One Nation One Election: एक साथ चुनाव करवाने के लिए क्या करना होगा? 10 प्वाइंट्स

One Nation One Election Major Issues: केंद्र में सत्ताधारी नरेंद्र मोदी सरकार ने जब से 18 सितंबर से संसद का विशेष सत्र बुलाया है, अटकलों की लाइन लगी हुई है। वजह ये है कि मानसून सत्र के खत्म हुए ज्यादा समय नहीं गुजरे हैं। कयासों में सबसे अधिक संभावना 'एक देश, एक चुनाव' की लगाई जा रही है।

इस साल के अंत तक पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव करवाए जाने हैं। 2024 के अप्रैल-मई में 18वीं लोकसभा के चुनाव का समय निर्धारित है। विशेष सत्र के आयोजन के बाद से यह कहा जा रहा कि सरकार 'एक देश, एक चुनाव' की तैयारी कर रही है, जिसकी वकालत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी गंभीरता से करते रहे हैं।

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एक देश-एक चुनाव के लिए क्या करना होगा?
लेकिन, सवाल है कि क्या यह फैसला लेना और उसपर तुरंत अमल कर पाना इतना आसान है? हम यहां 10 प्वाइंट में समझने की कोशिश करते हैं कि इस फैसले पर अमल के लिए क्या करना होगा?

संविधान में संशोधन
देश में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के फैसले से पहले कम से कम संविधान के 5 अनुच्छेदों में संशोधन की जरूरत पड़ेगी।

अनुच्छेद 83: संसद के कार्यकाल से संबंधित।

अनुच्छेद 85: लोकसभा भंग करने से संबंधित।

अनुच्छेद 172: विधानसभाओं के कार्यकाल से संबंधित।

अनुच्छेद 174: विधानसभाओं को भंग करने से संबंधित।

अनुच्छेद 356: राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने से संबंधित।

आम सहमति की जरूरत
इसके लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बनाने की आवश्यता पड़ेगी।

राज्यों की सहमति
देश में शासन के लिए संघीय ढांचे की व्यवस्था है। इस वजह से सभी राज्य सरकारों की सहमति भी अनिवार्य होगी।

संविधान के मूल ढांचे पर विचार
एक साथ चुनाव करवाने के लिए विधायिका का कार्यकाल या तो बढ़ाना पड़ेगा या फिर कम करना होगा। इसे संविधान के मूल ढांचे वाली व्यवस्था से जोड़कर देखना पड़ेगा कि कहीं उस पर असर न पड़ रहा हो।

लॉजिस्टिक का बोझ
देश में इस समय करीब 10 लाख मतदान केंद्र हैं। एक साथ चुनाव करवाने का मतलब है कि ईवीएम और वीवीपीएटी की संख्या दोगुनी करनी पड़ेगी।

अभी की व्यवस्था के हिसाब से 40% बैलटिंग यूनिट (बीयू) और 20% कंट्रोल यूनिट (सीयू) रिजर्व रखी जाती है। यानी एक साथ चुनाव करवाने पर 28 लाख बैलटिंग यूनिट (बीयू ) और 24 लाख कंट्रोल यूनिट (सीयू) की जरूरत पड़ेगी। अभी जो कीमतें तय हैं, उसके अनुसार एक बीयू 8,000 रुपए और एक सीयू 9,500 रुपए की पड़ती है। मतलब, इनकी अतिरिक्त खरीदारी के लिए करीब 3,570.90 करोड़ की लागत आ सकती है।

वीवीपीएटी की भी संख्या दोगुनी करनी होगी
इसी तरह 10 लाख मतदान केंद्रों के लिए 25 लाख वीवीपीएटी की भी जरूरत होगी। क्योंकि, 25% रिजर्व में रखने का प्रावधान है। एक यूनिट की कीमत 22,853 रुपए अनुमानित रखी गई है। इसपर करीब 5713.25 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान है।

ईवीएम और वीवीपीएटी पर खर्च बढ़ेगा
यानी एक साथ चुनाव करवाने के लिए सिर्फ ईवीएम और वीवीपीएटी के इंतजाम के लिए लगभग 9,284 की अनुमानित रकम चाहिए।

मशीनों की रिप्लेसमेंट का भार भी बढ़ेगा
इन मशीनों की उम्र करीब 15 साल अनुमानित रहती है। यानी एक मशीन ज्यादा से ज्यादा तीन या चार चुनाव में इस्तेमाल हो सकती हैं। अगर अनुमान में ही मान लें तो हर 15 साल बाद देश में नई मशीनों की खरीद पर एक बड़ा आर्थिक बोझ आ सकता है।

स्टोरेज की समस्या
कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पहले ही इन मशीनों को रखने के लिए वेयरहाउस की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। कई जगह पर इन्हें निजी इमारतों और शिक्षण संस्थानों में रखा जाता है। मशीनों की संख्या दोगुनी होने पर उन्हें सुरक्षित रखने के लिए दोगुने जगह की भी जरूरत पड़ेगी।

प्रशासनिक मशीनरी पर भी दबाव बढ़ेगा
लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव दोनों अलग-अलग प्रकृति के होते हैं। एक साथ चुनाव करवाना कानून और व्यवस्था के साथ-साथ शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान के लिए भी बहुत बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए एक साथ अतिरिक्त संख्या में सुरक्षा बलों की जरूरत होगी। इससे प्रशासनिक मशीनरी पर भी भार बढ़ सकता है। (इनपुट- रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन डिविजन, लोकसभा सचिवालय)

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