कैसे बीजेपी की पिच पर खेल रहा है विपक्ष, 'भ्रष्टाचार' पर गोलबंदी भारी पड़ सकती है ?

भ्रष्टाचार के मामले में हो रही कार्रवाई को लेकर हंगामा करना विपक्षी दलों को भारी पड़ सकता है। बीजेपी यही सोचकर अपनी रणनीति बना रही है। क्योंकि, उसे लगता है कि पीएम मोदी को इसपर काउंटर करना मुश्किल है।

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हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के आधार पर विपक्ष उद्योगपति गौतम अडानी के बहाने मोदी सरकार को घेरने की कोशिश में लगा हुआ है। दूसरी तरफ खुद के नेताओं पर जब भ्रष्टाचार के पुराने मामलों में कार्रवाई हो रही है तो इसे राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से किया जा रहा काम बताना चाहता है। बीजेपी मानकर चल रही है कि भ्रष्टाचार के मसले पर उसे घेरकर विपक्ष उसकी ही पिच पर बैटिंग करने की कोशिश में है और इसलिए उसने अपनी रणनीति भी उसी तरह से तैयार की है। एक के बाद एक विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई हो रही है। लिहाजा विपक्ष गोलबंद हो रहा है और एक तरह से सत्ताधारी दल इसमें अपना फायदा देख रही है। क्योंकि, उसे तीर निशाने पर लगता हुआ मालूम हो रहा है।

बीजेपी की पिच पर खेल रहा है विपक्ष

बीजेपी की पिच पर खेल रहा है विपक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पहली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में उतरे थे, तो भ्रष्टाचार बहुत बड़ा मुद्दा था। इस मामले में अपनी बेदाग छवि के चलते उन्होंने खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ चेहरा बनाकर पेश किया था। 'ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा' वाली उनकी टिप्पणी जनता के दिल-दिमाग में है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और विपक्ष ने राफेल मसले पर उनकी यही छवि बिगाड़ने की कोशिश की थी। लेकिन, 'चौकीदार चोर है' के नरेटिव को 'हम भी चौकीदार' अभियान से भाजपा ने पूरी कहानी ही पलट दी। पार्टी को 2019 में 2014 से भी ज्यादा सीटें मिलीं। बीजेपी ने 2024 के लिए भी अभी से वही रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। उसने ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ एकजुट होने वाले विपक्षी नेताओं को घेरने की पूरी रणनीति बना ली है।

विपक्ष के आरोपों से बीजेपी विचलित नहीं है

विपक्ष के आरोपों से बीजेपी विचलित नहीं है

विपक्ष ऐसी धारणा बनाने की कोशिशों में जुटा हुआ है कि भ्रष्टाचार के मामलों में केंद्रीय एजेंसियां जो कार्रवाई कर रही हैं, वह बीजेपी-विरोधी पार्टियों के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से किया जा रहा है। जबकि, अडानी के मसले पर सरकार चुप है। इस मसले पर तमाम विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही हैं। आम आदमी पार्टी, भारत राष्ट्र समिति, आरजेडी, डीएमके, शिवसेना उद्धव बाल ठाकरे, एनसीपी और कांग्रेस सब गोलबंद हो चुके हैं। गुरुवार को उन्होंने संसद में मानव श्रृंखला भी बनाई। लेकिन, बीजेपी इससे विचलित नहीं लग रही है। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने ईटी को बताया है, 'बेशक, वे ऐसी धारणा बनाने की कोशिश करेंगे और हम उसके लिए तैयार हैं। इन नेताओं में एक बात समान है कि उनके खिलाफ जो आरोप हैं, वह नए नहीं हैं। वे सभी भ्रष्ट वंशवाद का हिस्सा हैं।'

'मोदी बनाम भ्रष्ट वंशवादी' करने की बीजेपी की तैयारी

'मोदी बनाम भ्रष्ट वंशवादी' करने की बीजेपी की तैयारी

विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा पीएम मोदी को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले नेता के रूप में फिर से पेश करने के लिए तैयार है। पार्टी के नेता ने बताया, 'पीएम मोदी हमारा चेहरा हैं और यह मोदी बनाम भ्रष्ट वंशवादी होने जा रहा है। अब देश की जनता को तय करने दीजिए कि क्या हम सही हैं या गलत हैं।' हर राज्य में बीजेपी मोदी को ऐसे वैश्विक नेता के रूप में पेश करने के लिए तैयार ही, जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है।

भ्रष्टाचार किया है, तो कानून आप तक पहुंचेगा- बीजेपी

भ्रष्टाचार किया है, तो कानून आप तक पहुंचेगा- बीजेपी

पार्टी मानकर चल रही है कि प्रतिशोध की राजनीति के विपक्ष के आरोपों की दाल जनता के बीच नहीं गलने वाली है। इसकी वजह ये भी है कि जो पार्टियां या जो नेता एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं, जब भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों ने कदम उठाया है तो सब एक होकर बवाल काटने में जुटे हुए हैं। बीजेपी को लगता है कि जनता के बीच आम धारणा यही बन रही है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने कहा है, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किसी पार्टी से जुड़े हैं या परिवार से। अगर आपने भ्रष्टाचार किया है, तो कानून आप तक पहुंचेगा। इसमें समस्या क्या है? पहले आप भ्रष्टाचार में लिप्त रहें और फिर विक्टिम कार्ड खेलें, ऐसा नहीं चल सकता है।'

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    शायद यही वजह है कि उद्योगपति गौतम अडानी के मुद्दे पर भी विपक्ष के तमाम आरोपों पर बीजेपी कोई जवाब नहीं दे रही है। क्योंकि, पार्टी को लगता है अगर एकबार इस मसले पर बहस में उलझ गई तो विपक्षी भ्रष्टाचार के खिलाफ वाली सरकार की पूरी छवि को धूमिल करने के लिए जी-जान लगा देंगे। क्योंकि, पार्टी के नीति-निर्धारकों को लगता है कि यह मसला सिर्फ दिल्ली के हाई-प्रोफाइल गलियारों में ही चर्चा का विषय बना हुआ है। देश की जनता मोदी सरकार की वह छवि देख रही है, जिसपर अबतक भ्रष्टाचार के कोई ठोस आरोप नहीं ठहर पाए हैं। राफेल जैसे मसले की तो सुप्रीम कोर्ट ही हवा निकाल चुका है। यही वजह है कि बीजेपी 2024 के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐक्शन को बड़ा हथियार बनाए रखना चाहती है, जिसके साथ मोदी सरकार के कार्यकाल में हुआ काम और कल्याणकारी योजनाएं 'मलाई' की तरह साबित हो सकती हैं।

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