One Nation One Election लागू कराने के लिए संविधान के इन 5 अनुच्छेदों में क्यों है संशोधन की जरूरत? जानें

One Nation One Election: केंद्रीय मंत्रिमंडल से 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (एक राष्ट्र, एक चुनाव) के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। करीब एक साल के लंबे मंथन के बाद पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षा वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मोदी कैबिनेट के समक्ष पेश की। उधर, मोदी सरकार ने भी इसपर अपनी सहमति देते हुए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। लेकिन, आपने वो कहावत तो, सुनी ही होगी कि अभी 'दिल्ली दूर है'।

मतलब इसे लागू करने की कवायद केंद्र में बैठी मोदी सरकार के पसीने छुड़वा सकती है। क्योंकि, भारत में लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 83, 85, 172, 174, और 356 में संशोधन की जरूरत होगी। वर्तमान चुनाव प्रणाली और संवैधानिक ढांचा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को अलग-अलग समय पर कराने का प्रावधान है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इन अनुच्छेदों में संशोधन क्यों जरूरी है....

One Nation One Election

अनुच्छेद 83 (लोकसभा का कार्यकाल)

  • लोकसभा का कार्यकाल: 5 वर्ष का होता है, जब तक कि इसे पहले भंग न किया जाए।
  • वन नेशन, वन इलेक्शन लागू करने के लिए लोकसभा का कार्यकाल इस तरह से निर्धारित करना होगा कि राज्य विधानसभाओं के साथ तालमेल हो सके। अगर कुछ राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल लोकसभा से पहले या बाद में खत्म होता है, तो इसे समन्वित करने के लिए संविधान में बदलाव जरूरी होगा ताकि दोनों चुनाव एक साथ हो सकें।

अनुच्छेद 85 (संसद के सत्र और भंग करना)

  • इस अनुच्छेद के तहत, राष्ट्रपति संसद के सत्र बुलाते हैं और लोकसभा को भंग कर सकते हैं।
  • अगर लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने हैं, तो इस प्रक्रिया को संशोधित करना होगा, ताकि सभी विधानसभाओं और लोकसभा को एक ही समय पर भंग किया जा सके या उनका कार्यकाल समायोजित किया जा सके।

अनुच्छेद 172 (राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल)

  • यह अनुच्छेद राज्य विधानसभाओं के 5 साल के कार्यकाल को परिभाषित करता है।
  • अगर, किसी राज्य विधानसभा का कार्यकाल लोकसभा के चुनाव से पहले या बाद में समाप्त हो रहा हो, तो दोनों चुनावों को एक साथ करने के लिए विधानसभाओं के कार्यकाल को या तो बढ़ाना होगा या कम करना होगा, जिसके लिए अनुच्छेद 172 में संशोधन जरूरी है।

अनुच्छेद 174 (विधानसभाओं के सत्र और भंग करना)

  • यह अनुच्छेद राज्यपाल को विधानसभा का सत्र बुलाने और उसे भंग करने का अधिकार देता है।
  • 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के लिए यह जरूरी होगा कि सभी विधानसभाएं और लोकसभा एक साथ भंग हों या उनके कार्यकाल में संशोधन हो, जिससे एक साथ चुनाव कराए जा सकें। इसके लिए अनुच्छेद 174 में बदलाव आवश्यक है।

अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन)

  • इस अनुच्छेद के तहत किसी राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है और राज्य की विधानसभा भंग की जा सकती है।
  • अगर, किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो और उसका कार्यकाल लोकसभा चुनाव के समय से मेल न खाता हो, तो इसे समायोजित करने के लिए इस अनुच्छेद में संशोधन की आवश्यकता होगी ताकि सभी राज्यों में चुनाव एक साथ कराए जा सकें।

संविधान संशोधन की आवश्यकता क्यों?

  • वर्तमान संवैधानिक ढांचा यह अनुमति नहीं देता कि लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों, क्योंकि उनके कार्यकाल और भंग होने के समय अलग-अलग होते हैं।
  • 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की अवधारणा को लागू करने के लिए इन अनुच्छेदों में बदलाव जरूरी है, ताकि केंद्र और राज्य दोनों के चुनावों को एक ही समय पर कराया जा सके।
  • यह बदलाव न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि बार-बार चुनावों में होने वाले खर्च और प्रशासनिक बोझ को भी कम करेगा।
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