ओडिशा: आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित करने के सरकार के कदम पर सदन में हुआ हंगामा

ओडिशा की पटनायक सरकार द्वारा आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित करने के सरकार के कदम पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी पार्टियों के सदस्‍यों ने आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित करने की अनुमति देने के राज्य सरकार के फैसले पर जमकर विरोध जताया। भाजपा और कांग्रेस के सदस्‍य पूरे दिन इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन करते रहे जिस कारण दिन भर सदन का काम-काज ठप्‍प रहा।

Odisha Assembly

स्पीकर प्रमिला मलिक द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक भी इस मुद्दे को हल करने में विफल रही क्योंकि विपक्षी विधायकों ने सरकार से 1956 के विनियमन -2 में संशोधन के प्रस्ताव को पूरी तरह से वापस लेने की मांग की। वहीं भाजपा ने अध्‍यक्ष से सदन के कार्यो को निलंबित करने वाले मुद्दे पर चर्चा के लिए एक प्रस्ताव की अनुमति देने का अनुरोध किया।

सदन के प्रश्‍नकाल के लिए जैसे ही सदस्‍य एकत्र हुए, उसके बाद ही भाजपा और कांग्रेस विधायक इस मुद्दे को लेकर वेल में आ गए और राज्‍य सरकार के इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग करने लगे। इस हंगामे के कारण कई बार अध्‍यक्ष को सदन की कार्यवाही निलंबित करनी पड़ी।

वहीं कांग्रेस सदस्यों ने राज्य में अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार (पीईएसए) अधिनियम, 1996 को लागू करने की भी मांग की। प्रदेश सरकार अपना उक्‍त फैसला वापस ले इस मांग को लेकर भाजपा के विधायकों ने सदन के बाहर प्रदर्शन भी किया।

विपक्ष के मुख्य सचेतक मोहन माझी ने कहा

आदिवासियों का, आदिवासियों के लिए और आदिवासियों द्वारा है ये राज्य सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन सरकार के हालिया कदम से यह उजागर हो गया है कि यह आदिवासी विरोधी है।

माझाी ने इसके साथ ही आरोप लगाया कि ओडिशा सरकार की कैबिनेट के द्वारा लिया गया ये निर्णय संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है, क्योंकि निर्णय को रोक दिया गया था, सरकार इसे बाद में लागू कर सकती है। भाजपा इस फैसले को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रही है।

माझी ने कहा

भाजपा ने अध्यक्ष से सदन के अन्य कार्यों को निलंबित करने वाले मुद्दे पर चर्चा के लिए एक प्रस्ताव की अनुमति देने का अनुरोध किया। हालाँकि, इसे अस्वीकार कर दिया गया था। इसलिए, हमने सदन के अंदर विरोध प्रदर्शन किया।

इसके अवाला कांग्रेस सचेतक ताराप्रसाद बाहिनीपति ने कहा

कांग्रेस पार्टी एसटी भूमि को गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित करने की अनुमति देने के फैसले के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए राज्य में पेसा अधिनियम, 1996 लागू किया जाना चाहिए।

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