प्रधानमंत्री के आंसुओं से नहीं, ऑक्सीजन से बचाई जा सकती है कोविड मरीजों की जान: राहुल गांधी
नई दिल्ली, 22 जून। कोरोना वायरस की दूसरी लहर में लाखों लोग संक्रमित हुए और कईयों की मौत हुई। पहली लहर की तुलना में कोविड की दूसरी वेव ने देश पर भयानक कहर ढाया। इस दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और दवाइयों की कमी से हाहाकार मच गया। कोरोना वायरस की इस भयानक लहर में हुई मौतों को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान हुई 90% मौतें में मरीजों को बचाया जा सकता था।

मंगलवार के कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। श्वेत पत्र जारी करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कोविड की दूसरी लहर में 90 फीसदी लोगों ने ऑक्सीजन और दवाओं की कमी के चलते दम तोड़ दिया। अगर इन जरूरी मेडिकल किट की कमी ना होती तो उन्हें बचाया जा सकता था। सरकार को अब तीसरी लहर की तैयारी करनी चाहिए। उन्हें स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार करना चाहिए और लोगों का युद्ध स्तर पर टीकाकरण किया जाना चाहिए ताकि वायरस को पैदा होने का मौका ही ना मिले।
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देश के नाम संबोधन के दौरान पीएम मोदी के भावुक होने पर कटाक्ष करते हुए राहुल गांधी ने कहा, प्रधानमंत्री के आंसू उन लोगों के आंसू नहीं पोछ सकते जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। प्रधानमंत्री के आंसुओं ने उनकी जान तो नहीं बचाई लेकिन ऑक्सीजन ने शायद उन्हें बचा सकती थी। प्रधानमंत्री ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वह बंगाल में चुनाव लड़ने में व्यस्त थे और उनका ध्यान दूसरी दिशा में था। राहुल गांधी ने जोर देते हुए कहा कि श्वेत पत्र का उद्देश्य सरकार पर उंगली उठाना नहीं है बल्कि प्रतिक्रिया के लिए खाका तैयार करके तीसरी लहर से निपटने में मदद करना है।












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