Speaker No-Confidence Motion: स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से इंडिया ब्लॉक ने क्यों खींचे हाथ?
Speaker Om Birla No-Confidence Motion: बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन संसद में भारी हंगामे की स्थिति देखने को मिली। जिस दिन को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के कारण ऐतिहासिक माना जा रहा था, वह दिन पूरी तरह से रणनीतिक बदलाव और स्थगन की भेंट चढ़ गया।
विपक्ष ने ऐन वक्त पर स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोलने की जगह 'खाड़ी देशों के संकट' को प्राथमिकता देने का फैसला किया, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। कांग्रेस और ममता बनर्जी की टीएमसी समेत तमाम विपक्षी दल एकजुट थे।

कांग्रेस की आंतरिक बैठक में यह तय हुआ था कि अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सरकार को घेरा जाएगा। टीएमसी ने भी स्पष्ट कर दिया था कि वे न केवल चर्चा में शामिल होंगे, बल्कि वोटिंग की स्थिति में विपक्ष के साथ खड़े रहेंगे।
Speaker Om Birla No-Confidence Motion की तैयारी थी, पर अचानक क्यों बदल गई विपक्ष की रणनीति
मंगलवार, 10 मार्च की सुबह इंडिया ब्लॉक (INDIA Block) की बैठक में परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुई इस चर्चा में दो मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनी। विपक्ष को इस बात का एहसास हुआ कि यदि स्पीकर के खिलाफ वोटिंग होती है, तो आंकड़े स्पष्ट रूप से सरकार (NDA) के पक्ष में हैं।
ऐसे में हार का सामना करने से बेहतर है कि किसी ऐसे मुद्दे पर सरकार को घेरा जाए जहां जनता का जुड़ाव ज्यादा हो। कांग्रेस नेतृत्व पर केरल के सांसदों का भारी दबाव था। चूंकि केरल के लगभग 25 लाख लोग खाड़ी देशों में कार्यरत हैं, वहां की किसी भी अस्थिरता का सीधा असर केरल की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पूरे खाड़ी क्षेत्र में फंसे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को लेकर विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाने का फैसला किया।
Budget Session 2026 के सदन में हंगामा और 'मिडिल ईस्ट' का मुद्दा
विपक्ष की नई रणनीति के तहत, जैसे ही सदन शुरू हुआ, अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा ठंडे बस्ते में चली गई और सांसदों ने खाड़ी देशों (वेस्ट एशिया) के हालात पर विदेश मंत्री के बयान और तुरंत बहस की मांग शुरू कर दी। विपक्षी सांसद हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सदन के बीचों-बीच (वेल में) आ गए। इन बैनरों पर लिखा था-मध्यपूर्व जल रहा है, भारतीय फंसे हुए हैं, मोदी जी ट्रम्प के आगे झुकना बंद करें। विपक्ष का तर्क था कि यह मुद्दा न केवल अर्थव्यवस्था से जुड़ा है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय और विदेश में रह रहे करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा से भी जुड़ा है।
मिडिल ईस्ट पर राहुल गांधी का सरकार पर सीधा हमला
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुए अपनी बदली हुई रणनीति का बचाव किया। उन्होंने कहा-वेस्ट एशिया में जो हो रहा है, उससे हमारी अर्थव्यवस्था को जबरदस्त चोट पहुंचने वाली है। स्टॉक मार्केट का हाल सबके सामने है।
तेल के दाम और देश की आर्थिक स्थिति सीधे जनता से जुड़े मुद्दे हैं। इन पर चर्चा करने में सरकार को क्या दिक्कत है? लोकसभा अध्यक्ष के मुद्दे पर हम बाद में भी चर्चा कर सकते हैं, लेकिन अभी प्राथमिकता जलता हुआ खाड़ी क्षेत्र और वहां फंसे हमारे लोग हैं।
सत्र के बाकी दिनों पर क्या रहेगा असर
विपक्ष के इस रुख से स्पष्ट है कि अब सदन में अविश्वास प्रस्ताव से ज्यादा जोर वैश्विक संकट और उसके भारत पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव पर रहेगा। हंगामे के चलते लोकसभा को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार विपक्ष की मांग को मानते हुए खाड़ी संकट पर विशेष चर्चा के लिए तैयार होती है या फिर सदन की कार्यवाही इसी तरह गतिरोध का शिकार बनी रहेगी। विपक्ष ने फिलहाल स्पीकर के मुद्दे से पीछे हटकर एक बड़ा 'पॉलिटिकल नैरेटिव' सेट करने की कोशिश की है, जिसमें अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और कूटनीति जैसे गंभीर सवाल शामिल हैं।












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