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'हेलमेट मैन' ने बांटे 56 हजार से अधिक Helmet, दूसरों को बचाया गम से, अब खुद को है ये टेंशन

हेलमेट मैन ऑफ इंडिया ने कहा कि मेरा क्रेडिट किसी और को चला जाता है। इससे बड़ी तकलीफ होती है। हम हेलमेट बांट रहे हैं, लेकिन अगले दिन खबर छपती है कि पुलिस हेलमेट बंटवा रही है।

हेलमेट मैन ऑफ इंडिया ने साझा किया अपना दर्द

Helmet Man of India: सड़क हादसे में दोस्त की मौत ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। इसके बाद उन्होंने तय किया सड़क हादसे में किसी की मौत हेलमेट की वजह से नहीं होगी। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर हेलमेट बांटना शुरू कर दिया। इसके लिए उन्हें फाइनेंसियल दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपने मिशन को नहीं छोड़ा। वे हेलमेट बांटने का काम करते रहे। जब अधिक पैसों की जरूरत हुई तो उन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रख दिए। उन्हें अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए घर भी बेचना पड़ गया।

लोग इन्हें हेलमेट मैन ऑफ इंडिया के नाम से जानते हैं। अब तक इन्होंने 50 हजार से अधिक हेलमेट बांट चुके हैं। स्टॉल लगाकर तो चौराहे पर खड़े होकर हेलमेट बांटते हैं। इतना ही नहीं अगर कोई बिना हेलमेट के सड़क पर जा रहा है तो उन्हें रुकाकर हेलमेट देते हैं। इसके लिए वे एक भी रुपये नहीं लेते हैं। इनका एक ही इरादा है कि हेलमेट की वजह से अब किसी की जान न जाए। इस हेलमेट मैन का नाम राघवेंद्र कुमार है।

इन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि मैं हेलमेट बांटता हूं, लेकिन अगले दिन खबर छपती है कि ये हेलमेट पुलिस ने बंटवा रही है, तो उन्हें काफी दुख होता है। उनका कहना है कि मेरा क्रेडिट पुलिस को चला जाता है। इससे बड़ी तकलीफ होती है। उन्होंने एक वाकया साझा करते हुए कि पटना में वह हेलमेट बांट रहे थे, इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी उनसे हेलमेट मांगने आए, उन्होंने दे दिए। लेकिन अगले दिन पुलिसकर्मी ने उन्हें हेलमेट बांटने से रोक दिए। उनका कहना था कि हेलमेट बांटने से बुहत भीड़ होती है, इसे कौन संभालेगा। इसके लिए पहले परमिशन लेनी होगी।

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    राघवेंद्र ने कहा ठीक है, आगे से हम परमिशन लेकर बाटेंगे। जब वे परमिशन लेने गए तो उनसे कई सवाल पूछे गए कि मैं कौन हूं, क्यों हेलमेट बांट रहा हूं, किस संस्था से हूं, कौन बंटवा रहा है, कोई साजिश तो नहीं। परमिशन मिलने के बाद हम हेलमेट बांटते रहे। अभी तक 50 हजार से अधिक हेलमेट बांट चुके हैं। कोविड के टाइम में भी हम हेलमेट बांटते रहे। लोग बाइक से ही अपने घरों के लिए निकल जाते थे। इसके लिए हेलमेट का होना बेहद जरूरी था। हम रोड पर स्टॉल लगाकर हेलमेट बांटते थे।

    उन्होंने कहा कि अब मेरा मिशन बहुत आगे बढ़ चुका है। अब उत्तराखंड सरकार के साथ काम कर रहा हूं। बिहार सरकार ने मुझे द हेलमेट मैन ऑफ इंडिया का खिताब दिया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सोनू सूद ने भी मुझे हौसला बढ़ाया है। अपने जन्मदिन पर मुझे हेलमेट भेजते हैं।

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