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मुजफ्फरनगर दंगा: मुलायम की पहल पर जाट-मुस्लिम केस वापस लेंगे

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    नई दिल्ली। मुजफ्फनगर दंगा मामले में जाट और मुसलमान एक दूसरे के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने के तैयार हो गए हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के नई दिल्ली स्थित आवास पर मुजफ्फरनगर के जाट और मुस्लिम नेताओं के बीच बने फॉर्म्युले पर सहमति के पांच दिन बाद दंगा प्रभावित पांच गांवों के दोनों ही समूहों और पीड़ितों ने अपने मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया है। 2013 में हुए इस दंगे में 1400 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।

    मुजफ्फरनगर में हुई बैठक में मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया गया

    मुजफ्फरनगर में हुई बैठक में मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया गया

    रविवार को मुजफ्फरनगर में हुई बैठक में मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया गया। दंगे से सबसे ज्यादा प्रभावित गांव कुतबा, कुतबी, पुरबलियान, काकडा, हदोली के लोगों ने इस बैठक में हिस्सा लिया था। इस समझौते के तहत पांच गावों के 29 मुकदमें वापस लिए जाएंगे। इस दंगे में 63 लोगों की मौत हो गई थी और 50 हजार लोग विस्थापित हो गए थे। करीब 1400 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।

    सुलह के लिए लोगों से संपर्क करने वाली समिति का विस्तार भी किया गया

    सुलह के लिए लोगों से संपर्क करने वाली समिति का विस्तार भी किया गया

    इस बैठक में तीन पूर्व सांसद अमीर आलम खान, कादिर राना और हरेंद्र मलिक के साथ ही पूर्व विधायक नवाजिश आलम और पूर्व विधायक नवाजिश आलम के अलावा खाप के चौधरी, थांबेदार व अन्य लोग शामिल हुए। इस दौरान सुलह के लिए लोगों से संपर्क करने वाली समिति का विस्तार भी किया गया। कुतबा गांव में हुए दंगे में अपनी मां को खो देने वाले मोहम्मद हसन ने कहा, 'मैं भी मुलायम सिंह के आवास पर था। विपिन बालियान ने मुझे न्यौता दिया था। कई जाट और मुस्लिम नेता वहां मौजूद थे। मैंने उनके सहमति फॉम्युले पर अपनी सहमति दे दी।'

    दंगे के दौरान दर्ज कराए गए मामलों में सभी में चार्जशीट कोर्ट में आ चुकी है

    दंगे के दौरान दर्ज कराए गए मामलों में सभी में चार्जशीट कोर्ट में आ चुकी है

    मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान दर्ज कराए गए मामलों में सभी में चार्जशीट कोर्ट में आ चुकी है। अब मुकदमे सुनवाई के लिए कोर्ट में चल रहे हैं। हजारों मुल्जिम दंगे के मामलों में बने हुए हैं। जिस समय दंगे हुए, उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। उस समय बड़े पैमाने पर दंगे के मामलों में फर्जी नामजदगी कराने के आरोप लगे। अब चार साल बाद सपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आवास पर मुजफ्फरनगर के दंगे के मामलों में सुलह कराने की रणनीति बनाई गई थी।सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और चौधरी अजित सिंह के संरक्षण में एक समिति का गठन किया गया था

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    English summary
    On Mulayam Singh prodding, Muslims, Jats agree to take back Muzaffarnagar riot cases

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