Opinion: सकारात्मक वोट बैंक का सहारा, तेलंगाना में सीएम केसीआर के सामने विपक्ष का टिकना मुश्किल
2024 में लोकसभा चुनाव से पहले तेलंगाना इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनावों के लिए तैयार हो रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के लिए यह हैट्रिक का अवसर है। इसलिए उनकी पार्टी बीआरएस की ओर से उम्मीदवारों के चयन से लेकर अन्य चुनावी रणनीतियों पर भी काम किया जा रहा है।
राजनीति में विपक्ष की ओर से कब किस तरह का प्रहार हो जाए पता नहीं। उसके हिसाब से जवाबी हथियार भी तैयार करके रखे गए हैं। चुनावी लक्ष्य एक है कि किस तरह से मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखा जाए। केसीआर का सियासी मकसद एक तरफ तो कल्याण के माध्यम से अपने वोट बैंक को बांधे रखना है, तो दूसरी तरफ विपक्ष को सियासी तौर पर दुविधा में बनाए रखना है।

केसीआर के पास हैट्रिक का अवसर
अगले दो महीनों में तेलंगाना के लिए चुनावी कार्यक्रमों का ऐलान हो सकता है। सीएम केसीआर के लिए यह चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण है। वे तब से मुख्यमंत्री हैं, जब से तेलंगाना एक अलग राज्य बना है। उनके कदम उस तरफ बढ़ रहे हैं, जो उन्हें तीसरी बार सीएम जिम्मेदारियों तक पहुंचा सके। वहीं बीजेपी राज्य में ऐसे फैसले लेना चाहती है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर वह कांग्रेस को घेर सके।

करीब एक करोड़ वोटरों पर लक्ष्य
राज्य में महज 20 दिनों के अंदर महत्वपर्ण फैसले लिए गए हैं। सीएम केसीआर की कोशिश ये है कि समाज के हर वर्ग के लोगों को अपनी नीतियों और निर्णयों से प्रभावित कर सकें। नए फैसलों के माध्यम से करीब एक करोड़ वोटरों पर असर डालने का लक्ष्य लग रहा है। जबकि, विपक्षी दलों की ओर से फैसले तो लिए जा रहे हैं, लेकिन वे लोगों को नया भरोसा दिला पाने में नाकाम हो रहे हैं।

विपक्ष के हर लुभावने वादों की तैयार है काट
बीआरएस से मुकाबले के लिए बीजेपी तरह-तरह के दावे करती रही है। लेकिन, फिर भी आज वह काफी पीछे छूट गई लगती है। कांग्रेस के लिए कर्नाटक के बाद तेलंगाना अगला टारगेट है। पार्टी हाई कमान का पूरा फोकस अब इसी पर लग गया है। वे घोषणापत्र में लुभावने वादों के माध्यम से अपना लक्ष्य साधने की कोशिशों में जुटे हैं। ऐसे में केसीआर ने अपने पहलों से उसकी काट भी तैयार कर रखी है।

सकारात्मक वोट बैंक को सहेजने की पहल
विपक्ष के तौर तरीकों ने केसीआर को समय पर सतर्क कर दिया। उन्होंने एक महीने के अंदर 12 महत्वपूर्ण फैसले लिए। लेकिन, यह यहीं नहीं थमने वाला है। कर्मचारियों के कल्याण के लिए नई तैयारियां हो रही हैं, जिनकी घोषणाएं आने वाले दिनों में देखने को मिल सकती है। जाहिर है कि 10 साल से सत्ता में होने की वजह से कुछ विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, मकसद यही है कि सकारात्मक वोट बैंक की सहायता से फिर से सरकार में वापसी की जाए।

सीएम केसीआर कुछ मौजूदा विधायकों को छोड़कर बाकी की उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा जल्द कर सकते हैं। बताया जाता है कि बेकार पड़ी जमीनों से संबंधित फैसले,आरटीसी का सरकारी तंत्र में विलय, किसानों की लोन माफी, वीआरए को रेग्युलर करना, राशन डीलरों की कमीशन में वृद्धि, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लिए की गई कोशिशें उनका मजबूत जनाधार है। वहीं गृहलक्ष्मी, दिव्यांगों के लिए पेंशन में वृद्धि, गुरुकुल छात्रों के लिए आहार शुल्क में वृद्धि, हैदराबाद मेट्रो का विस्तार ऐसे कार्य हैं, जो विपक्ष को डिफेंसिव बनाए रखेगा। इसके अलावा 29.61 लाख किसानों की 19 हजार करोड़ रुपये की कर्ज माफी को हरी झंडी मिलने से सियासी हालात सत्ताधारी दल के अनुकूल नजर आ रहे हैं।












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