Opinion: दुनिया में हैदराबाद को मिली नई पहचान, IT सेक्टर में खूब हो रहा नाम
हैदराबाद देश में एक ऐसा शहर बनकर उभरा है, जिसकी ओर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। आईटी सिटी के तौर पर इसका विकास बहुत ही तेजी से हो रहा है। आज दुनिया की 1,500 आईटी और आईटी एनेबल्ड सर्विसेज वाली कंपनियां हैदराबाद में काम कर रही हैं।
आईटी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या जो पहले 3.60 लाख थी, आज बढ़कर 9,05,715 पहुंच चुकी है। 2014 में आईटी से जुड़े निर्यात का जो मूल्य महज 57,258 करोड़ रुपए का था, वह साल 2022-23 में बढ़कर 2,41,275 लाख करोड़ रुपए हो गया। पिछले साल के मुकाबले निर्यात में तो 31.44% की वृद्धि दर्ज की गई है।

आईटी में हैदराबाद से पीछे छूट चुका है बेंगलुरु
हैदराबाद ने आईटी क्षेत्र में जो बदलाव देखा है, उसके पीछे मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की दूरदर्शी सोच और मंत्री केटी रमाराव की सूझबूझ शामिल है। इन्हीं की कोशिशों की बदौलत इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हैदराबाद शहर आज पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। परिणाम ये हुआ है कि जिस बेंगलुरु को सिलिकॉन वैली और आईटी कैपिटल माना जाता है, तेलंगाना का आईटी सेक्टर बहुत ही तेजी से उसे पीछे छोड़ दिया है।

दुनिया भर की दिग्गज कंपनियों की पसंद बना हैदराबाद
आईटी सेक्टर में हैदराबाद की ऐसी धाक जम गई है कि कई क्षेत्र की दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां इसकी ओर खिंची चली आ रही हैं। इनमें एप्पल, अमेजन,सेल्सफोर्स, उबर, माइक्रोन, स्टेटस्ट्रीट, डेवलपमेंट बैंक ऑफ सिंगापुर, फिएट क्रिसलर, मैसाचुसेट्स म्यूचुअल, इंटेल, प्रोविडेंस, गोल्डमैन सैक्स, जेडएफ, यूबीएस, पेप्सी, फेसबुक, क्वालम, एक्सेंचर, वेल्स फार्गो, जिलिनिक्स, माइक्रोसॉफ्ट, इंफोसिस, ओरेकल, टीसीएस, आईबीएम, टेक महिंद्रा, कॉग्निजेंट, विप्रो जैसी कंपनियों ने यहां अपना काफी विस्तार किया है। हैदराबाद में तेलंगाना सरकार ने टीहब-1 और टीहब-2 को जिस तरह से तैयार किया है, वह दूसरे देशों के लिए भी टेक्नोलॉजी के विकास के लिए समझदारी विकसित में नजीर की तरह है।

दिग्गज कंपनियां कर रही हैं नए सिरे से विस्तार
जाहिर है कि आईटी सेक्टर में तेलंगाना में जो अप्रत्याशित विकास हुआ है, उसका असर कंस्ट्रक्शन, ट्रांसपोर्ट और एंटरटेंमेंट क्षेत्रों पर भी पड़ा है। आईटी विभाग ने स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए टियर-2 शहरों में भी आईटी टावर्स के निर्माण के लिए कदम बढ़ाया है। अमेजन जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनी फैबसिटी, फार्मासिटी और चंदनवेली में 20,761 करोड़ रुपए की लागत से 3 डेटा सेंटर तैयार कर रही है। नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने 500 करोड़ रुपए की लागत से एक स्मार्ट डेटा सेंटर बनाया है। सेल्स फोर्स ने 1,119 करोड़ रुपए की लागत से अपने विस्तार की ओर कदम बढ़ाया है। गोल्डमैन सैक्स टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से 2,500 लोगों को जॉब मिले हैं। अमेरिकी बीमा कंपनी मैसाचुसेट्स म्यूचुअल लाइफ इंश्योरेंस 1,000 करोड़ रुपए के निवेश से ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर स्थापित करने जा रही है।

इनोवेशन के लिए मिला खुला मैदान
बड़ी कंपनियों की नजरें अब हैदराबार पर टिकी हुई हैं। कॉर्पोरेट सेक्टर में कई बड़ी कंपनियां पहले ही अपना सबसे विशाल कैंपस हैदराबाद में बना चुकी हैं और कई के दूसरे नंबर का सबसे बड़ा कैंपस यहीं है। हार्डवेयर सेक्टर में नई खोज को बढ़ावा देने के लिए तेलंगाना सरकार ने टी-वर्क्स नाम के सबसे बड़े प्रोटोटाइपिंग सेंटर स्थापित किए हैं। यह उसी तरह से है, जैसे कि सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के लिए टीहब हैं। जो नई-नई खोज करना चाहते हैं, वे फूटी कौड़ी खर्च किए बिना अपने नए-नए आइडिया के आधार पर प्रोडक्ट्स तैयार कर सकते हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर
आज हैदराबाद में सरकारी और निजी संगठनों की ओर से नवीनतम टेक्नोलॉजी के अनेकों प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। जैसे कि आर्टिफिशियर इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, क्लाउड, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी। टीहब को जिस तरह से सराहना मिली उसे देखते हुए तेलंगाना सरकार ने 400 करोड़ रुपए की लागत से 3.5 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में टीहब-2 बनाया, जो दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर बन गया।













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