देश में टीकाकरण की धीमी रफ्तार के लिए केवल राज्य सरकारें जिम्मेदार- डॉ. वीके पॉल

नीती आयोग के सदस्त और भारत के शीर्ष कोविड-19 सलाहकार डॉ. वीके पॉल ने टीकाकरण की कमी को लेकर राज्यों को जिम्मेदार ठहराया है।

नई दिल्ली, 27 मई। नीती आयोग के सदस्त और भारत के शीर्ष कोविड-19 सलाहकार डॉ. वीके पॉल ने टीकाकरण की कमी को लेकर राज्यों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि राज्यों ने टीकाकरण को लेकर अधूरी तैयारी से अवगत होने के बावजूद केंद्र सरकार को टीकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मजबूर किया। वैक्सीन प्रशासन पर राष्ट्रीय अधिकार प्राप्त समूह के अध्यक्ष डॉ. पाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा वैक्सीन की सप्लाई जनवरी से अप्रैल तक केंद्र द्वारा की जा रही थी और उस दौरान टीकाकरण अच्छी तरह हो रहा था, लेकिन मई में यह अपने तय लक्ष्य से काफी पीछे हो गया।

Dr. VK Paul

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    केंद्र सरकार ने वैक्सीनों की आपूर्ति के लिए वैक्सीन निर्माताओं को फंडिंग करना, अप्रूवल में तेजी लाना, उत्पादन में तेजी लाना और विदेशों से टीकों का आयात करना जैसे तमाम प्रयास किये। पीआईबी द्वारा मिथ्य बनाम फैक्ट्स प्रश्नावली के रूप में जारी किए गए उनके नोट में कहा गया है कि, 'केंद्र द्वारा खरीदा गया टीका लोगों को एकदम मुफ्त में लगाने के लिए उसकी आपूर्ति राज्यों को की जाती है। राज्य इसे अच्छी तरह जानते हैं। भारत सरकार ने राज्यों को केवल उनके स्पष्ट अनुरोध पर टीकों की खरीद का प्रयास करने में सक्षम बनाया है। राज्यों को अच्छी तरह पता था कि देश में उत्पादन क्षमता और विदेशों से सीधे टीके प्राप्त करने में क्या कठिनाइयां हैं।'

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    कम समय में वैक्सीन खरीदना आसान नहीं

    उन्होंने आगे कहा कि जो राज्य तीन महीनों में स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर की पर्याप्त संख्या नहीं जुटा सके ऐसे राज्य टीकाकरण की प्रक्रिया को खोलना चाहते थे और टीकाकरण का अधिक विकेंद्रीकरण चाहते थे। स्वास्थ्य राज्य का विषय है और उदारीकृत टीका नीती राज्यों द्वारा अधिक शक्ति देने के लिए किए जा रहे लगातार अनुरोध का परिणाम थी। परिणाम यह हुआ कि वैश्विक आवेदकों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और वही कहा जो हम राज्यों को पहले दिन से बता रहे हैं कि दुनिया भर में वैक्सीन आपूर्ति की कमी चल रही है और इतने कम समय में वैक्सीन खरीदना आसान नहीं है।

    मई के बाद से 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए टीकाकरण खोल दिया गया और राज्यों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला कसौली द्वारा स्वीकृत आधे टीकों को खरीदने की अनुमति दे दी गई।

    डॉ. वीके पॉल ने कहा कि कोविन के डाटा के अनुसार अप्रैल के पहले हफ्ते में जहां लगभग 2.5 करोड़ लोगों का टीकाकरण हुआ, मई के पहले हफ्ते में वह संख्या घटकर मात्र 87 लाख रह गई। लोगों का व्यापक टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए इस महीने केंद्र ने कोविशील्ड के दूसरे शॉट में तीन महीने की देरी करने की सिफारिश की थी।

    अक्टूबर तक 10 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन
    डॉ. पॉल ने कहा कि अक्टूबर तक देश में कोवैक्सिन की 10 करोड़ डोज का उत्पादन हो जाएगा। हालांकि पहले यह आकलन लगाया जा रहा था कि इतनी मात्रा में वैक्सीन का उत्पादन सितंबर तक ही हो जाएगा।

    उन्होंने कहा कि भारत बायोटेक अक्टूबर तक 10 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन करेगा। इसके अतिरिक्त 3 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का दिसंबर तक 4 करोड़ वैक्सीन उत्पादन करने का लक्ष्य है। इसके अलावा भारत सरकार के निरंतर प्रोत्साहन के बाद सीरम ने कोविशील्ड का उत्पादन प्रति माह 6.5 करोड़ से बढ़ाकर 11 करोड़ प्रतिमाह कर दिया है।

    बच्चों पर जल्द होगा परीक्षण
    वीके पॉल ने कहा कि टीकों का जल्द बच्चों पर परीक्षण किया जायेगा। कुछ राजनेता बच्चों के टीकाकरण के संबंध में राजनीति कर रहे हैं लेकिन हम वैज्ञानिकों की सलाह पर ही बच्चों के टीकाकरण का निर्णय लेंगे।

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