'तालिबान आतंकी संगठन है या नहीं, स्पष्ट करे मोदी सरकार', उमर अब्दुल्ला ने पूछा केंद्र से सवाल
दोहा में हुई तालिबान और भारत की बातचीत को लेकर उमर अब्दुल्ला ने मोदी सरकार को घेरा है।
नई दिल्ली, 1 सितंबर: 20 साल लंबे सैन्य मिशन के बाद अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी हो गई और तालिबान ने देश पर अपना राज पूरी तरह कायम कर लिया है। हालांकि अफगानिस्तान पर कब्जे के साथ ही तालिबान ने कहा है कि वो भारत के साथ अच्छे संबंध रखना चाहता है। इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मोदी सरकार पर तालिबान के साथ दोहा में हुई बातचीत को लेकर निशाना साधा है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वो तालिबान को आतंकी संगठन मानते हैं या नहीं?
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दरअसल, मंगलवार को दोहा में तालिबान के नेताओं और कतर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल के बीच एक उच्च स्तर की बैठक हुई। इस बातचीत को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'तालिबान एक आतंकी संगठन है या नहीं, सरकार ये बात स्पष्ट तौर पर हमें बताए। आप तालिबान को किस नजर से देखते हैं? अगर तालिबान आतंकी संगठन है, तो आप उनसे बातचीत क्यों कर रहे हैं? और, अगर तालिबान आतंकी संगठन नहीं है तो क्या आप संयुक्त राष्ट्र में उसके खिलाफ जाएंगे? आप इसपर मन बना लीजिए।'
तालिबान के साथ बातचीत में भारत ने क्या कहा
आपको बता दें कि सोमवार को अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह वापसी के बाद मंगलवार को तालिबान और भारत के बीच दोहा में पहली बातचीत हुई। इस बातचीत की पहल तालिबान की तरफ से की गई थी, जिसके बाद कतर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने दोहा में तालिबान के नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक के दौरान दीपक मित्तल ने तालिबान के नेताओं से कहा कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी तरह से भारत विरोधी गतिविधियों या आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए।












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