मोदी सरकार 2.0 का पूरा हो रहा है एक साल, जानिए क्‍या रहीं उपलब्‍धियां और किस मोर्चे पर हुए फेल

नई दिल्‍ली। नरेंद्र मोदी सरकार की सत्ता में दोबारा वापसी को 30 मई को एक साल हो जाएगा। साल 2014 में जब पहली बार मोदी सरकार सत्ता में आई थी तभी से हर वर्षगांठ पर उपलब्‍धियां गिनाने का दौर शुरू हो गया था। इस बार बीजेपी एक अभियान चलाने जा रही है। इस अभियान में पीएम मोदी द्वारा लिखा एक पत्र 10 करोड़ घरों में बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पहुंचाया जाएगा। इस पत्र में आत्‍मनिर्भर भारत की जानकारी के साथ कोरोना से बचाव और स्‍वस्‍थ रहने की जानकारी होगी। साथ ही इसमें विश्व कल्याण में भारत की भूमिका भी एक विषय होगा। इसके अलावा संकट की इस घड़ी में भी जश्न फीका न पड़े, इसके लिए पूरा इंतजाम किया गया है। पार्टी गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए 750 वर्चुअल रैली और 1000 वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। तो आइए दूसरे कार्यकाल के पहली वर्षगांठ पर जानते हैं कि सरकार के क्‍या किया और कहां पीछे हटी।

आर्टिकल 370 में संशोधन

आर्टिकल 370 में संशोधन

मई 2019 में जब पीएम मोदी दूसरी बार सत्ता में आए और अमित शाह को गृह मंत्रालय सौंपा गया तो कुछ ही महीने बाद कश्‍मीर से धारा 370 खत्‍म कर दिया गया। इसी के साथ कश्‍मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा भी समाप्‍त हो गया। जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया गया। एक हिस्सा बना जम्मू-कश्मीर, जिसमें विधानसभा थी। दूसरा हिस्सा बना लद्दाख, जो बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश बना। कश्मीर पर लिए गए इस फैसले का विपक्ष के लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन पूरे एहतियात के साथ मोदी सरकार अपने इस फैसले को लागू करने में कामयाब रही।

CAA और NRC लागू

CAA और NRC लागू

नागरिकता संशोधन कानून मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में बड़े फैसले के तौर पर देखा जाता है। इस कानून के खिलाफ पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हुए। कई लोगों की जानें गईं तो कई हजारों लोग घायल हो गए। इस फैसले के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक यानि कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई के लिए नागरिकता के नए प्रावधान तय किए गए। 10 जनवरी, 2020 को इस कानून के लागू हो जाने से तीन देशों के इन छह अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को नागरिकता हासिल करना आसान हो गया। नागरिकता के नए प्रावधानों में मुस्लिम का जिक्र नहीं था, जिसका व्यापक पैमाने पर विरोध हुआ।

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    तीन तलाक से निजात

    तीन तलाक से निजात

    दूसरी बार सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने सबसे पहले मुस्‍लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने का काम किया। सरकार ने 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019' को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराया। एक अगस्त 2019 से तीन तलाक देना कानूनी तौर पर जुर्म बन गया।

    यहां फ्लॉप हुई सरकार

    यहां फ्लॉप हुई सरकार

    • नागरिकता संशोधन एक्ट का तीखा विरोध हुआ। दिल्‍ली के शाहीन बाग की तर्ज़ पर सैकड़ों विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ये प्रदर्शन मार्च तक चलता रहा, जबतक देश में कोरोना वायरस का खतरा नहीं बढ़ गया।
    • दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार हुई। बीजेपी लगातार दूसरी बार दिल्ली में दहाई का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाई, जो मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भाजपा के लिए पहला बड़ा झटका साबित हुआ।
    • तबलीगी जमात ने बढ़ा दी कोरोना की टेंशन। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोदी सरकार ने देश में लॉकडाउन लगाया लेकिन, इस बीच दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित तबलीगी जमात के मरकज का खुलासा हुआ।

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