Opinion: कैसे सरप्लस बिजली वाला प्रदेश बना तेलंगाना, किसानों को मिल रही है मुफ्त और निर्बाध सप्लाई

तेलंगाना में केसीआर सरकार ने अपने कार्यकाल में बिजली उत्पादन और खपत में प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बना दिया है। अगर कोई सरकार समर्पण के साथ काम करती है तो क्या हो सकता है यह तेलंगाना में देखा जा सकता है।

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काम करके कैसे आलोचकों का मुंह बंद किया जा सकता है, इसका उदाहरण तेलंगाना से बेहतर कहीं भी नहीं मिलेगा। तेलंगाना की के चंद्रशेखर राव की सरकार ने यह बताया है कि अगर विजन स्पष्ट हो, योजना आपके पास हो तो कुछ भी हासिल करना मुश्किल नहीं है। जनता और प्रदेश के प्रति समर्पण भाव ने राज्य सरकार को यह करने का भी हौसला दिया है। यही वजह कि जब तेलंगाना का गठन हुआ था तो आशंकाएं जताई जाती थीं कि अब तो अंधेरे में ही रहना पड़ेगा। लेकिन, आज देश में बिजली सुधार के क्षेत्र में तेलंगाना एक मिसाल कायम कर चुका है। 24 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई ने राज्य में एक नया इतिहास कायम किया है। तेलंगाना देश का एकमात्र राज्य है, जो खेती के लिए मुफ्त और बेरोक-टोक बिजली उपलब्ध करा रहा है और वह भी मुफ्त। बिजली खपत के मामले में भी स्थिति समान है। राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 18,453 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। किसानों के मोटर में मीटर लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को तेलंगाना सरकार ने ठुकरा दिया है। कृषि क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, औद्योगिक उत्पादन में भी इजाफा हो रहा है, जिससे बिजली की खपत सर्वोच्च स्तर को छू चुकी है।

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किसानों को मिल रही है मुफ्त और निर्बाध बिजली सप्लाई
जब तेलंगाना बन रहा था तो तब सत्ता में बैठे लोग बिजली को लेकर जनता को आशंकित करते थे। पूछते थे कि प्रदेश में बिजली कहां से आएगी। ऐसे डराने की कोशिश की जाती थी कि नया राज्य अंधेरे में डूब जाएगा। लेकिन, तेलंगाना में धीरे-धीरे बिजली सुधारों पर अमल हुआ। 24 घंटे लगातार बिजली मिलने के साथ ही वे सारी बातें अतीत बन गईं, अनसुनी होती चली गईं। तेलंगाना के गठन के समय राज्य में बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 7,778 मेगावाट थी। आज संयुक्त क्षमता 18,453 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। तेलंगाना बनने के बाद सरकार ने बिजली क्षेत्र को मजबूत करने और बिजली सप्लाई और वितरण प्रणाली को बेहतर करने के लिए 38,070 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। बिजली के उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और जरूरत के मुताबिक बिजली की खरीद करके तेलंगाना आज सरप्लस बिजली वाला राज्य बन चुका है। आज बिना रुकावट के 24 घंटे बिजली की सप्लाई की जा रही है। न कभी बिजली कटती है, न ही किसी तरह से बाधित होती है। तेलंगाना अकेला राज्य है, जहां कृषि क्षेत्र को 24 घंटे बिजली दी जा रही है और वह भी फ्री।

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    कैसे सरप्लस बिजली वाला प्रदेश बना तेलंगाना
    साल 2014-15 में यानि जब तेलंगाना का गठन हुआ था, राज्य में प्रति व्यक्ति सिर्फ 1.35 यूनिट बिजली की खपत थी। 2021-22 तक यह 2.26 यूनिट हो चुकी थी। तेलंगाना के गठन के शुरुआती दिनों में यहां सिर्फ 74 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा था। आज की तारीख में 5,741 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। यह इसलिए संभव हो पाया है, क्योंकि राज्य सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। भद्राद्री की चार यूनिट में 1,080 मेगावाट क्षमता के साथ उत्पादन शुरू गया है। कोठागुडम में 800 मेगावाट उत्पादन क्षमता उपलब्ध है। सिंगरेनी की ओर से मंचेरियल जिले के जयपुर में 1,200 मेगावाट क्षमता से निर्मित बिजली स्टेशन ने भी उत्पादन शुरू कर दिया है। नलगोंडा जिले के दमाराचेर्ला में टीएस जनरल कंपनी की ओर से बनाए जा रहे 4,000 मेगावाट यदाद्री अल्ट्रा मेगा थर्मल पावर प्लांट का काम भी अंतिम चरण में है।

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    राज्य में बिजली की खपत लगातार बढ़ती जा रही है
    राज्य में बिजली की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। कृषि क्षेत्र के विस्तार और औद्योगिक डिमांड बढ़ने की वजह से 11 फरवरी, 2023 को राज्य में 14,500 मेगावाट की डिमांड थी। विद्युत अधिकारियों का अनुमान है कि इस साल गर्मी में 15,000 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी। गर्मी का मौसम नजदीक आ रहा है, लिहाजा तेलंगाना के जिलों में बिजली की आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर तरह के उपाय शुरू कर दिए गए हैं। क्योंकि, घरेलू खपत और खेती दोनों के लिए इसकी मांग बढ़ने वाली है। तेलंगाना में केसीआर सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही बिजली की वजह से राज्य में कृषि, उद्योग और घरेलू बिजली खपत में भी एक नया रिकॉर्ड बन रहा है। किसानों के मोटर में मीटर लगाने के केंद्र सरकार की कोशिश को तेलंगाना सरकार ने पहले ही मना कर दिया है। इसकी मदद से कृषि क्षेत्र का विस्तार हो रहा है। औद्योगिक उत्पादन में भी इजाफा हो रहा है, जिससे बिजली की खपत सर्वोच्च स्तर को छू चुकी है।

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