उमर अब्दुल्ला ने INDIA ब्लॉक में सख्त किए तेवर, कश्मीर में सीट बंटवारे पर कांग्रेस-पीडीपी को अल्टीमेटम!
इंडिया ब्लॉक में यूपी, दिल्ली से लेकर हरियाणा और गुजरात तक में बात बन गई है। लेकिन, जम्मू और कश्मीर में बात बिगड़ती दिख रही है। नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि गठबंधन बीजेपी को हराने के लिए बना था कि न कि सहयोगियों की सीटें घटाने के लिए।
नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को श्रीनगर में कहा है कि पिछले हफ्ते कांग्रेस के साथ जम्मू और कश्मीर और लद्दाख सीट बंटवारे पर बात नहीं बनी थी। इसलिए आगे दूसरे दौर की बात की जाएगी।

सहयोगियों की सीटें कम करने के लिए नहीं बना गठबंधन- उमर अब्दुल्ला
उमर ने कहा है कि कांग्रेस की अगुवाई में इंडिया ब्लॉक बीजेपी की सीटें कम करने के लिए बनाया गया था, न कि अपने ही सहयोगियों की सीटें घटाने के लिए। उन्होंने इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी कश्मीर की वो तीनों ही सीटें सरेंडर नहीं करेगी, जो 2019 में वह जीती थी।
हम दूसरे दौर की बातचीत करेंगे- नेशनल कांफ्रेंस
अब्दुल्ला ने कहा, 'नई दिल्ली में एक राउंड की चर्चा हुई है। कांग्रेस की ओर से कुछ प्रस्ताव दिया गया था, जिसपर नेशनल कांफ्रेंस में पार्टी के अंदर चर्चा की आवश्यकता थी। उनके प्रस्तावों में से एक को नेशनल कांफ्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व से मंजूरी नहीं मिली है। इसलिए हम फिर जाएंगे। हम दूसरे दौर की बातचीत करेंगे। '
उमर अब्दुल्ला उन अटकलों पर जवाब दे रहे थे, जिसके मुताबिक जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख में इंडिया ब्लॉक में सीट बंटवारे पर सहमति बन गई है। इसके मुताबिक कांग्रेस जम्मू, उधमपुर और लद्दाख सीटों पर लड़ेगी। वहीं नेशनल कांफ्रेंस को श्रीनगर और बारामूला की सीटें मिलेंगी, जबकि, महबूबा मुफ्ती की पीडीपी अनंतनाग सीट पर उम्मीदवार उतारेगी।
हम सिर्फ तीन सीटों पर बातचीत कर रहे हैं- उमर
इसपर पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर के पूर्व सीएम ने कहा, 'हमें एक सीट सरेंडर क्यों करनी चाहिए? इंडिया गठबंधन का लक्ष्य बीजेपी की सीटें घटाना है, न की इंडिया गठबंधन के सदस्यों की सीटें कम करना। हम सिर्फ तीन सीटों पर बातचीत कर रहे हैं।'
2019 में नेशनल काफ्रेंस ने कश्मीर रीजन की तीनों ही सीटें- श्रीनगर, बारामूला और अनंतनाग जीती थी और भाजपा ने जम्मू रीजन की दोनों सीटों- जम्मू और उदमपुर के अलावा लद्दाख में भी जीत दर्ज की थी।
नेशनल कांफ्रेंस की सीटों पर कोई बात नहीं- उमर अब्दुल्ला
अब्दुल्ला ने कहा है कि आगे की बातचीत के लिए 'कुछ दिनों में मैं दिल्ली जा रहा हूं।' उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि बातचीत सिर्फ उन सीटों पर होगी, जो बीजेपी के कब्जे में है, जो नेशनल कांफ्रेंस के पास है, उसपर कोई बात नहीं होगी।
'सिर्फ जम्मू, उधमपुर और लद्दाख पर बात'
उन्होंने कहा, 'लद्दाख को मिलाकर सिर्फ 6 सीटें हैं। तीन सीटें वैसे भी नेशनल कांफ्रेंस के पास ही हैं। इसलिए, हम सिर्फ तीन सीटों पर चर्चा कर रहे हैं- जम्मू, उधमपुर और लद्दाख। इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह बहुत ही मुश्किल है।'
जम्मू और लद्दाख की सीटों पर चुनाव लड़ने के कतरा रहा है विपक्ष
लेकिन, तथ्य यह है कि जम्मू की दोनों सीटें और लद्दाख को बीजेपी ने पिछले दो चुनावों में अपना गढ़ बना लिया है। इसलिए, कांग्रेस कम से कम एक सीट कश्मीर में भी मांग रही है। वहीं पीडीपी भी जम्मू की किसी सीट पर चुनाव लड़ने से कतरा रही है।
कुछ हफ्ते पहले नेशनल कांफ्रेंस के सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर में अकेले चुनाव लड़ने की बात कह दी थी, जिसे उमर अब्दुल्ला ने संभालने की कोशिश की थी। अब लग रहा है कि फारूक और उमर की बातों में अंतर नहीं है, बल्कि उसे सामने रखने के तरीके में भिन्नता है।
उधर बीजेपी के बारे में कहा जा रहा है कि उसने पिछले पांच वर्षों में कश्मीर घाटी में भी अपने जनाधार को काफी मजबूत किया है। पहाड़ी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण देने की घोषणा करके केंद्र सरकार ने बड़ा दांव चला है।
कई मुस्लिम पहाड़ी नेताओं ने भी भाजपा की ओर रुख किया है। जिसकी वजह से अनंतनाग लोकसभा सीट पर उसके इस बार के प्रदर्शन का राजनीतिक विश्लेषक भी इंतजार कर रहे हैं।












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