लॉकडाउन में छोटे उद्योगों को बचाने का प्लान तैयार, जारी होगा 1 लाख करोड़ का फंड
नई दिल्ली: कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने के लिए सरकार ने तीन मई तक लॉकडाउन का ऐलान किया है। 40 दिन के इस लॉकडाउन से लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योग (MSME) बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इन उद्योगों को संकट से उभारने के लिए मोदी सरकार ने प्लान तैयार कर लिया है। जिसके तहत सरकार उद्योगों के बकाये को चुकाने के लिए एक लाख करोड़ का कोष बनाएगी। फिलहाल लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को कम से कम 18 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

भारतीय वाणिज्य एव उद्योग मंडल के सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि उद्योगों को घाटे से उबारने के लिए आधिकारिक क्रेडिट गारंटी के तहत बैंकों द्वारा एक कोष बनाने का फैसला लिया गया है। वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद मंत्रिमंडल के सामने प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके बाद क्रेडिट गारंटी के तहत बैंकों द्वारा एक लाख रुपये का कोष बनेगा। जिसका बीमा करवाकर सरकार प्रीमियम भरेगी। इस कोष के ब्याज का बोझ बैंक, भुगतान पक्ष और भुगतान पाने वालों के बीच बंटेगा। वहीं मार्च में सरकारी और निजी उपक्रमों का MSME पर लगभग 6 लाख करोड़ रुपए का बकाया है।
गडकरी के मुताबिक ये कोष एमएसएमई कंपनियों के लोक उपक्रमों, केंद्र और राज्य सरकारों पर बकाये को चुकाने के काम आएगा। इसके साथ ही उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से फास्ट ट्रैक सिस्टम के जरिए टैक्स रिटर्न प्रोसेस को पूरा करने का आग्रह किया है। गडकरी के मुताबिक सरकार द्वारा जारी ये फंड मोबाइल फंड होगा, जिसकी वजह से बाजार में नगदी बढ़ेगी। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने सुझाव देते हुए कहा कि हमें चीन में मौजूद तमाम विदेशी कंपनियों को भारत में कारोबार करने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।












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