'एक रुपया डॉक्टर' सुशोवन बंधोपाध्याय नहीं रहे, उनकी लोकप्रियता के बारे में जानिए
कोलकाता, 26 जुलाई: कोई डॉक्टर अपने 60 साल से भी लंबे करियर में कभी भी किसी मरीज से एक रुपए से ज्यादा फीस नहीं ली हो, उसके मानव सेवा भाव के बारे में ज्यादा बताने के लिए कुछ भी नहीं रह जाता। पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय सुशोवन बंधोपाध्याय ऐसे ही डॉक्टर थे, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। बंगाल में उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि वे विधायक भी बने, लेकिन लोग उन्हें 'एक रुपया डॉक्टर' के नाम से ही जानते रहे। लोगों को उनकी इस पहचान से लगाव हो गया था। अपने जीवन में उन्हें डॉक्टरी के पेशे को सिर्फ तभी विराम दिया, जब कोविड महामारी के कारण उन्हें क्लिनिक बंद करने को मजबूर होना पड़ा। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरा शोख जताया है।

'एक रुपया डॉक्टर' सुशोवन बंधोपाध्याय नहीं रहे
बंगाल के लोकप्रिय 'एक रुपया डॉक्टर' सुशोवन बंधोपाध्याय मंगलवार को इस दुनिया से चल बसे। 84 वर्षीय बंधोपाध्याय पिछले दो साल से किडनी से जुड़ी बीमारी से पीड़ित चल रहे थे। उन्होंने एक चिकित्सक के रूप में पूरे 60 वर्षों तक मरीजों से सिर्फ एक रुपये की फीस ली, इसलिए लोगों ने उन्हें प्यार से 'एक टकार डाक्टर' कहना शुरू कर दिया और यह उनकी हमेशा के लिए एक लोकप्रिय पहचान बन गई। मंगलवार को जब उनका निधन हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी गहरा दुख जताया है।

बोलपुर सीट से एमएलए भी रह चुके थे
सुशोवन बंधोपाध्याय की पहचान बहुत ही सस्ते इलाज के लिए तो बन ही चुकी थी, लेकिन उन्होंने राजनीति में भी हाथ आजमाया था। वे पश्चिम बंगाल की बोलपुर विधानसभा सीट से पूर्व-विधायक थे और 1984 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वे बाद में तृणमूल कांग्रेस के भी सदस्य रहे और पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष भी बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। 2020 में मोदी सरकार ने उन्हें पद्म श्री पुरस्कार भी नवाजा था।
प्रधानमंत्री ने जताई संवेदना
2020 में ही सबसे ज्यादा संख्या में मरीजों का इलाज करने के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुआ था। पीएम मोदी ने उनके निधन के उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट में लिखा, 'डॉ. सुशोवन बंद्योपाध्याय सर्वोत्तम मानवीय भावना के प्रतीक थे। उन्हें एक दयालु और विशाल हृदय वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने कई लोगों को स्वस्थ किया। मुझे पद्म पुरस्कार समारोह में उनके साथ अपनी बातचीत याद है। उनके निधन से आहत हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना है। ओम् शांति। '

कभी लोगों का इलाज बंद नहीं किया
उधर बंगाल की सीएम ने दिवंगत लोकप्रिय डॉक्टर को याद करते हुए ट्विटर में लिखा है, 'परोपकारी डॉक्टर सुशोवन बंद्योपाध्याय के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। बीरभूम के प्रसिद्ध एक रुपया डॉक्टर अपने जनहित वाले परोपकार के लिए जाने जाते थे। मैं अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करती हूं।' मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें सिर्फ कोविड महामारी के दौरान ही मजबूरन अपनी क्लिनिक बंद करनी पड़ी, वह भी महज कुछ दिनों के लिए। नहीं तो उन्होंने अपने पूरे जीवन में लोगों को सेवाएं देने से कभी भी इनकार नहीं किया। जैसे ही कोविड महामारी की वजह लगी पाबंदियां कम हुईं, उन्होंने अपना क्लिनिक फिर से चालू कर दिया।

डॉक्टरों की हड़ताल में भी इलाज करते रहे
मानव सेवा के प्रति उनका समर्पण भाव तब दिखा था, जब2019 में एक जूनियर डॉक्टर पर हुए हमले के बाद पूरे राज्य में डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी थी। लेकिन, उन्होंने फिर भी स्वास्थ्य सेवाएं बंद नहीं की। तब उन्होंने कहा था, 'मैं किसी भी तरह से डॉक्टर पर हमले का समर्थन नहीं करता हूं। लेकिन, मैं डॉक्टरों की हड़ताल का भी समर्थन नहीं करता हूं। विरोध का रास्ता अलग होना चाहिए। क्योंकि, परेशान मरीज अपनी जान बचाने के लिए डॉक्टरों का ही हाथ पकड़ते हैं।'












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