है और इससे इंकार अपवाद है।

गौरतलब है आईएनएक्स मीडिया मामले में पी. चिदंबरम को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति आर. भानुमति की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि कांग्रेस नेता आईएनएक्स मीडिया मामले के बारे में कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे और साथ ही मामले में गवाहों को डराने का कोई प्रयास नहीं करेंगे, लेकिन कोर्ट की हिदायत के बाद चिदंबरम न केवल प्रेस कांफ्रेस करते हैं बल्कि राजनीतिक बयान देने से भी नहीं कतराए।
चिदंबरम द्वारा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ किये जाने की संभावना से इंकार नहीं किए जाने संबंधी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दलील दी थी, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। यही कारण है कि जेल में बंद आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले की सरकारी गवाह इंद्राणी मुखर्जी की जान की जोखिम का खतरा बढ़ गया, जिनकी गवाही से पी. चिदंबरम घिर गए हैं।

सीबीआई ने चिदंबरम के खिलाफ आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 15 मई 2017 को केस दर्ज किया था। आरोप है कि 2007 में आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेशों से मिली 305 करोड़ रुपए की फंडिंग के दौरान विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड से क्लीयरेंस में अनियमितताएं बरती गईं। उस समय चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे। ईडी ने इसके बाद काला धन सफेद करने के आरोप में केस दर्ज किया था।
पिछले कई वर्षों से मामले में जमानत लेकर जेल जाने से बच रहे चिदंबरम को अंततः 21 अगस्त को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और तभी से चिदंबरम हिरासत में थे। हालांकि उससे पूर्व 16 अक्तूबर को ईडी ने उन्हें काला धन सफेद करने के मामले में गिरफ्तार किया था और उसके 6 दिन बाद 22 अक्तूबर को सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी।

बुधवार को तिहाड़ जेल से बाहर आए पूर्व वित्त मंत्री के पुत्र कार्ति चिदंबरम ने चुनौती दिया है कि अगर भाजपा के पास साक्ष्य हैं तो इसे कोर्ट को प्रस्तुत करें या हमारे सामने रखें, उन्हें सीलबंद रखने का नाटक न करे। वो कोर्ट ट्रायल के लिए तैयार हैं। फिलहाल, पी. चिदंबरम के जमानत पर बाहर आने के बाद कांग्रेस ने राहत की सांस ली है।
नेशनल हेराल्ड केस में खुद जमानत पर बाहर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि चिदंबरम को 106 दिन जेल में रखना बदला लेने और दंड देने जैसा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए राहुल गांधी ने कहा है कि उन्हें विश्वास है कि निष्पक्ष सुनवाई में चिदंबरम अपने को निर्दोष साबित कर पाएंगे।

उधर, चिदंबरम के बेल पर आउट होने पर कांग्रेसी नेताओं की प्रतिक्रियाओं पर भाजपा ने चुटकी ली है और उनकी प्रतिक्रिया को'भ्रष्टाचार का उत्सव' बताया है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा अंतत: चिदंबरम भी ओओबीसी (आउट ऑन बेल क्लब) में शामिल हो गए। इस क्लब में कांग्रेस अंतिरम अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा, मोतीलाल वोरा, भूपिंदर हुड्डा, शशि थरूर जैसे शीर्ष नेता शामिल हैं।

सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में दिल्ली हाईकोर्ट से मिली बेल पर बाहर हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पति और गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वाड्रा लैंड डील केस में जमानत पर बाहर हैं। वहीं, मोतीलाल वोरा और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा भी नेशनल हेराल्ड केस में बेल पर बाहर है जबकि शशि थरूर पत्नी सुनंदा पुष्कर हत्याकांड केस में जमानत पर बाहर हैं।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि भाजपा पी चिदंबरम या किसी अन्य के खिलाफ बदले की भावना से काम नहीं कर रही है। गडकरी ने उल्टा आरोप लगाया कि यह पी चिदंबरम ही थे, जिन्होंने अतीत में यूपीए सरकार के दौरान गुजरात के तबके मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ ही उन्हें भी फर्जी मामलों में फंसाने की कोशिश की थी, लेकिन सभी निर्दोष साबित हुए थे।

