तमिलनाडु में सियासी संकट, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले विपक्षी नेता
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि तमिलनाडु सरकार से 21 विधायकों से समर्थन वापस ले लिया है इसकी जानकारी हमने राष्ट्रपति को दी है
नई दिल्ली। तमिलनाडु का सियासी संकट अब राष्ट्रपति के दरवाजे तक पहुंच गया है। विपक्षों दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है। इस डेलिगेशन में डीएमके ने सांसदों के साथ, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के नेता शामिल हुए है। विपक्षी दलों का आरोप है कि तमिलनाडु की एआईएडीएमके सरकार अल्पमत में है फिर भी वहां के राज्यपाल फ्लोर टेस्ट नहीं कराना चाह रहे हैं।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि तमिलनाडु सरकार से 21 विधायकों से समर्थन वापस ले लिया है इसकी जानकारी हमने राष्ट्रपति को दी है वहीं लेफ्ट के नेता सीताराम येचूरी ने भी तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है।
आपको बता दें कि तमिलनाडु के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने राज्य में विपक्षी दलों की मांग पर विधानसभा की बैठक बुलाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में हस्तक्षेप करने से यह कहते हुए असमर्थता जताई कि एआईएडीएमके के 19 'बागी' विधायक अभी भी पार्टी के सदस्य बने हुए हैं।
दरअसल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पनालीसामी और उपमुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने फैसला लेते हुए वी के शशिकला और उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरण को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसके अलावा शशिकला द्वारा किए गए सभी फैसलों को भी खत्म कर दिया है। कुछ दिन पहले हुई एआईएडीएमके की बैठक में टीटीवी दिनाकरण द्वारा की कई सभी नियुक्तियों को निरस्त करने का फैसला किया गया। इसके अलावा पार्टी ने यह भी तय किया कि वो अपने मुखपत्र नामाधु एमजीआर और जया टीवी को न्यायिक तरीके से वापस लेगी। इसके अलावा शशिकला को पार्टी महासचिव के पद से हटाने के लिए भी कदम उठाए जा सकते हैं।
आपको बता दें कि 26 अगस्त को दिनाकरन ने कहा था कि उन्हें एक सबक सिखाना होगा जो शशिकला को निकालना चाहते हैं। पिछले कुछ दिनों में, अन्नाद्रमुक के कई विधायक ने दिनाकरन को अपना समर्थन दिया है। दूसरी तरफ, द्रविड़ मुनेत्र कजगम (डीएमके) और कांग्रेस ने तमिलनाडु के राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वह पलानीस्वामी को सदन में अपना बहुमत साबित करने को कहे।












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