पाक के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन जिंजर के पीछे की पूरी कहानी

नई दिल्‍ली। अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है और दावा किया है कि जुलाई 2011 में भी एक क्रॉस बॉर्डर सर्जिकल स्‍ट्राइक किया गया था। इसमें भारतीय सेना ने जिंजर में पाकिस्‍तानी सैनिकों को सबक सिखाया था और तीन पाकिस्‍तानी सैनिकों का सिर काटकर साथ ले आए थे।

अखबार ने इससे जुड़े हुए आधिकारिक दस्तावेजों के सामने आने का भी दावा किया है। अखबार के मुताबिक कुपवाड़ा बेस 28 डिविजन के मुखिया रहे रिटायर्ड मेजर जनरल एसके चक्रवर्ती ने भारत के सर्जिकल स्ट्राइक की प्लानिंग और एग्जेक्यूशन किया था।

उन्होंने कार्रवाई की पुष्टि की है, लेकिन अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। ये कार्रवाई 'जैसे को तैसे' अभियान के तहत की गई थी। तो आईए आपको विस्‍तार से बताते हैं आखिर क्‍या था भारतीय सेना का ऑपरेशन जिंजर और इसे कैसे दिया गया था अंजाम।

क्‍या था ऑपरेशन जिंजर

क्‍या था ऑपरेशन जिंजर

इंडियन कमांडोज ने एलओसी पार करके 6 जवानों की शहादत का बदला लिया था। इसे 'ऑपरेशन जिंजर' नाम दिया गया था। इसमें 8 पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया गया था। भारतीय सेना के जवान तीन पाकिस्‍तानी सैनिकों के सिर काटकर लाए थे।

क्‍यों किया गया था यह ऑपरेशन?

क्‍यों किया गया था यह ऑपरेशन?

अखबार के मुताबिक, 30 जुलाई, 2011 को कुपवाड़ा की गूगलधर चोटी पर स्थित इंडियन आर्मी पोस्ट पर पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम (बीएटी) ने हमला किया था। इस हमले में 5 भारतीय जवान मौके पर शहीद हो गए थे। बीएटी दो भारतीय जवान हवलदार जयपाल सिंह अधिकारी और लांस नायक देवेंद्र सिंह के सिर काटकर ले गई थी। इसकी जानकारी 19 राजपूत बटालियन के जख्मी जवान ने दी थी। ये जवान भी हॉस्पिटल में शहीद हो गया था।

कैसे दिया गया था ऑपरेशन को अंजाम

कैसे दिया गया था ऑपरेशन को अंजाम

अखबार के मुताबिक, इस कार्रवाई को 25 पैरा कमांडो ने अंजाम दिया था। ये लोग उनके लॉन्च पैड पर सुबह 29 अगस्त को 3 बजे पहुंच गए थे और दूसरे दिन 30 अगस्त सुबह तक रहे। यहां इन्होंने लैंड माइंस बिछाईं और 30 अगस्त को सुबह 7 बजे तक इंतजार किया। जब इन्हें तीन पाकिस्तानी जवान दिखे और सुनिश्चित किया कि एम्बुश वाली जगह की तरफ आ रहे हैं। तब तक कमांडो इंतजार करते रहे। लैंडमाइंस धमाके में वह चारों जख्मी हो गए। उसके बाद ग्रेनेड और गोलियां दागी गईं।

फिर काट लिया सिर

फिर काट लिया सिर

इंडियन कमांडो ने दौड़कर बचे तीन जवानों के सिर काट लिए। ये अपने साथ उनके हथियार और पर्सनल चीजें भी ले आए। इसके बाद जवानों की बॉडी के नीचे आईईडी बिछा दी। यह ऑपरेशन करीब 45 मिनट चला। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन को अंजाम देने के बाद इंडियन आर्मी की पहली टुकड़ी सुबह 7.45 तक लौट आई। इसके बाद दूसरी टीम दोपहर 12 बजे और तीसरी टुकड़ी 2.30 बजे तक लौटी।

सीक्रेट फाइल्‍स में दफ्न हो गया था ऑपरेशन जिंजर

सीक्रेट फाइल्‍स में दफ्न हो गया था ऑपरेशन जिंजर

ऑपरेशन जिंजर का सच पिछले पांच सालों तक आर्मी हेडक्वॉर्टर की सीक्रेट फाइल्स में दफ्न था। इंडियन आर्मी के सबसे घातक पलटवार की इस कहानी के बारे में या तो सीनियर अफसर जानते थे या फिर ऑपरेशन जिंजर को अंजाम देने वाले जांबाज कमांडो, लेकिन अंग्रेजी अखबार द हिंदू के खुलासे ने ऑपेशन जिंजर की कहानी तो देश और दुनिया के सामने ला दिया है।

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