नितिन गडकरी ने बताया कि पी चिदंबरम के खिलाफ धन शोधन के मामलों में पर्याप्त सबूत हैं और उनसे पूछताछ भी हुई है। मामला विचाराधीन है और अब अदालत ही फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि चिदंबरम को जमानत मिलने से यह नहीं साबित होता कि वह निर्दोष हैं। उनके खिलाफ जो मामले हैं उनमें कानून की प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई हुई है।
उल्लेखनीय है पूर्व वित्त मंत्री पी चिंदबरम पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे कार्ती के कारोबार में मदद करने और आईएनएक्स मीडया को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी के बदले विदेशों में भुगतान करने को कहा था। आईएनएक्स मीडिया की प्रवर्तक इंद्राणी मुखर्जी ने यह बात कंपनी से संबंधित मनी लांड्रिंग और भ्रष्टाचार मामले की जांच कर रहे जांचकर्ताओं को बतायी थी, जिसके बाद से पी चिदंबरम की मुश्किल बढ़ गई है।

मुखर्जी ने मनी लांड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत अपना यह बयान रिकार्ड कराया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनके पति पीटर मुखर्जी ने चिदंबरम से दिल्ली के नार्थ ब्लाक स्थित उनके दफ्तर में मुलाकात की थी। नार्थ ब्लाक में ही वित्त मंत्रालय का कार्यालय है।
इंद्राणी मुखर्जी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष दिये अपने बयान में कहा था कि पीटर ने पी चिदंबरम से बातचीत शुरू की और एफडीआई लाने के लिये आईएनएक्स मीडिया के आवेदन का जिक्र किया। उन्होंने आवेदन की प्रति चिदंबरम को दी थी। उन्होंने बताया था कि मुद्दे को समझने के बाद पी चिदंबरम ने पीटर से उनके बेटे कार्ती के कारोबार में मदद करने और एफआईपीबी मंजूरी के बदले विदेशों में धन भेजने को कहा था।

मालूम हो, इंद्राणी मुखर्जी आईएनएक्स मीडिया समूह की प्रवर्तक थीं, जिन पर अपनी बेटी शीना बोरा की कथित तौर पर हत्या करने का आरोप है। उन्होंने बयान में कहा कि 2008 में जब उन्हें पता चला कि एफआईपीबी मंजूरी के आवेदन में कथित तौर पर कुछ अनियिमितताएं हुई है, तब पीटर ने निर्णय किया कि उन्हें इन मसलों के समाधान को लेकर पी चिदंबरम से मिलना चाहिए।
दरअसल, 4 जुलाई को दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में इंद्राणी मुखर्जी को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी थी। मामले में आरोपी पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि वर्ष 2007 में वित्त मंत्री रहते हुए आईएनएक्स मीडिया को विदेश से 305 करोड़ रुपये स्वीकार करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की ओर से दी गई मंजूरी में कथित अनियमितताओं की गई।

चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया की पूर्व मालिक और अब सरकारी गवाह बन चुकीं इंद्राणी बनर्जी के बयान के आधार पर गिरफ्तारी हुई थी। जब उनसे चिदंबरम की गिरफ्तारी को लेकर पूछा गया तो मुखर्जी ने कहा, यह अच्छी खबर है कि चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया है। इंद्राणी ने मुंबई सत्र अदालत में कहा कि उनकी (चिदंबरम की) गिरफ्तारी एक अच्छी खबर है, क्योंकि वह अब चारों ओर से घिर गए हैं।
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ये रहे वो शीर्ष कांग्रेसी नेता, जो जमानत पर बाहर हैं-

नेशनल हेराल्ड केस में बेल पर बाहर हैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी
वर्ष 2011 में नेशनल हेरल्ड केस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता फंसे हैं। आरोप है कि कांग्रेस के पैसे से 1938 में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी खड़ी की गई, जो नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और क़ौमी आवाज़. नामक तीन अखबारों का संचालन करती थी। एक अप्रैल 2008 को सभी अखबार बंद हो गए. इसके बाद कांग्रेस ने 26 फरवरी 2011 को इसकी 90 करोड़ रुपए की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। मतलब पार्टी ने इसे 90 करोड़ का लोन दे दिया। इसके बाद 5 लाख रुपए से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। बाद में घालमेल कर यंग इंडियन के कब्जे में एजेएल कंपनी को कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया। यानी 'यंग इंडियन' को एक प्रकार से मुफ्त में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी का मालिकाना हक मिल गया। बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 16 सौ करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया।

INX मीडिया समूह भ्रष्टाचार केस में बेल पर बाहर है कार्ति चिदंबरम
आईएनएक्स मीडिया समूह भ्रष्टाचार मामले में आरोपी पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को दिल्ली हाई कोर्ट ने मार्च 2018 में जमानत दी थी। सीबीआई ने मई, 2017 को तमिलनाडु के शिवगंगा से सासंद कार्ति चिदंबरम के खिलाफ प्राथिमिकी दर्ज की थी, जिसमें आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश हासिल करने के लिए अवैध तरीके से एफआईपीबी मंजूरी दिए जाने का आरोप लगाया गया था। उस वक्त चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे। इसके बाद ईडी ने भी कंपनी के संस्थापक पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी समेत अन्य के खिलाफ धन शोधन कानून के तहत मामला दर्ज किया था। कार्ति को फरवरी, 2018 को सीबीई ने ब्रिटेन से उनके लौटने के बाद गिरफ्तार किया था।

