डिजिटल इंडिया के सामने खड़ा 'वन नेशन वन रोड टैक्स'
बेंगलुरु। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस डिजिटल इंडिया वीक को हाल ही में लॉन्च किया है, उसके सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी है। ई-गवरनेंस के माध्यम से पूरे देश का रीयल टाइम डाटा कलेक्ट करने की योजना बना रही सरकार वन नेशन वन रोड टैक्स की चुनौती को कैसे हल करेगी। क्योंकि ड्राइव विदाउट बॉर्डर्स एक बड़ा आंदोलन बनता दिख रहा है।

क्या है ड्राइव विदाउट बॉर्डर्स
ड्राइव विदाउट बॉर्डर्स एक आंदोलन है, जिसके तहत बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और दिल्ली में रह रहे लोग एक जुट होकर वन नेशन वन रोड टैक्स की मांग कर रहे हैं। इस अभियान को शुरू किया है वसीम मेमन ने। खास बात यह है कि वसीम ने इस आंदोलन के लिये नौकरी तक छोड़ दी है। अब वे अपना पूरा समय वन नेशन वन रोड टैक्स को सफल बनाने के लिये दे रहे हैं। फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस के जरिये इस आंदोलन को आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्यों है यह देश की जरूरत
असल में देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों का माइग्रेशन बहुत तेजी से बढ़ा है। इस वजह से लोग यूपी से कर्नाटक, कर्नाटक से दिल्ली, दिल्ली से हैदराबाद, हैदराबाद से कोलकाता, कोलकाता से मुंबई जाकर नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में यदि आप अपना वाहन किसी अन्य राज्य में ले जाते हैं, तो आपको वहां पर भारी भरकम रोड टैक्स देना पड़ता है। नहीं दिया, तो आपकी गाड़ी को सीज़ करने का पूरा अधिकारी आरटीओ के पास रहता है।
असल में तमाम लोग यूनियन टैरेटरी से वाहन खरीद कर अन्य राज्यों में ले जाते हैं, क्योंकि वहां नई गाड़ी पर रोड टैक्स कम होता है। यही कारण है कि आरटीओ ऐसे वाहनों को पकड़ने के बाद जल्दी छोड़ते नहीं।

दूसरी बात अगर आपकी गाड़ी की कीमत 5 लाख रुपए है और पांच साल के अंदर ही खरीदी है। आप उसे दूसरे राज्य में ले जाते हैं, तो वहां आपको 10 प्रतिशत यानी 50 हजार रुपए रोड टैक्स देना पड़ेगा।
वसीम मेमन ने टीओआई से बातचीत में कहा कि सरकार ब्रॉडबैंड हाईवे से पूरे देश को कनेक्ट करना चाहती है, तो पूरे देश में एक समान रोड टैक्स क्यों नहीं लागू करती। फिर हम अगर आजाद देश में रह रहे हैं, तो दूसरे राज्य में हमें अपना वाहन ले जाने की आजादी क्यों नहीं?
इस आंदोलन से कैसे जुड़ सकते हैं आप?
यदि आप इस आंदोलन से जुड़ना चाहते हैं तो फेसबुक पर पब्लिक ग्रुप DriveWithoutBorders के सदस्य बन सकते हैं। वन नेशन वन रोड टैक्स के लिये दाखिल ऑनलाइन पिटीशन का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो इस पर क्लिक कर सकते हैं- पिटिशन फॉर वन नेशन वन रोड टैक्स। अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं।
यदि आपके पास कोई सुझाव या समस्या है, तो आप फेसबुक, ट्विटर पर #OneNationOneRoadTax के साथ पोस्ट कर सकते हैं।
अब केंद्र सरकार के पास इस वक्त एक बड़ी चुनौती है, इस समस्या का समाधान करना। क्योंकि जहां प्रधानमंत्री यह कहते हैं कि वो अपने हर काम में सभी राज्यों को साथ लेकर चल रहे हैं और मुख्यमंत्रियों के साथ उनकी एक टीम है, जो टीम इंडिया की तरह देश का विकास कर रही है, वहां अलग-अलग राज्यों में टैक्स में फर्क कैसे हो। सरकार को चेताने के लिये यह संगठन हर महीने जगह-जगह मीटिंग कर रहा है।
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