हेलिकॉप्टर घोटाले में बेल पर बाहर हैं अहमद पटेल और कमलनाथ का भांजा
वर्ष 2013 में अगस्ता वेस्टलैंड वीआइपी हेलीकॉप्टर खरीद घोटाला सामने आया। कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इतालवी चॉपर कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से कमीशन लेने के आरोपों की सीबीआई आदि केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी भी फंसे हैं। अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में जारी गैर जमानती वारंट रद्द करने की अर्जी को राउज एवेन्यू कोर्ट नामंजूर कर चुका है।

एंबुलेस घोटाले में बेल पर बाहर हैं अशोक गहलोत और सचिन पायलट
यह मामला 2010 से लेकर 2013 तक एनआरएचएम के तहत एंबुलेंस खरीदने में हुई धांधली का है। एंबुलेंस खरीदने के लिए जो टेंडर जारी किया गया, उसमें गड़बड़ी की गई थी। इस मामले में 31 जुलाई 2014 को जयपुर के अशोक नगर थाना पुलिस ने जयपुर नगर निगम के पूर्व मेयर पंकज जोशी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। राजे सरकार के अनुरोध पर मामला सीआईडी को सौंप दिया गया था। करोड़ों की एंबुलेंस खरीद में पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ति चिदम्बरम, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ए.ए खान, श्वेता मंगल, शफी माथेर और निदेशक एन आर एच एम के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471, और 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। ईडी अब तक 12 करोड़ की संपत्तियां आरोपियों से जब्त कर चुकी है।

आय से अधिक संपत्ति मामले में बेल पर बाहर हैं डीके शिवकुमार
कर्नाटक में कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति दर्ज करने का मामला चल रहा है। वर्ष 2017 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने डीके शिवकुमार के 64 ठिकानों पर जबर्दस्त छापेमारी की थी। डी. शिवकुमार पर यह कार्रवाई टैक्स चोरी की शिकायतों पर हुई थी। उस दौरान हालांकि डीके शिवकुमार व अन्य कांग्रेस नेताओं ने राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।

आय से अधिक संपत्ति मामले में बेल पर बाहर हैं वीरभद्र सिंह
सीबीआई ने हिमाचल प्रदेस के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया था। इस संबंध में सीबाआई ने शिमला में उनके आवास सहित कई स्थानों पर छापेमारी की जा चुकी है। जांच एजेंसी सिंह और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक 6.1 करोड़ रुपए की कथित संपत्ति अर्जि करने के आरोप की जांच कर रही है।

विधायकों घूस देने की पेशकश मामले में बेल पर बाहर हैं हरीश रावत
उत्तराखंड के दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी सीबीआई जांच की जद में हैं। उनके खिलाफ अप्रैल 2016 में सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले बागी विधायकों को समर्थन के लिए घूस की पेशकश करने का आरोप है।

1, 417 एकड़ भूमि अधिग्रहण मामले में बेल पर बाहर हैं भूपिंदर हुड्डा
सीबीआई हरियाणा के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ भी गुरुग्राम में जमीन सौदे के मामले में जांच चल रही है। इस संबंध में सीबीआई दिल्ली-एनसीपी में 20 स्थानों पर छापेमारी की थी। हुड्डा पर आरोप है कि तत्कालीनी हरियाणा सरकार की तरफ से 2009 में गुरूग्राम में किए गए 1, 417 एकड़ जमीन के अधिग्रहण में जबरदस्त गड़बड़िया की गईं थी। इसके बाद हुड्डा के खिलाफ भूमि आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं केो लेकर मामला दर्ज किया गया।

भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी केस में बेल पर बाहर हैं जगदीश टाइटलर
वरिष्ठ कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर भी भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में किसी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए निचली अदालत को एक साल के अंदर ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया है। मामला वर्ष 2009 का है। दरअसल टाइटलर पर आरोप है कि उन्होंने बिजनेसमैन अभिषेक वर्मा के साथ मिलकर तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अजय माकन के फर्जी लेटर हेड का इस्तेमाल कर तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर एक चीनी टेलीकॉम कंपनी के अफसरों को वीजा के नियमों में छूट देने की सिफारिश की थी। टाइटलर और वर्मा के खिलाफ फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र सहित भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं के तहत चल रहे केस में आरोप तय हो चुके हैं।
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